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अवैध जायोनी शासन के पास 200 से अधिक परमाणु वार हेड्स हैं : ईरान और यूएई के संबंधों में कोई रुकावट नहीं : रिपोर्ट

राष्ट्रपति का बड़ा बयान, क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है, दुश्मन भय पैदा करने की कोशिश कर रहा है…

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति का कहना है कि क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है और ईरान फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों की सुरक्षा का समर्थन करता है।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने सोमवार को यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शैख़ तहनून बिन ज़ाएद आले नहयान से मुलाक़ात में दोनों देशों के संबंधों के अतीत की ओर संकेत किया और कहा कि क्षेत्रीय देशों के साथ अच्छे संबंधों को नई सरकार की विदेश नीति में प्राथमिकता हासिल है और इसीलिए हम संयुक्त अरब इमारात के साथ संबंधों में विस्तार का स्वागत करते हैं।

राष्ट्रपति रईसी ने कहा कि ईरान और यूएई के संबंधों में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए और यह संबंध कभी भी विदेशियों के प्रोपेगेंडों से प्रभावित नहीं होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के दुश्मनों की नीतियां, पड़ोसियों के बीच भय पैदा करना है लेकिन यह षड्यंत्र संयुक्त सूझबूझ और समझ से नकाम हो जाएंगे।

राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने क्षेत्रीय मुस्लिम जनता के समर्थन को ईरान की अटल नीति क़रार दिया और कहा कि ज़ायोनी क्षेत्र में अपनी साज़िशों में लगे हुए हैं और उन्हें जब भी मौक़ा लगेगा वह लड़ाने और विस्तारवाद से कभी भी नहीं चूकेंगे इसीलिए क्षेत्रीय देशों को होशियार रहना चाहिए।

इस मुलाक़ात में संयुक्त अरब इमारात के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शैख़ तहनून बिन ज़ाएद आले नहयान ने कहा कि हम इस क्षेत्र की संतान हैं और हमारा एक ही भविष्य है इसीलिए दोनों देशों के बीच संबंधों में विस्तार, हमारी कार्य सूची में शामिल है और हम ईरान के साथ सहयोग विस्तार के लिए तैयार हैं। 

 

ईरान ने बताया किस तरह जनरल सुलैमानी ने दाइश के बढ़ते क़दम रोके और क्षेत्र को शांति का उपहार दिया…

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री का कहना है कि वार्ता में ईरान की मांग, जेसीपीओए से बढ़कर नहीं है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने अपने सीरियाई समकक्ष फ़ैसल मेक़दाद के साथ तेहरान में संयुक्त प्रेस कांफ़्रेंस में कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने सामने वाले पक्ष को जो लिखित विषय वस्तु दी है वह पूरी तरह से संयुक्त समग्र कार्य योजना जेसीपीओ की परिधि में है और कोई भी चीज़ परमाणु समझौते में वर्णित समझौते से बाहर की नहीं है।

विदेशमंत्री ने दोनों देशों के संबंधों को रणनैतिक और अच्छा क़रार दिया और पवित्र रौज़े की रक्षा करने वाले शहीदों के बलिदानों और उनकी क़ुरबानियों की सराहना की।

विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि हम उन ईरानी शहीदों को जिन्होंने सीरियाई सेना के साथ मिलकर आतंकवाद से संघर्ष और क्षेत्र में सुरक्षा की स्थापना में भूमिका अदा की विशेषकर जनरल क़ासिम सुलैमानी को जिन्होंने क्षेत्र में मुख्य भूमिका अदा की, श्रद्धांजलि पेश करते हैं।

उन्होंने सीरिया में ईरान की प्रदर्शनी के आयोजन की ओर संकेत करते हुए कहा कि सीरियाई विदेशमंत्री की तेहरान यात्रा ऐसे समय में हो रही है कि जब सीरिया में ईरान की सबसे बड़ी प्रदर्शनी लगी हुई है।

विदेशमंत्री ने यह बयान करते हुए कि ईरान, सीरिया में मौजूद उन विदेशी सैनिकों की उपस्थिति का विरोध करता है जो सीरिया की सरकार और जनता की इजाज़त के बिना मौजूद हैं, कहा कि हम इस उपस्थिति को क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के हित में नहीं समझते।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने सीरिया के बारे में कुछ पश्चिमी और अरब देशों की विदेश नीतियों में पुनर्विचार करने और दमिश्क़ में अपने दूतावास को पुनः खोलने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

उन्होंने सीरिया पर इस्राईल के आए दिन के हमलों के बारे में कहा कि ग़ैर क़ानूनी आतंकवादी ज़ायोनी शासन, पश्चिमी एशियाई क्षेत्र में अशांति की जड़ है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि सीरिया कभी भी देश की रक्षा और अपनी धरती की सुरक्षा में में प्रतिरोध से न तो पीछे हटा है और न कभी हटेगा।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि इस्राईल के साथ सांठगांठ, क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के हित में नहीं है।

सूप तो सूप, चलनी भी बोले जिसमें 72 छेद, इस्राईल ने बड़ी शक्तियों के माध्यम से ईरान से मांग कर दी!

इस्राईल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि बड़ी शक्तियों को चाहिये कि वे ईरान पर दबाव डालें कि वार्ता आरंभ होने से पहले वह यूरेनियम का संवर्द्धन बंद कर दे।

समाचार एजेन्सी फार्स के अनुसार नफ्ताली बेनेट ने रविवार को कहा कि बड़ी शक्तियों को चाहिये कि वे तेहरान पर दबाव डालें कि ताकि वियना वार्ता का दूसरा दौर आरंभ होने से पहले वह यूरेनियम का संवर्द्धन बंद कर दे।

बेनेट ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में कहा कि मैं वियना में ईरान के साथ वार्ता करने वाले हर देश का आह्वान करूंगा कि वह मज़बूत व ठोस दृष्टिकोण अपनाये और ईरान को यह समझायें कि दो चीज़ें एक साथ नहीं चल सकतीं कि यूरेनियम का संवर्द्धन हो और वार्ता भी हो।

उन्होंने कहा कि वियना वार्ता से हमें लाभ उठाना चाहिये ताकि अमेरिका में हम अपने दोस्तों से कह सकें कि यूरेनियम का संवर्द्धन बंद करने की मांग, ईरान पर दबाव डालने का अच्छा हथकंडा है।

गुरूवार को इस्राईली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने अमेरिकी विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन से टेलीफोनी वार्ता में कहा था कि वियना वार्ता को तुरंत बंद करके तेहरान के खिलाफ कड़ी नीति व दृष्टिकोण अपनाये जाने की ज़रूरत है।

जानकार हल्कों का मानना है कि इस्राईली प्रधानमंत्री को शायद यह बात ज्ञात नहीं है कि परमाणु समझौते में यूरेनियम संवर्धन को बंद करने की बात नहीं कही गयी है जो तथाकथित बड़ी शक्तियां ईरान से यह मांग करेंगी।

दूसरी बात यह है कि नफ्ताली बेनेट को चाहिये कि वे अमेरिकी अधिकारियों को यह समझायें कि प्रतिबंध और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते।

इसी प्रकार इन विशेषज्ञों का मानना है कि नफ्ताली बेनेट को ज्ञात होना चाहिये कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्राईल के कहने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से एक पक्षीय तौर पर निकल गये थे और उसके बाद उन्होंने तेहरान के खिलाफ अधिकतम दबाव की नीति अपनाई थी पर आज तक उनकी इस नीति का कोई परिणाम नहीं निकला और अब अमेरिकी अधिकारी भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि अधिकतम नीति का कोई परिणाम नहीं निकला है और ईरान को झुका देने का सपना देखने वाले ट्रंप को अमेरिकी जनता ने उन्हें और और उनकी मंडली को वाइट हाउस से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

ज्ञात रहे कि पश्चिम एशिया में एकमात्र अवैध जायोनी शासन है जिसके पास 200 से अधिक परमाणु वार हेड्स हैं और वह न तो परमाणु हथियार अप्रसार संधि NPT का सदस्य है और न ही अंतरराष्ट्रीय पर्वेक्षकों को अपने परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की अनमति देता है और वह पूरी दुनिया विशेषकर पूरे इलाक़े के लिए गम्भीर खतरा है।

कितनी अजीब बात है कि जिस इस्राईल की बुनियाद ही ग़ैर कानूनी हो और उसके क्रियाकलाप ग़ैर कानूनी और अपराधों से भरे पड़े हैं वह इस्राईल ईरान से यूरेनियम संवर्धन बंद करने की मांग करे तो यह कहना बिल्कुल भी ग़लत न होगा कि सूप तो सूप, चलनी भी बोले जिसके 72 छेद।

नोटः यह व्यक्तिगत विचार हैं। तीसरी जंग का इनसे सहमति होना ज़रूरी नहीं है।

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