देश

पिछले हफ़्ते बताया गया शुक्रवार के बाद शनिवार आता है,,,,बुल्डोज़र आता है,,,आज शनिवार है देखते हैं बुल्डोज़र कहाँ-कहाँ जाता है

 

 

 

ये ”हमारे” बच्चे हैं, वो ”तुम्हारे” बच्चे थे,,,हम-तुम दुश्मन-दुश्मन,,,ये दुश्मनी ”इनके” दिमाग़ों में पल रही है,,,इनके ख़ून में समा गयी है,,,,ये ”कपड़ों/दाढ़ी/टोपी” वालों को अपना दुश्मन समझते हैं

बीते शुक्रवार को रसूल अल्लाह के सम्बन्ध में बीजेपी नेताओं की अमर्यादित टिप्णियों को लेकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए थे, जिनमे पत्थरबाज़ी, आगज़नी भी हुई थी, उसके बाद प्रशासन ने कई लोगों के घरों पर बुलडोज़र चला दिया था, तब कहा गया था कि जो भी उपद्रवी हैं उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी, और उन उपद्रव करने वालों के घरों को ढा दिया जायेगा, अग्निवीरों ने जो उपद्रव किये हैं उनके बाद सोशल मीडिया में लोग सवाल कर रहे हैं क्या इनके खिलाफ भी वैसी ही कार्यवाही होगी जैसी मुसलमानों के खिलाफ होती आयी है

 

Kaushik Raj
@kaushikrj6

बुलडोजर सिर्फ़ एक शब्द नहीं रहा। मीडिया जब उसका इस्तेमाल करती है तो उनकी भावनाएं देखिए। “दंगा जुमे के रोज़, दंगाई का घर ज़मींदोज़”, “कल शुक्र ‘वार’ है, बुलडोजर तैयार है”। जुमे पर आक्रामकता देखिए। एक समुदाय को नीचा दिखाने की सनक देखिए। ये भावनाएं अभी गायब हैं।

 

MSK Lucknow
@LucknowMsk
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Jun 16
बीजेपी के दफ्तरों पर हमला, बीजेपी विधायकों की गाडियों, घरों पर हमला,
क्या काफी जल्दी बयान आने वाला है-
“मैं अपने अग्निवीरों को अग्निपथ के फायदे समझाने में विफल रहा, इसलिए योजना वापस लेता हूं” ?

Shubhankar Mishra
@shubhankrmishra
चेहरे पर नक़ाब डालकर ट्रेन फूंकने वाले को इनसे सीखना चाहिए देश सेवा और राष्ट्रप्रेम।

देखिए कैसे गया में जान जोखिम में डालकर 2 बोगियों को रेलवे कर्मचारियों ने अलग किया और फिर शहर के आम लोगों ने धक्का लगाकर इन्हें को दूर किया ताकि आग की लपटों से सरकारी संपत्तियों को नुक़सान ना हो।

Abhinav Pandey
@Abhinav_Pan
जुमे के दिन देशभर भीषण हिंसक प्रदर्शन हुए। पत्थरबाज़ी से आगे बढ़कर ट्रेनें फूंकी गई, स्टेशन तोड़ गए।

पिछले हफ़्ते बताया गया शुक्रवार के बाद शनिवार आता है।बुल्डोजरवार आता।

कई लोग पूछ रहे हैं, इस बार भी वैसा होगा क्या?

BHARAT PRABHAT PARTY (BPP)

और कितना सहोगे अब

चिरनिद्रा से बाहर आओ

अब तक तो खुद पर रही थी बीत

अब तो बच्चों के भविष्य की है बात

कभी निजीकरण की मार कभी बेकारी की मार बच्चे हो रहे बेजार

अब भी न जागे तो कब जागोगे #BanEVM और #राइट2रिकॉल का अधिकार कब मांगोगे जब चिड़िया चुग जाएगी खेत।

Saurabh tripathi
@Saurabh_LT
लड़कों को उम्मीद थी, कोरोना ढीला पड़ा है. सेना भर्ती आएगी. दौड़-दौड़ कर सब दुखी हो रखे थे. यूपी चुनाव में ये देखा था. इनमें बीजेपी समर्थक भी खूब थे.

अब अचानक आई ये स्कीम इसीलिए उनको हजम नहीं हो रही. सरकार को चाहिए था पहले कुछ भर्ती कर लेती. फिर ये लाती तो शायद काम बन जाता.

Bhagat Ram
@bhagatram2020

जिस देश में एक बंदा 4 साल पीएम रहने के बाद चौकीदार बन सकता है, उस देश में जवानों को 4 साल बाद गार्ड बनने में भी दिक्कत हो रही है

डिस्क्लेमर : ट्वीट्स में व्यक्त विचार लोगों के अपने निजी विचार हैं, इनसे तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है