कश्मीर राज्य

1200 वर्ष बाद बनी राष्ट्रवादियों की सरकार और चरक्रवर्ती सम्राट मोदी के राज में कश्मीरी पंडितों का तेज़ी से पलायन शुरू…

कश्मीरी पंडितों के एक संगठन का कहना है कि सरकारी नौकरी कर रहे समुदाय के कुछ लोगों ने अपनी जान को खतरा होने को लेकर यहां से जम्मू जाना शुरू कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन एक सुरक्षित माहौल उपलब्ध करा पाने में अक्षम है। इन लोगों को 2010-11 में एक पुनर्वास पैकेज के तहत सरकारी नौकरी दी गई थी।

सूत्रों ने बताया कि इस बीच, प्रशासन ने अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों को 10 दिनों की छुट्टी दी है।

उल्लेखनीय है कि सात अक्टूबर को शहर में एक सरकारी स्कूल के अंदर वहां की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद और एक शिक्षक की करीब से गोली मार कर हत्या कर दी गई। इसके साथ ही छह दिनों में कश्मीर घाटी में सात नागरिकों की हत्या हो चुकी है।

कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिकू ने कहा कि लगभग 500 या इससे अधिक लोगों ने बडगाम, अनंतनाग और पुलवामा जैसे इलाकों को छोड़कर जाना शुरू कर दिया है। कुछ ग़ैर कश्मीरी पंडित परिवार भी चले गए हैं, यह 1990 के बाद पलायन का दूसरा दौर है।

उन्होंने कहा कि हमने जून में उप-राज्यपाल कार्यालय से मिलने का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक वक्त नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस तरह के घटनाक्रमों पर आजकल सोशल मीडिया के चलते ज्यादा ग़ौर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम इस बात से अवगत हैं कि कौन-कौन लोग छोड़कर चले गए।

संगठन ने कहा यह अब बिल्कुल स्पष्ट है कि कश्मीरी प्रवासियों को रोज़गार मुहैया करने के विश्वास बहाली उपाय को अल्पसंख्यक विरोधी ताकतें स्वीकार नहीं कर रही हैं।

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