साहित्य

मैंने अपने जीवन में चमत्कार देखे हैं : डॉ. प्रतिभा पॉल

Pratibha Paul
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कश्मीर में केवल हिन्दुओं एवं सिक्ख समुदाय के लोगों की हत्या केवल एक आतंकवाद से जुड़ा समुदाय अथवा व्यक्ति ही कर सकता है। कोई भी धर्मगुरु,अल्लाह, ईश्वर ,भगवान, वाहेगुरु जी ऐसे किसी कृत्य पर प्रसन्न नहीं हो सकते।अगर ख़ुदा ने अपनी ही सूरत पर इन्सान को बनाया है तो फिर हम सब उसी ख़ुदा, अल्लाह, ईश्वर, बुद्ध, ईसा ब्रह्मा ,विष्णु, महेश या भगवान, आप कोई भी नाम दे दीजिए, वे इस जघन्य अपराध से कदापि प्रसन्न नहीं हो सकते। यदि ऐसे दुष्कृत्य से कोई प्रसन्न होता होगा तो उसे ही शैतान की संज्ञा दी गई है।

काश! इन्सान इस बात को समझ जाए कि कोई भी परमात्मा( जो एक ही है) ऐसे कार्य से प्रसन्न नहीं अपितु दुःखित होता है।
यह उन हत्यारों को तभी मालूम होगा जब मृत्यु के पश्चात उन्हें अल्लाह दोज़ख में फेंक देगा।

मैं, यह सब इसलिए जानती हूँ कि मुझे भगवान, अल्लाह, ईसा, नानक, बुद्ध या आप जिस भी नाम से उस परमात्मा को पुकारते हैं, कभी मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या अन्य पूजा स्थलो में नहीं मिला अपितु मन में मिला है। मैं वर्षो से किसी पूजा स्थल में नहीं गई परन्तु परमात्मा को अपने हृदय में बसाया है क्योंकि मैं भी धार्मिक घृणा की शिकार हुई परन्तु मैं सत्य, ईमानदारी एवं सत्कर्म को ही अपना धर्म मान अपने कर्त्तव्यों का पालन प्रतिफल की इच्छा किए बिना करती रही। मैंने अपने जीवन में चमत्कार देखे हैं। यही कारण है कि मैं लोगों को समझाने का प्रयास करती हूँ कि परमात्मा को प्रत्येक जीव में देखने का प्रयत्न करें न कि मन्दिर, मस्जिद, चर्च इत्यादि के नाम पर एक दूसरे से घृणा करते हुए नरसंहार करें।

मैं सभी कश्मीरी हिन्दुओं एवं सिक्ख समुदाय के साथ हुई क्रूरता की घोर निन्दा करती हूँ।

डॉ. प्रतिभा पॉल उर्फ़ प्रतिभा मेहता
(बहुभाषाविद,साहित्यकार)
एवं
महासचिव(महिला विंग)
ऑल इंडिया हिंदुस्तान कांग्रेस पार्टी


Pratibha Paul
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श्री राम, तुम्हीं से प्रश्न करूँ
जिस सीता को वरने हेतु,
शिव धनुष था उठा डाला।
जिस सीता को पाने हेतु ,
भारी धनुष था तोड़ डाला।
जिस सीता के अनुरोध पर,
कनक हिरण ने छल डाला।
जिस सीता ने तुमरे कारण,
वनवास कठिन भोग डाला।
जिस सीता को पाने हेतु,
रावण का वध कर डाला।
सीता को अक्षम्य समझ,
स्वयं से अलग कर डाला।
ऋषि आश्रम कर वन्दना,
था सीता को अपना डाला।
अब नारी को ऋषि न मिलें,
कोटि रावणों ने डेरा डाला।
तुम तो थे मर्यादा पुरुषोत्तम,
शिक्षा देने,अवतार ले डाला।
क्या मानव सीख पाया कुछ,
आदर्श स्थापित कर डाला।
हर मन में रावण है बसता ,
है,काम ,क्रोध ने डेरा डाला।
हे राम!इन रावणों को हरने,
जलाओ,इन्हें बनकर ज्वाला।
डॉ.प्रतिभा पॉल(शिमला)

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