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लद्दाख़ के जिन इलाक़ों पर चीन ने क़ब्ज़ा कर लिया है उसे अब बातचीत से वापस हासिल नहीं किया जा सकता : भारत के प्रधानमंत्री चीन के आगे असहाय, निर्बल नज़र आते हैं : रिपोर्ट

रविवार को भारत और चीन की सेना के उच्च अधिकारियों के बीच 13 वे रॉउंड की वार्ता लद्दाख में चीन के किये कब्ज़े को लेकर हुई थीं, वार्ता बे नतीजा ख़त्म हुई थी, इस वार्ता से तीन दिन पहले भारतीय मीडिया में एक ख़बर दिनभर चलायी गयी कि अरुणांचल प्रदेश की सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों में टकराव हो गया था, इस टकराव के समय भारत की सेना ने चीन के तक़रीबन 200 सैनिकों को पकड़ लिया था अथवा गिरफ़्तार या हिरासत में ले लिया था, उक्त ख़बर पर भारतीय सरकार या सेना की ओर से किसी भी तरह का कोई बयान नहीं आया था

भारतीय सेना ने चीन के 200 सैनिकों को पकड़ लिया था वाली ख़बर सोशल मीडिया पर भी छायी रही, इस के एक दिन बाद ही चीन ने 2020 में गलवान वैली में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई खुनी झड़प जिसमे भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी की अनेक तस्वीरें सोशल मीडिया/ट्विटर पर जारी कर दी थीं, चीन के तस्वीरें जारी करने के बाद उन तस्वीरों को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि गलवान वैली में हुई झड़प कितनी बड़ी थी, उन तस्वीरों के सामने आने के बाद मालूम हुआ कि चीन ने उस समय भारतीय सैनिकों की केवल निर्ममता से हत्या नहीं की थी बल्कि सैंकड़ों भारतीय सैनिकों को पकड़ भी लिया था और उनके हथियार भी छीन लिए थे, उस घटना में सैंकड़ों भारतीय सैनिक ज़ख़्मी भी हुए थे

भारत का मीडिया तिल का ताड़ बनाने, प्रोपेगंडा चलाने, नफरत फैलाने में महिर हो चुका है, पाकिस्तान के बालाकोट में भारत के दुवारा की गयी कार्यवाही के अगले ही दिन मीडिया ने फ़र्ज़ी ख़बर दे दी थी कि भारत की कार्यवाही में पाकिस्तान के अंदर 300 आतंकवादी मारे गए, ये संख्या आगे के दिनों में बढ़ते बढ़ते 700 तक पहुंचा दी गयी थी, जबकि घटना के अगले ही दिन पाकिस्तान की सरकार विदेशी मीडियाकर्मियों, राजनयिकों को अपने साथ घटना िस्थल पर सच्चायी दिखाने ले पहुंची थी, और जो असल ख़बर सामने आयी थी उसके मुताबिक भारत की सेना की बालाकोट में की गयी कार्यवाही में सिर्फ तीन कौवे मारे गए थे और कुछ पेड बर्बाद हुए थे

भारत के मीडिया ने अफ़ग़ानिस्तान के पंजशीर में तालिबान ने जब कार्यवाही की तो बताया कि पंजशीर में तालिबान की मदद पाकिस्तान की वायु सेना कर रही है, पाकिस्तान की वायु सेना के विमानों को भारत के मीडिया ने पंजशीर में हमला करते हुए, रॉकेट दागते हुए भी दिखा दिया था, जो वीडियो चलाये गए वो एक वीडियो गेम से लेकर टीवी चैनल पर चला दिए गए थे, बाद में दुनियांभर के मीडिया ने भारत के मीडिया पर चलने वाली फ़र्ज़ी ख़बरों को लेकर भारत की बदनामी हुई

इसी तरह से अरनब गोस्वामी ने अपनी समाचार चैनल पर चर्चा के दौरान ‘हवा’ में छोड़ी कि अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के अंदर मौजूद ‘सैरीना होटल’ की पांचवी मंज़िल पर पाकिस्तान कि ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लोगों ने डेरा डाल रखा है और ये जानकारी उसे उसके ‘सूत्रों’ ने दी है, इसी कार्यक्रम में अर्नब ने पाकिस्तान से भी एक व्यक्ति को चर्चा में बुला रखा था, पाकिस्तान के उस व्यक्ति ने अगले दिन अर्नब के ही कार्यक्रम में बताया कि ‘सैरीना होटल’ की पाचंवी मंज़िल है ही नहीं, ये होटल केवल दो मंज़िल का है

जिस तरह से झूठी, फ़र्ज़ी, मनगढ़त ख़बरें भारतीय मीडिया पर दिखाई जाती हैं उससे देश की छवि को अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारी नुक्सान हुआ है, देश के अंदर ऐसे मीडिया की कोई साख नहीं बची है,

अभी तक भारत के मीडिया का फेवरेट टॉपिक पाकिस्तान, मुस्लमान, बाबरी मस्जिद आदि हुआ करते थे, पाकिस्तान के चक्कर में पड़े भारतीय मीडिया ने बाक़ी मामलों से आँखें बंद रखी हुई थीं, 2020 में चीन ने मार्च-अप्रैल महिने में लद्दाख में घुसपैठ की थी, चीन ने उस समय भारत के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था, उसी समय से भारत की सेना और चीन की सेना के बीच, भारत सरकार और चीन की सरकार के बीच लगातार वार्ता होती रही है लेकिन चीन भारत के कब्ज़ा किये गए हिस्से को छोड़ने को राज़ी नहीं हुआ है बल्कि अब जा कर चीन ने साफ़ इनक़ार कर दिया है कि जो भी ज़मीन चीन के कब्ज़े में है वो चीन की है और इस पर कोई बात नहीं होगी इसके आलावा और मामलों पर बात की जा सकती है

चीन ने अपना रुख कड़ा कर लिया है अब लद्दाख़ के वो इलाक़े जिन पर चीन ने क़ब्ज़ा कर लिया है उसे बातचीत से वापस हासिल नहीं किया जा सकता है, यहाँ से आगे की परिस्थितियां सीधे-सीधे सैन्य टकराव की तरफ जाती नज़र आ रही हैं, मगर यहाँ समस्या ये है कि भारत के अंदर राजनैतिक नेतृत्व बेहद कमज़ोर है जोकि चीन जैसा आक्रामक नेतृत्व का मुक़ाबला कर पायेगा इसकी उम्मीद नज़र नहीं आती है उसकी वजह बहुत साफ़ है, जिस समय देश विदेश का मीडिया हर दिन ख़बरें दे रहा था कि चीन ने भारत के लद्दाख ने इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है उस समय प्रधानमंत्री टीवी और अवतारित होते हैं और देश को सन्देश देते हैं कि ‘हमारी सीमा में न कोई घुसा है न किसी पोस्ट पर कब्ज़ा हुआ है’, देश का प्रधानमंत्री देश की जनता से झूठ बोलता है, प्रधानमंत्री ने आज तक एक बार भी चीन के कब्ज़े को लेकर ‘चीन’ का नाम लेकर बात की है, पाकिस्तान का नाम आने पर प्रधानमंत्री मोदी की भाषा भी देश ने देखी है, वोही प्रधानमंत्री चीन के आगे असहाय, निर्बल दिखायी देते हैं

दो दशकों तक विश्व की राजनीती का केंद्र अफ़ग़ानिस्तान बना हुआ था, अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान की हुकूमत बनने के बाद सीन पूरी तरह से बदल गया है, अमेरिका भी अब पहले जैसा शक्तिशाली नहीं रहा है, भारत की सरकार चीन से मुकाबला करने के लिए अमेरिका, इस्राईल की तरफ उम्मीद की नज़रों से देख रही है, सूत्रों के मुताबिक इमरान ख़ान के अमेरिका को ‘no more’ कहने के बाद अमेरिका कश्मीर में अपना बेस बनाना चाहता है, चीन के खिलाफ अमेरिका भारत की खुल कर कोई मदद करेगा ऐसा संभव लगता नहीं है,

चीनी ताइपे के साथ भी चीन का तनाव चरम पर है, चीनी ताइपे की राष्ट्रपति ने चीन को बड़ी धमकी दे दी है कि किसी भी सूरत में चीन के सामने घुटने नहीं ठेकेंगे, वहीँ चीन का कहना है कि दुनियां की कोई ताकात चीनी ताइपे के चीन में विलय को नहीं रोक सकती है, चीनी ताइपे के साथ अगर चीन का टकराव होता है तो दर्जनभर देश चीन के ख़िलाफ़ युद्ध में कूद पड़ेंगे, ये देश हैं ऑस्ट्रिया, जापान, इंडोनेशिया, वियतनाम, अमेरिका आदि, जबकि चीन के साथ रूस, नार्थ कोरिया, मैंम्मार, पाकिस्तान होंगे

भारत के पक्ष में इस समय जो परिस्थितियां बनी हुई हैं उसमे चीनी ताइपे को तो अनेक देशों का समर्थन हासिल है मगर भारत को हासिल नहीं है, अब अगर भारत और चीन का सेना टकराव किसी समय हो जाता है तो भारत किस तरह से मुकाबला करेगा, केवल अमेरिका के अस्वाशन और इस्राईल के भरोसे भर से तो समस्या का कोई समाधान नहीं है, जबकि देश का राजनैतिक नेतृत्व चीन के आगे बेबस नज़र आ रहा है,,,,,परवेज़ ख़ान

Insider Paper
@TheInsiderPaper

BREAKING: Global Times say, experts believe the “unknown object” that collided with the USS Connecticut submarine in the South China Sea is more likely an artificial fish reef, and according to Chinese mouthpiece, US is silent because it made a “stupid mistake”.

फिर होंगे पाकिस्तान के टुकड़े?:

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। लंबी कोशिशों के बाद जब घाटी में सबकुछ सामान्य होने लगा तो फिर से पाकिस्तान ने दहशतगर्दी शुरू कर दी। आतंकवादी हमलों के जरिए जम्मू कश्मीर को अस्थिर करने की कोशिश में जुट गया है। ये हालात तब है जब पाकिस्तान खुद कई टुकड़ों में बंटने की राह पर खड़ा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन भी चल रहा है। आजादी की मांग कर रहे नेताओं का दावा है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले कुछ सालों के अंदर बलूचिस्तान, पंजाब और सिंधुदेश पाकिस्तान से अलग हो जाएगा।

क्यों अलग होना चाहते हैं?
सिंधुदेश की अलग मांग को लेकर जय सिंध मताहिदा महज (JSMM) के अध्यक्ष शफी बरफत का कहना है कि सिंधु और बलूचिस्तान में रहने वाले नागरिकों के साथ पाकिस्तान सरकार शुरू से ही भेदभाव करती रही है। जैसा 1971 से पहले पश्चिमी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में रहने वाले लोगों के साथ करती थी। यहां के नागरिकों को पाकिस्तानी सेना और पुलिस प्रतापड़ित करती है। बहुत सारे लोगों को मार डाला गया। महिलाओं और लड़कियों के साथ रेप जैसा घिनौना काम करते हैं। युवाओं को हमेशा गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं। सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाता है। अगर कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसकी हत्या कर दी जाती है।

पाकिस्तान का मकसद- पूरी दुनिया में आतंक फैले
शफी बताते हैं कि पाकिस्तान का केवल एक मकसद है कि वह धार्मिक जिहाद के जरिए पूरी दुनिया में आतंकवाद फैलाएं। पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों की हालत बहुत बुरी हो चुकी है। हिंदुओं, सिखों की संख्या अब न के बराबर बची है। ज्यादातर लोगों का धर्म परितर्वन करा दिया गया और जिन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं कराया उन्हें मार दिया गया। हिंदू बेटियों के साथ जानवरों की तरह ये लोग दुष्कर्म करते हैं और जबरन उनका धर्म बदला देते हैं।

पांच तरीका, जिनकी मदद से बंट जाएगा पाकिस्तान
शफी बरफत कहते हैं कि सिंधुदेश और बलूचिस्तान को आजादी दिलाना ही उनका और उनके संगठन का मकसद है। इसके लिए वह बड़े पैमाने पर आंदोलन चला रहे हैं। शफी के अनुसार पांच तरीका है, जिसके जरिए आसानी से सिंधुदेश और बलूचिस्तान के अलग देश होने की कल्पना हो पूरा किया जा सकता है। इनमें…

भारत सरकार सिंधुदेश और बलूचिस्तान का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए।
भारत सरकार सिंधुदेश और बलूचिस्तान के लोगों की मदद करे और उनकी आवाज बुलंद करे।
अमेरिका हमारी आवाज को सुनें और उसपर एक्शन लें।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बलूचिस्तान और सिंधुदेश में नागरिकों के साथ हो रहे अत्याचार को बंद कराएं।
अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़े लोग बलूची और सिंधी लोगों से निष्पक्ष वोट कराएं।

सोर्स – अमर उजाला

चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दी भारत को युद्ध की धमकी

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर से भारत पर विवादित टिप्पणी करते हुए युद्ध के मैदान में हराने की धमकी दी है। चीन के साथ जारी सीमा विवाद के 13वें दौर की बातचीत होने के बाद भी अब तक दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है। इस मुद्दे पर ग्लोबल टाइम्स ने भारत को धमकी देते हुए लिखा- भारत को यह बात समझ लेनी चाहिए कि उसे सीमा पर वह स्थिति नहीं मिलेगी जिसे वह चाहता है। अगर भारत युद्ध शुरू करता है तो वह इसमें हार जाएगा।

ग्लोबल टाइम्स ने चीन को भी सलाह देते हुए लिखा कि उसे सीमा पर शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन भारत के खिलाफ हर तरह के सैन्य संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। अखबार ने भारत पर अवसरवादी होने का आरोप भी लगाया। ग्लोबल टाइम्स ने कहा- भारत को लगता है कि चीन-अमेरिका के खराब होते रिश्तों के बीच चीन को उसकी जरूरत है, पर सीमा विवाद देश की गरीमा से जुड़े होते हैं।

भारत पर लगाया अनुचित मांगे रखने का आरोप
अखबार ने भारत पर अन्य मुद्दों पर भी गलत मांग उठाने के आरोप लगाएं और कहा कि चीन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार है, गलवान घाटी इसका सबूत है। भारत अगर बॉर्डर पर लंबे समय तक गतिरोध बनाना चाहता है तो चीन भी इसके लिए तैयार है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पश्चिमी थिएटर कमांड ने भी इस मामले पर बयान दिया है और कहा है कि चीन ने सीमा पर शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश की है। इसके अलावा पीएलए ने भारत पर कई अनुचित मांगे रखने का भी आरोप लगाया और इसे अवास्तविक बताया, जबकि भारत का आरोप है कि सीमा पर चीन ने वास्तविक स्थिति बदलने की कोशिश की है।

WiKi(中文)
@Decryptworld
·Oct 9
June 2020 China-India border conflict. Indian soldiers captured by the PLA. The number of captives appears to exceed 500. The professional PLA strictly adheres to the Geneva Conventions and gives the most advanced medical treatment to Indian prisoners. #Galwan

linz
@supergranlinz
Warning sign UPDATE – China accused India of ‘unreasonable and unrealistic demands’ and urged it ‘not to misjudge the situation’ after the corps commander-level talks on resolving the LAC stand-off have broken down.

China is drifting more and more in the direction of a conflict with its

Ali Hussain
@AliHuss66701285
China and India border conflict

All talk between China and India meaningless

India back Support is also not that effective

Border tension is very high

Expecting big clash soon

Ashok Swain
@ashoswai
Oct 11
Where is Quad when China doesn’t vacate the areas that it has captured? Where is Quad when China is amassing troops at the border and turns LAC to LoC? Why is the West worrying about Taiwan’s territorial integrity but not of India? Who is responsible?

Shah
@syed5610
Oct 11
Quad is for protecting American intrests only and any escalation that involves American troups is not under Quad’s agenda. Conflict between India and China is considered as internal matter just like Kashmir

Indian anti-China hawks incite US to go to war. Will the US possibly listen?

Global times, china
By Lin Lan
Published: Oct 12, 2021

Indian geo-strategist Brahma Chellaney, who has long been an anti-China scholar, has talked wildly again by providing arrogant advice that even most US scholars would think twice before saying it – calling on Washington to make it “crystal clear” that it would “mobilize its own military resources to defend Taiwan.”

In an opinion piece of Project Syndicate on Monday, Chellaney urges the US to make a credible commitment to defend the island of Taiwan militarily or it may be a “mortal blow to America’s global preeminence.”

As an Indian, Chellaney is giving ill-intentioned advice to the US, urging the US to threaten to go to war. Although many countries have paid lip service on the Taiwan question, they tend to avoid officially pledging defending Taiwan militarily, including the US. By inciting Washington, Chellaney wants India to profit from escalating China-US tensions over the Taiwan question.

The gap in strength between the two sides of the Taiwan Straits has clearly tilted in favor of the mainland. The mainland holds the initiative to resolve the Taiwan question. The mainland has formed an absolute military advantage over Taiwan. If the US military participates in the war, it must face the consequences.

This makes anti-China figures such as Chellaney anxious. Facing such a situation, Chellaney can only instigate the US: “If the United States cannot (or will not) prevent Taiwan’s subjugation, why should anyone else count on US protection?”

But Chellaney will only be disappointed: Despite the proactive moves and even disclosing “a US special-operations unit and a contingent of Marines have been secretly operating in Taiwan to train military forces there,” the US would still refrain from making clear its threat to go to war. In fact, Washington has been avoiding making such clear statements as it cannot afford the consequences.

“On whether Washington should militarily defend Taiwan, there is no consensus inside the US – because it means sending American soldiers to the forefront and investing huge resources. The US may invest even more than it did in Afghanistan. Washington is not prepared to fight a large-scale war with Beijing, and believes that it does not necessarily have a chance to win,” Zhang Tengjun, deputy director of the Department for Asia-Pacific Studies at the China Institute of International Studies, told the Global Times.

Chellaney also declared in the article: “But if some resolution can be found that reduces tensions in the Himalayas, it would free up Chinese capabilities to deal with the fallout of any Taiwan-related operation.”

These words expose the naive ideas of some Indian anti-China hawks who want to use the China-India border issue to tie up China on the Taiwan question. The position of Chellaney and his like is full of opportunism, trying to use the Taiwan question, China-US relations and other issues to provide India with a strategic bargaining chip. However, they should understand that China will never waiver when it comes to safeguarding its territorial sovereignty.

Other countries’ provocative moves on the Taiwan question will only strengthen the Chinese mainland’s resolve to realize reunification, and will only make the critical moment come earlier. These countries also know that if they make it “crystal clear” to militarily defend Taiwan, they will be risking their soldiers’ own lives.

Chellaney has made hollow calls in the article, but he forgot to mention the severe consequences Washington will face by militarily involving in the Taiwan question. Chellaney tries to add fuel to the fire on the Taiwan question, but it is very unlikely for him to stir up muddy waters.

 

India’s unreasonable demands in 13th military talks ‘risk new conflict’

By Liu Xuanzun and Chen Qingqing
Published: Oct 11, 2021

After China and India failed to reach an agreement during the latest round of corps commander-level talks over the western section of China-India border issues, the Chinese People’s Liberation Army (PLA) Western Theater Command on Monday slammed India for its unreasonable and unrealistic demands, with India also sparking new incidents along the eastern section of the border recently. Chinese experts have warned of the risks of a new conflict, saying that China should not only refuse to give in to India’s arrogant demands on the negotiation table, but also be prepared to defend against another Indian military aggression.

China and India held the 13th round of corps commander-level talks at the Chinese side of the Moldo-Chushul border meeting point on Sunday, during which India insisted on unreasonable and unrealistic demands, adding difficulties to the negotiations, the PLA Western Theater Command said in a statement released on Monday.

Eyeing the overall situation in the China-India relations and the relations between the two countries’ militaries, China has made tremendous efforts to ease and cool down the border situation and fully demonstrated its sincerity, said Senior Colonel Long Shaohua in the statement.

China’s determination to safeguard sovereignty is unwavering, and China hopes India will not misjudge the situation, cherish the current, hard-earned situation and take actions with sincerity to safeguard the peace and stability at the border by abiding to the relevant agreements and consensus reached by the two sides, Long said.

During the talks, China and India discussed further troop disengagement in the region, but as the Chinese statement suggests, India attempted to push China to make concessions to only India’s favor, which is inappropriate from China’s consideration of safeguarding sovereignty, territorial integrity and security, Qian Feng, director of the research department at the National Strategy Institute at Tsinghua University, told the Global Times on Monday.

While China focuses on the big picture, wanting both sides to meet each other half way, its patience has run out, and it had to shatter India’s arrogant thoughts with the statement, Qian said.

Song Zhongping, a Chinese military expert and TV commentator, told the Global Times on Monday that India has been conspiring to seize territories along the border, and it likely demanded for Chinese territories or unreasonable troop deployment along the Line of Actual Control. It’s a very aggressive move and compared with China’s attempts to reach mutual accommodation, India is totally against the practical needs of both sides to manage difference.

Due to Indian aggressions on the Chinese land, China and India have been engaged in a border confrontation in the western section of the two countries border since May 2020, highlighted by a clash in the Galwan Valley in June 2020, leading to 20 deaths on the Indian side and four on the Chinese side.

After many rounds of military and diplomatic talks over the past year to resolve the issue, some periodical achievements were reached, including the disengagement in locations like the Pangong Tso. A full disengagement is yet to be realized.

The strong-worded Chinese statement on India’s unreasonable and unrealistic demands at the 13th round of corps commander-level talks came shortly after Indian media outlets cited Indian government sources claiming on Friday that the Indian army temporarily detained a few Chinese troops in Zangnan area of southern Xizang (Tibet) for “incursion” in this area.

In response, a Chinese military source was quoted by Chinese state-owned media as saying that the report was purely fabricated.

Chinese border troops conducted a routine patrol on September 28 in the Dongzhang area on the Chinese side of the China-India border and encountered unreasonable obstruction from the Indian military. The Chinese officers and soldiers took countermeasures resolutely and returned after the patrol mission was completed, the Chinese military source said.

Observers noted that Dongzhang is in the eastern section of the China-India border, and this means India has been making aggressive moves from both the western and eastern sections.

With the support from Western countries like the US and driven by domestic populism, India is increasingly making provocations on China. This is compounded by India’s economic and racial problems, which makes the Modi government to shift internal contradictions to the outside, Song said.

China should continue to negotiate with India to maintain peace and stability, but without yielding an inch of ground, Song said, noting that in the meantime, China also needs to brace for the possibility of another Indian military aggression, as India is risking a new round of conflict.

If India ignores China’s stance displayed in the latest talks, continues or even aggravates its aggressions without changing itself, the possibility of another accident or conflict could arise, Qian said.

Beniyam Tajzeea
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आज सब से ज्यादा तनाव मे “सेना प्रमुख” नरवणे जी है मगर इस तनावपुर्ण परिस्थिति मे ऊन के साथ कोई भी खडा नही है..
मोदी की इमेज बेहतर बनाने के लिये भारतीय मिडिया चायना के खिलाफ फर्जी खबरे चला कर भारतीय समाज को भ्रम मे (नशे मे) रखे हुवे है..
और भारतीय समाज जित का जश्न मना रहा है..
भौतिक तौर पर देखा जाए तो चायन भारत से अलग अलग क्षेत्रो मे दुगना तिगना कही पाँच गुना तो किसी क्षेत्र मे दस गुना आगे है ..और आत्मनिर्भर भी है.
अमेरिका मतलब ट्रंप के बहेकावे मे आकर मोदी ने चायना से पंगा जरूर लिया और पुराने तनाव को हवा देकर अपनी ही जमीन स्वँप कर दी..
इतना कुछ होने पर भी अमेरिका ने भारत की अभी तक कोई खास मदद नही की..
शायद अमेरिका को भारत मे फौजी अड्डा मिलने के बाद ही अमेरिका भारत की मदद करेंगा और हर साल खुब पैसा लेंगा.
जानकारो को पता है के पिछले पाँच छह साल से दुनियाभर मे कोई बेहतरीन एअर डिफेंस सिस्टम है तो वो रूस द्वारा बनाया गया S-400 सिस्टम है..
मगर अमेरिका भारत पर बरसो से ये दबाव डाल रहा है के एअर डिफेंस सिस्टम मुझ से खरीदो..
भारत को अमेरिकी एअर डिफेंस सिस्टम की मर्यादा पता थी इस लिये भारत ने रशिया से S 400 का सौदा तय कर लिया मगर बिच के सालो मे अमेरिका के दबाव के चलते डिलीवरी माँगने मे जल्दबाजी इस लिये नही दिखाई क्यो की अमेरिका का डर था..
पिछले साल भारत चायना का तनाव अचानक बढ गया भारत के पास S 400 सिस्टम ना होने की वजह से भारत ने चायना को दर्जन भर बार वार्ता ओ मे लगाकर टाईम पास किया..
अब दिसंबर मे भारत को S 400 की डिलीवरी मिलने जा रही है जो बेहद जरूरी है मगर ऊस के पहेले ही अमेरिका भारत को धमकाने लगा है के रूस से S 400 डिफेंस सिस्टम लिया तो प्रतिबंध लगा देंगे..
अमेरिका अपने गैर युरोपीय देशो को बेहद कमजोर लाचार बना कर रखता है कुछ बदमाशीयाँ और मनमानी करने की छुट भी देता है ( ता के बाद मे गलतियां पकड कर सजा दी जा सके ) और रोज के नये नये युध्दो मे अपने मित्र को घसीटता रहेता है..
अमेरिका ने भारत पर अफगानिस्तान को आँपरेट करने की जिम्मेदारी सौपी है..
और वहाँ बहोत कुछ हो रहा है मगर ये बाते गजवा ए हिंद को सचमूच न्यौता देने जैसी है इधर चायना खडा है और भविष्य मे टु फ्रंट वाँर निश्चित है..
हमे पाकिस्तान को अफगानिस्तान और भारत की कैची मे पकडकर टु फ्रंट वाँर करना था मगर ऊधर इमरान खान ने पडौसी मकान मालिको ( अमेरिका , गनी , भारत ) को निकाल बाहर कर पडौसी बदल कर अफगानिस्तान साईड क्लिअर कर ली है ..
अब भारत को टु फ्रंट वाँर का खतरा है..
सेनाप्रमुख नरवाणे बेहद तनाव मे है और मोदी सरकार जनता से राज्यो से जातीयो से किसानो से युध्द करने मे व्यस्त है..

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India-China 13 round talks collaps : Chinese army put tank regiments near the Indian border : Report

October 12, 2021newseditorComments Off on India-China 13 round talks collaps : Chinese army put tank regiments near the Indian border : Report

According to Chinese state media, China’s Xinjiang military district troops tested high-altitude battle capabilities with a variety of tank manoeuvres near Indian border, South China Morning Post reported on Monday.

As territorial talks between the two sides failed over the weekend, the Chinese army put tank regiments through their paces near the Indian border, according to state media.

The Chinese Xinjiang military district, which faces Indian troops at an elevation of 5,000 metres (16,400 feet) in the Karakoram Mountains, has been actively improving its high-altitude tank battle capabilities, according to state broadcaster CCTV report.

Talks between Indian and Chinese army commanders to disengage troops from key friction areas along their border have ended in a stalemate, the two sides say, and have failed to end a 17-month standoff that has occasionally resulted in deadly clashes.

In a statement issued on Monday, India’s defence ministry said it made “constructive suggestions,” but the Chinese side was ” not agreeable” and “could not provide any forward-looking proposals.”

A Chinese military spokesperson said, the Indian side continues to make unreasonable and unrealistic demands, complicating negotiations.
The ongoing standoff means that the two countries will keep troops in Ladakh’s forward areas for a second consecutive winter in dangerously cold temperatures.

According to another report, a brigade in western Sichuan conducted a live ammunition test-fire of grenade launchers for the first time.
According to SCMP, the PLA has also given soldiers in Xinjiang and Tibet the latest Type 15 lightweight tank, which is designed for mountainous terrain.

Two weeks ago, the Xinjiang military district conducted overnight live-fire drills with self-propelled guns and rockets on the Karakoram range in minus 10-degree Celsius snowy conditions, the report stated.

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