साहित्य

गुलाबबर्फ़ी…आप सभी की दिवाली मंगलमय हो 🙂💥💥💥

Madhu
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ससुराल में मेरी वो पहली दिवाली थी । किसी भी लड़की को ससुराल में हर पहले त्यौहार पर मायका शिद्दत से याद आता है । वक़्त के साथ धीरे धीरे वो कसक जाती है लेकिन शुरुवाती दौर में डार से बिछड़ी चिरैया नए परिवेश में अनुकूलन के लिए बहुत संघर्ष करती है । नए परिवार का दिल जीतने की कोशिश , अपनी नई नई उपस्थिति से अवसरों की उत्सवधर्मिता को और अधिक रंगीन करने के प्रयास करते हुए चुपचाप पीहर भी याद करती है ।

मुझे पहली दिवाली पर घर बहुत याद आ रहा था। धनतेरस पर सोचने लगी कि इस समय मम्मी 13 दिए जला चुकी होगी । हमारे आँगन में तुलसी चौरे के सामने जलते 13 दियो के चारों तरफ पानी घुमा सर नवा रही होगी । मेरी बहने जलते दीपक बाउंड्रीवाल पर रख रही होंगी । क्या उन सबको भी मैं इतना याद आ रही होंगी कि इस दिवाली पर घर का एक सदस्य कम है । छोटी बहन ने पता नही रंगोली की कौन सी डिजाइन डाली होगी । घर में कितनी चहल पहल मची होगी बस मैं वहाँ नही हूँ ।

दोपहर 12 बजे से पापा मम्मी से पूछ रहे होंगे — ” मैं बाजार जा रहा हूँ एक बार में सब सामान बताना । लक्ष्मी पूजा तक बाजार दौड़ाती हो ।मैं शाम के बाद बाज़ार नही जाऊँगा । दुकानों में हद से बाहर भीड़ होती है ।” मुझे अपनी शादी के पहले लगता था जैसे मैं यहाँ से गयी तो ये लोग कैसे रह पाएँगे ? त्यौहार कैसे मन पाएगा ? मम्मी कितनी अकेली पड़ जाएगी । पापा के बाज़ार जाते समय लिस्ट में एक बार में ही सभी सामान लिखने की याद रहेगी उन्हें ??

मेरे मायके में पारिवारिक सामाजिकता इतनी ज्यादा है कि पतिदेव कई बार मुझे छेड़ते है – हाँ तुम देहाती लोग 15 दिन तक त्यौहार मनाते हो । पंडित को सीधा भेजो , गोवर्धनपूजा पर गाय के संग एक थाल में खाना खाओ ,अन्नकूट में पचासों किस्म के साग मिलाकर बनाओ , लक्ष्मी जी के सामने खड़े होकर फुलझड़ी जलाओ , शाम दिया बत्ती के बाद सामान मत खरीदो , नए कपड़े पहनने से पहले भगवान को छुवाओ , मोहल्ले भर में थाली पकड़े प्रसाद बॉटने डोलो , त्यौहार वाले दिन तेल भरी कढ़ाही चूल्हे पर चढ़ाओ, गोबर से आँगन में छड़ी छिट्टा । कितने टोटके है तुम कस्बाई लोगों के ।

तो ससुराल में मेरी पहली दिवाली थी । अकेली बहू होने का कष्ट उस दिन समझ आया । मायके में लोग ज्यादा थे तो हाथ बंटाने वाले हाथ भी ज्यादा थे । एक अगर पकवान बना रहा तो दूसरा रात का भोजन पका लेता । कोई बाहर रंगोली डाल रहा है तो दूसरा साफ सफाई कर लेता , कोई दीपको में तेल भर देता , कोई भगवान के पास पूजा की तैयारी करता । ये बात महिलाएँ बहुत अच्छी तरह समझती होंगी कि , शक्कर पारे, बालुस्याही, लौं ग लता, नमकीन ,खस्ते , गुझिया बनाने में दो व्यक्ति होने चाहिए । एक भरते जाए , काटता जाए तो दूसरा गर्म तेल में तलते जाए । पहली दिवाली पर ससुर जी ने खोआ और मैदा लाकर रख दिया । मुझे लगा पापा ने यदि खोआ और मैदा लाया है तो इन दोनों के मिश्रण से कौन सी डिश बनती है ? मम्मी को फोन लगाया — मम्मा खोआ और मैदा आया है क्या बनाऊ?

मायके में मुझे बेसिक कुकिंग आती थी लेकिन पकवान तो कभी नही बनाया था । मम्मी ही बनाती थी । पकवान बनते समय रसोई में घुसने पर मम्मी कंझा(झुंझला) जाती थी– तुम लोग बीच बीच में मत झपाओ ।

रसोई में पकवान बन रहे हो और प्रवेश की अनुमति नही ये बच्चों पर क्रूर अत्याचार था । आखिरकार मम्मी की सहायता के लिए हम आतुर बच्चों पर बहुत अहसान हुआ तो रसोई से बाहर बैठकर नमकीन सलोनी बेलने काटने मिल जाती थी । मतलब शादी के पहले तक गर्म तेल भरी कढ़ाई में झाय झाय की आवाज़ के साथ गुझिया मैंने नही डाली –” तुमसे नही बनेगा , तेल बहुत गर्म है । मैं चिरौरियाँ करती तो नमकीन के एक दो टुकड़े एक बार की अनुमति मिल जाती — “चलो एक पीस तेल में डाल दो।” गर्म तेल से भयभीत कढ़ाई से वो दूरी मेंटेन रखते कि तेल में छोड़ने की बजाय ऊँचाई से डाइव करवाते और गर्म तेल उछलकर प्लेटफार्म ,गैस पीछे की दीवार पर छींटकता । मम्मी को बस इसी एक गलती का इंतज़ार होता –हो गया अब तेरा । चल फटाफट भाग लो इधर से ।

उस वक्त यही सोचती थी कि जब मेरी शादी होगी तो तेल में तलने वाला ये रुचिकर काम अकेले करुँगी और कोई मदद करने आएगा तो उसे बेगारी वाले उबाऊ काम बताऊँगी — जाओ सोफे के धुले कवर चढ़ा दो , क्राकरी साफ कर दो लेकिन रसोई में पकवान तलने वाले ,गर्म मीठी खुशबू का मजा लेने अकेले रहूँगी ।
ईश्वर ने मेरी उस कामना को गम्भीरता से लिया और पहली दिवाली पर वास्तव में मदद के लिए कोई न था ,😂।

मैदे और खोए से दो सम्भावित पकवान गुझिया और गुलाबजामुन ही बनते है इतना ज्ञान मम्मी से फोन पर मिल गया । अकेले साफ सफाई करते हुए मेरे हाथ पाँव जवाब दे चुके थे लेकिन पकवान बनाने की चिरप्रतीक्षित कामना पूरी हो रही थी । मैं भी तेल में कुछ डालूँगी और कढ़ाही में असंख्य बुलबुलों की झनझनाहट पर झारा चलाऊंगी । मम्मी से फोन पर सलाह माँगने लगी — मम्मी आप बताओ क्या बनाऊ ?? मम्मी को मेरी फिक्र होने लगी — मधु अकेले कैसे करेगी ?? अगर गुझिया बनाने सोचेगी तो उसे बनाने में दो लोग लगते है । तुझे अकेले मसाले भरने में 2 घण्टे लगेंगे …फिर धीमी आंच में तलने में दो घण्टे …तुम बोल रही हो कि फिर तुम्हें ही डिनर भी बनाना है । साफ सफाई के बाद तो पकवान बना रही है तो आज या तो बाहर से खाना मंगवा लो । मैंने कहा — मम्मी आप तो ये बताओ कि गुझिया कैसे बनेगी ?

मम्मी दिवाली पर अपनी बेटी का पहला इम्प्रेशन खराब नही होने देना चाहती थी — मधु सुनो गुझिया मत बनाओ । बहुत पीचकाट है ।गुझिया का भरावन हो भी जाए तो पूड़िया पतली बेलकर उसे साँचे में डालकर भरना तुमसे नही हो पाएगा। कढ़ाही के गर्म घी में कई बार गुझिया फूट भी जाती है । अच्छे से सीलबंद नही होगी तो पूरे घी में मसाला फैल जाएगा। मैने आश्चर्य से पूछा — क्या गुझिया तेल में नही तलते ??? मम्मी झुंझला गयी– मीठी चीज तेल में नही बनती ।हमेशा घी में ही बनाते है । तुम एक काम करो गुलाबजामुन बना लो। गुझिया से गुलाबजामुन आसान रहेगा ।

मैदा और खोआ को एक साथ खूब मलो ..खूब ज्यादा फिर छोटे छोटे गोले बनाकर धीमी आंच में गोल्डन होने तक तलो और चाशनी में गर्म गर्म डाल दो।
मम्मी की बातों से क्या बला का एक्साइटमेंट जागा । लगा मैं भी किसी चैनल के कूकरी शो की होस्ट हूँ और शो में दिखाए जाने वाले प्रचलित शब्द जैसे …सुनहरा होने तक तलिये … नमक स्वादानुसार …हरी चटनी के साथ गर्म गर्म सर्व करें… नरम होने के पहले ही डिब्बा बन्द कर दे और करारे खस्ते तैयार ….. मसालों को दरदरा पीसे …. हल्का भूरा तब तक भूने जब तक मसाला कढ़ाही न छोड़ने लगे ….ऊपर से धनियापत्ती छिड़क कर मेहमानों को सर्व करें ….। संजीव कपूर और तरला दलाल के नाम के जयकारे लगाते हुए मैदा और खोआ मिला लिया । मम्मी पहले ही मैदे और खोए का अनुपात बता चुकी थी। मैदा खोए से ठीक आधा होना चाहिए ,एक चुटकी बेकिंग सोडा , खूब मलना । समझ नही आ रहा था कि गुलाबजामुन बनाने की खुशी ज्यादा थी या मम्मी के आगे ये साबित करने कि देखो आपने जिस बेटी को नाकाबिल समझा वो आपसे बेहतर करके दिखाएगी। जिसे निकम्मा समझ तेल भरी कढ़ाही में एक बार झारा चलाने की इजाज़त दे एहसान करती थी आज उसकी किस्मत बुलन्द है । वो भी जिम्मेदार इंसान है और अकेली दिवाली की सफाई और पकवान बना रही है ।

मम्मी के बताये अनुसार गुलाबजामुन के मिश्रण को घड़ी पर नजर रखते हुए 15 मिनिट तक खूब मला ।हथेलियां दुखने लगी फिर भी उत्साह था ।आज वो दिन है कि मैं भी कढ़ाही से छानकर निकालूंगी । कोई नही कहेगा कि जाओ किचन से बाहर । जल जाओगी । घरवालों ने एकदम ही बेवकूफ समझ रखा था । कितने अनाकर्षक काम थमा देते थे — जाओ तो सोफे के धुले कवर चढ़ाओ , चादर टाइट बिछाओ, पर्दे लगा दो । ये कोई काम थे भला । ऐसे बेरंग के अरूचिपूर्ण काम जिनकी कोई तारीफ नही होती । जो जरा भी माउथ वाटरिंग नही और ना ही आई कैचिंग ।आज अपने ससुराल में मुझे सारा हुनर दिखाने का मौका मिला ।

गुलाबजामुन के लिए छोटी छोटी लोइयाँ काटी और गोल आकार देने लगी। मन में कैसी जिम्मेदारी भरा रूवाब आ रहा था क्या कहना । गुथे आटे की लोई को दोनों हथेलियों के बीच पाँच मिनिट तक गोल गोल.. गोल ..गोल.. गोल ..घुमाया लेकिन ये क्या ?? गुलाजामुन की गोली के सफेद सतह पर धागे से महीन ,पतला ,घुमावदार क्रेक फिर भी रह जाता । एक भी गोली विदाउट क्रेक बन ही नही रहे थे । । मेरी दर्द करती हथेलियों में लाल लाल निशान बन गए लेकिन गुलाजामुन के क्रेक नही गए ।मैंने खुद को समझाया कि तलने के बाद ये क्रेक गायब हो जाएंगे , नही दिखेंगे ।

कढ़ाही में घी गरम करने रखा ।मम्मी की हिदायत याद थी कि पहले घी को तेज गरम हो जाने देना फिर एक बार घी गरम हो जाने के बाद गैस सीम कर देना। घी गरम हुआ या नही देखने के लिए बूंदी बराबर लोई डालकर देखना । यदि घी गरम है तो लोई फौरन तली छोड़ ऊपरी सतह पर तैरने लगेगी । मारे एक्साइटमेंट के मैंने वैसा ही किया और लोई ऊपर आ गयी ।मम्मी के ही निर्देशन में उनसे बेहतर करके दिखाने के मंसूबे सफल होते दिख रहे थे ।

चासनी तो आसानी से बन गयी । दो कटोरी शक्कर , एक कटोरी पानी का अनुपात । गैस सिम में कर 7 से 8 गुलाबजामुन कढ़ाही में छोड़ चमत्कार की प्रतीक्षा में मुस्कुराती खड़ी रही । इंतज़ार में कि अब ये सफेद गुलाबजामुन रूप बदलकर सूखे , करारे , भूरे , नन्हे गुलाजामुन बन तेल की सतह पर प्लास्टिक बॉल से तैरेंगे और झारे से बाहर निकलेंगे ।
लेकिन ये क्या ?? सभी गुलाबजामुन कुकुरमुत्ते की तरह ऊपर से छतरी की तरह हल्के खोखले फूल गए और आधा नीचे का भाग वैसा ही रहा –हे भगवान कढ़ाही के इन 7 से 8 गुलाबजामुन ने तो बिल्कुल रूप ही बदल लिया ।फौरन गैस ऑफ किया और मम्मी को फोन लगाया — माँ वो आधे आधे फूल गए जैसे अंग्रेजी का आठ(😎 बन गया हो जिसका ऊपर वाला छल्ला बड़ा है । मम्मी ने सर ठोक लिया — मधु तलते समय गुलाब जामुन पूरे घी में नही डूबे थे ।ऊपर का जो भाग घी में नही डूबा था वो भाँप से फूल गया। तलते समय गोलियों को घी में फूली डीप रहने देना ।

‘अच्छा’ मैंने इस लापरवाही के अंदाज़ में कहा कि बस इतनी सी बात थी ।मतलब बचे हुए गुलाबजामुन अच्छे तल जाएंगे । मैंने इस बार कढ़ाही को घी से लबालब किया ।पहली बार के अधतले सफेद कुकुरमुत्ते गुलाबजामुन एक थाली पर पड़े मुझे मुँह चिढ़ा रहे थे ।

घी गरम होने के बाद धैर्य और महान उत्सुकता के साथ फिर गुलाबजामुन छोड़े । जरा देर बाद हठीले गोल गुलाजामुनअपना गोल आकार छोड़ वापस लुगदी अवस्था को प्राप्त करने लगे । गरम घी में टूट टूटकर बड़ी मेहनत से बनाया गया वृत्ताकार रूप त्यागने लगे ।अबकि बार मेरा कलेजा बैठने लगा । पूरी रसोई और प्लेटफार्म चारों तरफ मैदे के सफेद पाउडर और चाशनी की चिपचिपी से गन्दे हो चुके थे । मैदा छानने की छन्नी, तेल सनी थालियाँ , चिपचीपे चम्मच, भगोनी ,यत्र तंत्र सर्वत्र शक्कर के दाने मानो हिरोशिमा में एटम का धुँआ हटने के बाद का दृश्य हो । कढ़ाही का गर्म घी गुलाजामुन की फूटी लुग्दियो और सूजी जैसे अवशेषों से भरा था ।इस समय तक रात के 8 बज चुके थे । डिनर भी रेडी नही था । गैस बंद कर सभी सामानों को पहले साइड रखा कि इनका जो करना है करेंगे पहले अब डिनर बनाऊ ।मम्मी को फोन किया ” मधु तुम्हे चुटकी भर बेकिंग पावडर बोला था। पक्का बेकिन पावडर ज्यादा हुआ है इसलिए फूट रहे है ।” अबकि बार मेरा धैर्य जवाब दे दिया — मम्मी चुटकी में कितना पावडर आता है ये चुटकी में पकड़ने पर भी डिपेंड करता है ।आपको पहले ही बताना था कि जरा सा ।

मैंने सबको डिनर करा देने के बाद रसोई में चुपचाप कढ़ाही में तैरते उस लुगदी को छानकर अलग किया , थाली से कुकुरमत्ते वाले गुलाबजामुन और कढ़ाही में अपने घी डुबकी की प्रतीक्षा करते बचे नौनिहाल अनतले गुलाबजामुनो को एक साथ एक बर्तन में ऐसी तैसी मसल कर गुस्सा निकाला ।मुझे कुछ भी नही पता था कि मैं क्या बनाने जा रही हूँ । इस पूरे मिश्रण को कढ़ाही में भूंजने रख दिया । कम से कम इतनी अक्ल थी कि यदि कच्चा मैदा पड़ा है तो भुंजना जरूरी है 😂। आधा घण्टे तक खोआ और मैदे के इस मिश्रण को भूंज लेने के बाद शक्कर डाल दिया । शक्कर पड़ते ही कढ़ाही में खदबदाहट होने लगी । गैस बंद करके पूरी सामग्री को एक थाली में पलट दिया । देखकर लगा कि यह अगर सूख जाए तो शायद बर्फी सी कट सकती है । दिवाली की साफ सफाई के बाद गुलाबजामुन बनाने के इस तांडव ने बुरी तरह थका दिया । थाली में पड़े इस मिश्रण का भविष्य सुबह ही पता चलेगा सोचकर सोने चली गयी । इस सम्पूर्ण मिश्रण में बारीक बारीक गाँठे थी जो भूंजने के बाद भी एकसार नही हुई थी । असल में दो खेप के आधे तले हुए गुलाबजामुन के टुकड़े ही एकसार मिश्रित नही हो पाए थे । मेरी वही मध्यमवर्गीय मानसिकता कि खाने का सामना फेकने में न जाए ।

सुबह सोकर उठी थी तो सबसे पहले दौड़कर रसोई में पहुँची ।थाली में खूबसूरत जमावट ने स्वागत किया । चाकू से बर्फियो का आकार देकर काट लिया।लक्ष्मी पूजा नही हुई थी इसलिए चखा नही लेकिन कम से कम बाहरी रूपरंग खतरनाक नही लग रहा था । इन बर्फियो का रंग पेड़े जैसा गुलाबीपन लिया सफेद था और सतह खुरदुरी थी फिर भी मन में भय था कि ससुर जी ने खोआ तो गुझिया या गुलाबजामुन के लिए ही लाया गया होगा । उन्हें नाश्ते में ये दोनों नही मिले तो लगेगा खोआ का मैंने कुछ नही बनाया ?? मार्केट से गुलाबजामुन मंगवा चुपचाप रसोई के डब्बों में भरकर एक सुगढ़ गृहणी बन गयी ।

बर्फी का स्वाद बहुत ज्यादा अच्छा था ।कही न कही अपने जात भाई गुलाबजामुन जैसा ही था ।आखिरकार गुलाबजामुन और इस बर्फी दोनों का मिश्रण और अनुपात तो बिल्कुल एक ही था । बर्फी का खस्तापन लाज़वाब था । मेरी सगी छोटी बहन उन दिनों मेरे शहर के ही हॉस्टल में रहकर इंजीनियरिंग कर रही थी। दिवाली की छुट्टियाँ खत्म होने के बाद वो वापस हॉस्टल आई । मैं ये बर्फियाँ एक टिफ़िन में लेकर अपनी पाककला का प्रदर्शन करने उसके पास गई।उसकी रूममेट्स सहित सभी ने …सो यमी..सो क्रिस्पी.. कहकर चांव से खाया । इस बर्फी का क्या नाम है ?? मैंने हँसते हुए कहा..गुलाबबर्फ़ी… ।

शादी के पहले लगता था मम्मी कितनी लापरवाही से काम करती है। एक दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के बाद उन्होंने चाकू से नारियल के खोपले से नारियल निकालते निकालते चाकू से हाथ लहूलुहान कर लिया था । तब लगता था कि मम्मी बात बात पर चिड़चिड़ा जाती है, सामान भूल जाती है लेकिन जब खुद के सर पर गृहस्थी , पर्व , रिश्तेदारी की जिम्मेदारी आई तो समझ आया कि जो पचासों काम हाथ में लिए जो पूरे घर की जरूरतें पूरी करता चरखी सा फिर रहा है उससे एक न एक काम तो बिगड़ेगा ही । अबकी दिवाली जब पकवान चखे तो याद रखिएगा कि चाशनी में किसी ने अपना शत प्रतिशत प्रयास भी घोला है । त्यौहार की तैयारी में घर पर थोड़ी जिम्मेदारी भी साझा करिये । आप सभी की दिवाली मंगलमय हो 🙂💥💥💥

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