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अमरीका के दबाव के बावजूद भारत और रूस के रिश्तों में तेज़ी आई : भारत और रूस के बीच हुआ बड़ा सैन्य समझौता : रिपोर्ट

सामरिक और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने के लिए रूसी राष्ट्रपति का भारत दौरा

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन भारत के दौरे पर हैं। कोरोना वायरस की महमारी आने के बाद से पुतीन का यह दूसरा विदेशी दौरा है जिसमें वह अपने पारम्परिक पार्टनर भारत के साथ ऊर्जा और सामरिक क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर ख़ास ध्यान देंगे।

इस बीच लगता है कि अमरीका ने भारत से अपना दबाव कम कर लिया है जिसके बाद नई दिल्ली के लिए मास्को से रिश्तों को नई गति देना आसान हो गया है। अमरीका चाहता है कि भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर चीन और रूस की ओर से उत्पन्न होने वाली चुनौतियां से निपटे।

शीत युद्ध के ज़माने में भारत रूस के काफ़ी क़रीब था और दोनों देशों के बीच रणनैतिक साझेदारी लंबे समय तक चली मगर हालिया दशकों में देखा गया कि अमरीका की ओर भारत का झुकाव बढ़ा है।

भारतीय थिंक टैंक इस दौरे को ख़ास महत्व दे रहे हैं। मगर पुतीन के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भारत से अपने रिश्तों को बढ़ाने के साथ ही चीन को नाराज़गी का मौक़ा न दें। चीन रूस का बेहद क़रीबी घटक है।

वहीं रूस और भारत के संबंधों की बात की जाए तो अमरीका के दबाव के बावजूद इसमें तेज़ी आई है। रूस ने भारत को एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम की सप्लाई शुरू कर दी है जबकि उसने भारत के साथ मिलकर एके-203 एसाल्ट राइफ़ल का ज्वाइंट वेंचर भारत में लगाया है जिसे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।


भारत और रूस के बीच बड़ा सैन्य समझौता, समझौते में अमेठी को मिला विशेष दर्जा, जानिए क्या वजह है???

भारत और रूस के बीच 5 हज़ार 100 करोड़ रुपये का रक्षा समझौता हुआ हुआ है।

यह समझौता AK-203 रायफ़लों के निर्माण का है। इन राइफ़लों की मैन्युफ़ैक्चरिंग उत्तर प्रदेश के अमेठी में की जाएगी। सोमवार को भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री सेरगे शोइगु के बीच हुई बातचीत के दौरान यह समझौता हुआ है। इस समझौते के अंतर्गत 5 लाख से ज्यादा राइफलें तैयार की जानी हैं।

रूस और भारत के बीच अगले 10 साल तक सैन्य तकनीक के सहयोग को लेकर भी समझौता हुआ है और यह समझौता 2021 से 2031 तक लागू रहेगा।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समझौते के बारे में ख़बर देते हुए ट्वीट किया कि भारत को मज़बूत सहयोग देने के लिए हम रूस का अभिनंदन करते हैं, हम उम्मीद करते हैं कि यह सहयोग शांति, सद्भाव और स्थिरता लेकर आएगा, हर्ष की बात है कि हमारे बीच छोटे हथियारों के निर्माण और सैन्य सहयोग को लेकर कई तरह के समझौते हुए है।

इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूसी रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगु के साथ बैठक में कहा था कि भारत और रूस के संबंध बहुपक्षवाद, वैश्विक शांति, समृद्धि और आपसी समझ और विश्वास पर आधारित हैं।

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उभरती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में आज वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन एक बार फिर हमारे देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के महत्व की दर्शाता है।

उधर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2+2 अंतर मंत्रालयी वार्ता में कहा कि आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौतियां नई चुनौतियों में से हैं। जयशंकर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत एवं रूस के संबंध बदल रहे विश्व में ‘बहुत करीबी एवं समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।

उन्होंने कहा कि संबंध असाधारण रूप से स्थायी रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि हम वैश्विक भूराजनीतिक माहौल के एक महत्वपूर्ण चरण में मिल रहे हैं जिसमें बहुत बदलाव हो रहे हैं विशेषकर कोविड-19 महामारी के बाद में।

उन्होंने आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद और चरमपंथ को क्षेत्र की प्रमुख चुनौती करार दिया। जयशंकर ने कहा कि करीबी मित्र एवं सामरिक भागीदार के रूप में भारत एक रूस हमारे साझा हितों को सुरक्षित रखने और अपने लोगों की शांति एवं समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति का मध्य एशिया सहित व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

ज्ञात रहे कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूसी रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगु और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भारत और रूस के बीच पहली बार 2+2 अंतर-मंत्रालयी वार्ता की।

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