साहित्य

पूजा में यह अगरबत्ती लगा लेना….जानें, स्त्री-मन के कुछ राज़!

Alka Singh
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पिता की तरफ से बेटी को अद्भुत भेंट
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विवाह के बाद, पहली बार मायके आयी बेटी का स्वागत सप्ताह भर चला।
सम्पूर्ण सप्ताह भर बेटी को जो पसन्द है, वही सब किया गया, वापिस ससुराल जाते समय, पिता ने बेटी को एक अति सुगंधित अगरबत्ती का पैकेट दिया, और कहा की, बेटी तुम जब ससुराल में पूजा करने जाओगी तब यह अगरबत्ती जरूर जलाना,
माँ ने कहा, बिटिया प्रथम बार मायके से ससुराल जा रही है, तो ऐसे कोई अगरबत्ती जैसी चीज कोई देता है भला,
पिता ने झट से जेब मे हाथ डाला और जेब मे जितने भी रुपये थे वो सब बेटी को दे दिए,
ससुराल में पहुंचते ही सासु माँ ने बहु के माता-पिता ने बेटी को बिदाई में क्या दिया यह देखा, तो वह अगरबत्ती का पैकेट भी दिखा, सासु माँ ने मुंह बना कर बहु को बोला कि , कल पूजा में यह अगरबत्ती लगा लेना,
सुबह जब बेटी पूजा करने बैठी तो वह अगरबत्ती का पैकेट खोला, उसमे से एक चिट्ठी निकली,
_लिखा था….
!! “बेटा यह अगरबत्ती स्वतः सुलगती है, मगर संपूर्ण घर को सुगंधी कर देती है, इतना ही नही यह तो, आजु-बाजू के पूरे वातावरण को भी अपनी महक से सुगंधित एवम प्रफुल्लित कर देती है….!!
हो सकता है की तुम कभी पति से कुछ समय के लिए रुठ जाओगी, या कभी अपने सास-ससुरजी से नाराज हो जाओगी, कभी देवर या ननद से भी रूठोगी, कभी तुम्हे किसी से बाते सुननी भी पड़ जाए, या फिर कभी अडोस-पड़ोसियों के बर्ताव पर तुम्हारा दिल खट्टा हो जाये, तब तुम मेरी यह भेंट ध्यान में रखना,
_अगरबत्ती की तरह जलना, जैसे अगरबत्ती स्वयं जलते हुए पूरे घर और सम्पूर्ण परिसर को सुगंधित और प्रफुल्लित कर ऊर्जा से भरती है, ठीक उसी तरह तुम स्वतः सहन कर, तेरे ससुराल को अपना मायका समझ कर सब को अपने व्यवहार और कर्म से सुगंधित और प्रफुल्लित करना…._
बेटी चिट्ठी पढ़कर फफक.कर रोने लगी, सासू-मा लपककर आयी, पति और ससुरजी भी पूजा घर मे पहुंचे जहां बहु रो रही थी।


“अरे हाथ को चटका लग गया क्या?, ऐसा पति ने पूछा।
“क्या हुआ यह तो बताओ, ससुरजी बोले।
सासूमाँ आजु-बाजु के सामान में कुछ है क्या यह देखने लगी,
तो उन्हें पिता द्वारा सुंदर अक्षरों में लिखी हुई चिठ्ठी नजर आयी, चिट्ठी पढ़ते ही उन्होंने बहु को गले से लगा लिया, और चिट्ठी ससुरजी के हाथों में दी, चश्मा ना पहने होने की वजह से, चिट्ठी बेटे को देकर पढ़ने के लिए कहा।
सारी बात समझते ही संपूर्ण घर स्तब्ध हो गया।
“सासु माँ बोली अरे, यह चिठ्ठी फ्रेम करानी है, यह मेरी बहु को मिली हुई सबसे अनमोल भेंट है, पूजा घर के बाजू में में ही इसकी फ्रेम होनी चाहिए,
और फिर सदैव वह फ्रेम अपने शब्दों से, सम्पूर्ण घर, और अगल-बगल के वातावरण को अपने अर्थ से महकाती रही, अगरबत्ती का पुडा खत्म होने के बावजूद भी…….
इसे कहते है,….
!! संस्कार……. मायके के !


Alka Singh
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स्त्री-मन एक तरफ़ जहां बहुत सरल है, वहीं बहुत जटिल भी है. स्त्री और पुरुष केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी काफ़ी भिन्न हैं. कई बार स्त्री जो कहती है, उसका मतलब वह नहीं होता है, जो वो कहना चाहती है. तो आइए जानें, स्त्री-मन के कुछ ऐसे राज़, जिन्हें शायद पुरुष कभी जान ही ना पाएं !

1. पर स्त्री प्रशंसाः चाहे कभी भी स्त्री खुलेतौर पर यह ना कहे, पर अगर स्त्री को कोई बात सबसे ज़्यादा बुरी लगती है, तो वह है दूसरी स्त्री की प्रशंसा. फिर वह स्त्री चाहे आपकी मां-बहन, दोस्त-सहकर्मी या पड़ोसन ही क्यों न हो. इसलिए अब आगे किसी भी स्त्री की प्रशंसा करने से पहले दो बार सोचिएगा ज़रूर या फिर यदि आप किसी की प्रशंसा कर भी रहे हैं, तो साथ ही अपनी पत्नी की प्रशंसा भी कर देें. स्त्री, ख़ासकर एक पत्नी कभी भी नहीं चाहेगी कि उसका पति किसी और की तारीफ़ करे. हो सकता है कि वो इस बात को कभी सबके सामने ज़ाहिर न करे, लेकिन इसे आपको समझना होगा !

2. सुझाव देनाः यह ऐसी चीज़ है, जिसे स्त्रियां पसंद नहीं करतीं या शायद नफ़रत करती हैं. यदि आपको कोई स्त्री अपनी किसी परेशानी या समस्या के बारे में बताती है, तो इसका मतलब है कि वह चाहती है कि आप उसकी बातें किसी अच्छे श्रोता की तरह सुनें और उस पर कोई सुझाव न दें. अगर आपको अपनी पत्नी के चेहरे पर शिकन और परेशानी दिखे, तो समझ जाएं कि वह चाहती है कि आप अपने सारे काम छोड़कर उससे पूछें कि समस्या क्या है और स़िर्फ सुनें. उस पर तब तक सुझाव न दें, जब तक सामने से मांगा न जाए !

3. ख़र्चों का हिसाबः यहां मामला ज़रा हटकर है. एक बात हमेशा याद रखें कि लड़कियों और स्त्रियों को दूसरों के ख़र्चों का हिसाब रखना तो पसंद होता है, लेकिन यदि कोई उनसे ख़र्चों का हिसाब मांगे और ख़ासकर अगर हिसाब मांगनेवाला पति या बॉयफ्रेंड हो, तो उन्हें पसंद नहीं आता. इसलिए आगे से अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को कभी भी फ़िज़ूलख़र्च करनेवाली ना कहें. अपने ख़र्चों की तुलना कभी भी उसके ख़र्चों से न करें. वे कभी भी आपसे इस बारे में नहीं कहेंगी, पर ऐसा कोई ज़िक्र होते ही उनका मूड ख़राब ज़रूर हो जाएगा !

4. बिन कहे समझ लेंः थोड़ा अजीब है ना, पर यह सौ फ़ीसदी सही है. सभी स्त्रियां चाहती हैं कि उन्हें किसी भी ज़रूरत या किसी भी चीज़ के लिए अपने पार्टनर से कहना न पड़े. वे चाहती हैं कि पुरुष बिना कहे ही उनकी सारी ज़रूरतों को समझ ले और उन्हें पूरा कर दे. फिर वह ज़रूरत प्यार की हो, सहारे की या फिर कोई और. ऐसा इसलिए है कि स्त्रियां ख़ुद भी ऐसी ही होती हैं, वे बिना कहे ही अपने साथी की सारी ज़रूरतों को समझ लेती हैं. स्त्रियों के लिए प्यार मांगने के लिए नहीं होता है. वे बिना मांगे मिलनेवाले प्यार में विश्‍वास रखती हैं !

5. सेंटर ऑफ अट्रैक्शनः स्त्री चाहे कई सारी सहेलियों-रिश्तेदारों से घिरी रहे, पर वह हमेशा अपने पति या साथी का पूरा ध्यान पाना चाहती है. वह चाहती है कि उनके साथी का केंद्रबिंदु वो ही रहे. स्त्री की ख़ुद की दुनिया बहुत छोटी होती है. वो हर छोटी से छोटी बात में अपने साथी का प्रोत्साहन चाहती है !

6. सही संकेत देंः हमेशा याद रखें कि स्त्रियां अवलोकन करने में माहिर होती हैं. वे कही हुई बातों से ज़्यादा अपने अवलोकन पर विश्‍वास करती हैं. स्त्रियों को ख़ामोशी और संकेतों को पढ़ना अच्छा लगता है. उदाहरण के तौर पर, यदि आप बच्चों के साथ ज़्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं, तो इसका उनकी नज़र में मतलब है कि आपमें मैरिज मटेरियल नहीं हैं. फिर आप उन्हें लाख समझाने की कोशिश करें कि आप उनसे शादी करके उन्हें ख़ुश रखेंगे. यदि आप किसी स्त्री के साथ हैं, तो उन्हें अपनी तरफ़ से सही संकेत दें !

7. स्पर्श की भाषाः पुरुष चाहे इसमें विश्‍वास रखे या न रखे, पर स्त्री स्पर्श की भाषा में बहुत विश्‍वास रखती है. हल्की-सी छुअन भी उसे रोमांचित कर सकती है या फिर किसी के ग़लत इरादों के बारे में बता सकती है. स्त्री के स्पर्श के मायने काफ़ी अलग हैं. पति का उनका स़िर्फ हाथ पकड़ना या ऑफिस से आने के बाद उन्हें बांहों में भर लेना, उनके लिए किसी ऐसे संवाद से कम नहीं, जिसमें शब्द न हो. इसलिए वे समय-समय पर चाहती हैं कि उनका साथी उन्हें प्यार से छूए या फिर बांहों में भर ले !

8. ग़ुस्से का मतलब हमेशा ग़ुस्सा नहीं होताः पुरुषों को शायद इसे समझने में थोड़ी मुश्किल हो, क्योंकि वे अपनी भावनाओं को सीधे तौर पर ज़ाहिर करते हैं, पर स्त्रियों के मामले में यह थोड़ा उल्टा है. यदि किसी दिन आप घर आएं और आपकी श्रीमतीजी ग़ुस्से में हैं, बात-बात पर आप पर बरस रही हैं, तो इसका मतलब यह मत निकालिए कि वे आपसे नाराज़ हैं. हो सकता है कि दिनभर में कुछ ऐसा हुआ हो, जिससे वह परेशान हो या हो सकता है कि उनके ग़ुस्से के पीछे कोई बहुत बड़ी पीड़ा छुपी हो. कई बार तो स्त्री अपनी किसी कमज़ोरी या बीमारी को छिपाने के लिए भी ग़ुस्सा करती है. अतः जब कभी आपको लगे कि आपकी पत्नी बेवजह ग़ुस्सा कर रही है, तो उससे लड़ने की बजाय यह जानने की कोशिश करें कि कौन-सी बात उसे परेशान कर रही है !

9. भावनात्मक प्यारः सेक्स स्त्रियों के मामले में ज़रा संवेदनशील मसला है. पहले ही यह बताया गया है कि स्त्रियां बहुत भावुक होती हैं. वे रिश्ते के हर स्तर पर पहले भावनाओं से जुड़ती हैं. सेक्स में भी ऐसा ही है. स्त्रियों के लिए सेक्स कोई प्रक्रिया या ज़रूरत नहीं है. उनके लिए सेक्स एक ऐसा माध्यम है, जिससे वे किसी पुरुष के साथ भावनात्मक स्तर पर जुड़ती हैं. वे सेक्स को शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर अधिक महत्व देती हैैं. इसलिए सेक्स के मामले में उनकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं. उन्हें सेक्स से पहले फोरप्ले पसंद है. वे चाहती हैं कि सेक्स के दौरान पार्टनर उन्हें पैंपर करे और सेक्स के बाद उनसे ख़ूब बातें भी करे !

10. जेंटलमैन पहली पसंदः आज स्त्री-पुरुष समानता का ज़माना है, बाहर स्त्री चाहे जितना पुरुषों की तरह सबल और कठोर दिखने की कोशिश कर ले, पर अपना पार्टनर वो ऐसा चाहती है, जिस पर वो निर्भर हो सके. वह ऐसा पुरुष चाहती है, जो न केवल उसकी अच्छाइयों को, बल्कि उसकी कमज़ोरियों को भी जाने. और न स़िर्फ उन्हें जाने, बल्कि उन्हें आत्मसात् कर ले और स्वीकार कर ले. वह चाहती है कि उसका पार्टनर कभी उसकी कमज़ोरियों को किसी बाहरवाले के सामने न आने दे !!

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