धर्म

तसवूफ़ एक बदनाम लफ़्ज़ होकर रह गया है….तसवूफ़ क्या है? : Part-3

Razi Chishti
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(3)
अल्लाह swt फ़रमा रहा है कि आँखें उसको नहीं पासकतीं (6:103) और सूरह हज में फ़रमा रहा है कि बात यह है कि आँखें अंधी नहीं होती हैं लेकिन सीनों में जो दिल हैं वो अंधे होते हैं(22:46). इस तरह कुरान से दिल कि बीनाई साबित है फिर दिल से किस चीज़ को देखना है? आँखें तो सूरज की रोशनी में देखतीं हैं मगर दिल किस रोशनी में देखता है.

कुछ लोग एतराज़ करते हैं कि लफ़्ज़ ‘तसवूफ़’ कुरान में नहीं है. लेकिन यह भी जानना चाहिए कि लफ़्ज़ ‘तौहीद’ भी तो कुरान में नहीं है जबकि पूरे कुरान में तौहीद का ज़िक्र भरा पड़ा है. इसी तरह लफ़्ज़ ‘तसवूफ़’ भलेही कुरान में न हो मगर आदम अलैहिसलाम कि पैदाइश के वक़्त से ही तसवूफ़ मौजूद है. अल्लाह swt ने फ़रमाया कि “जब मैं इसे ठीक बना लूँ और इसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो इस के आगे सजदे में गिर जाना(38:72). तमाम फ़रिश्तों ने सजदा किया मगर शैतान ने सजदा नहीं किया. अल्लाह swt ने शैतान से पूछा कि “ऐ इबलीस जिसको मैंने अपने हाथों से बनाया उसको सजदा करने से तुमको किस चीज़ ने रोका”(38:75). अल्लाह swt जब ज्सिमों से पाक है तो फिर ‘अपने हाथों से बनाने का क्या मतलब हैं? सिर्फ़ इंसान को ही अपने हाथों से क्यों बनाया? फिर दीगर मख़लूक़ को कैसे बनाया? यह दोनों हाथ हैं क्या? फ़रिश्तों ने आदम alslm में क्या देखा जो सजदे में गिरगए? हज़रत रूमी ra ने यह सवाल किया है कि;

गर न बूदी ज़ाते हक़ अन्दर वजूद
आब ओ गिल राके मलक करदी सजूद?

इन्ही नुकात पर ग़ौर करने का नाम तसवूफ़ है. अगर किसी को तसवूफ़ नाम से चिढ़ है तो इस अमल को वो चाहे जो नाम देले, कोई बात नहीं. लोग कहते हैं कि शैतान ने नाफ़रमानी की इसलिए अल्लाह swt ने उसको काफ़िर फ़रमाया. यह सही नहीं है क्योंकि नाफ़रमानी तो आदम alslm से भी हुई थी कि मना करने के बावजूद वो शजरे ममतना के पास जाकर उसका फल खलिया लेकिन उनको तो काफ़िर नहीं फ़रमाया गया. इबलीस को नाफ़रमानी पर सज़ा नहीं मिली बल्कि उसने सजदा न करने का जो सबब बताया उसकी वजह से अल्लाह swt ने उसपर लानत भेजी. इबलीस ने जवाब दिया की वो आग से बना है और आदम मिट्टी से बने हैं, वो मिट्टी को सजदा करने वालों में नहीं है. इस जवाब पर अल्लाह swt ने फ़रमाया कि इस पर लानत है. यहाँ पर भी देखने की ही बात थी. आदम alslm में शैतान ने मिट्टी देखा उस नूर को नहीं देखा जो अल्लाह swt ने आदम alslm के क़ल्ब मे डाला था. वो शजर क्या था जिस के क़रीब जाने से आदम alslm को मना किया गया था?, वो शजर क्या है जिस पर कुरान मे लानत भेजी गयी है(17:60), वो शजर क्या है जिसके आगे हज़रत जिबराईल ने जाने से मजबूरी ज़ाहिर की थी? वो शजर क्या है जो वादिए मुक़द्दस मे था जिसमें से अल्लाह swt ने आवाज़ दी कि ऐ मूसा मैं तुम्हारा रब हूँ? इन सारे नुकात पर ग़ौर करने का नाम ही तसवूफ़ है. ——–To be continued