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यूपी में बुलडोज़र को रोकने से संबंधित याचिका की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज होगी

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को यूपी में बुलडोज़र को रोकने से संबंधित याचिका की सुनवाई होगी. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की. गुरुवार को जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली दो न्यायाधीशों की पीठ इसकी सुनवाई करेगी.

याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि उचित क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना उत्तर प्रदेश में घरों को न तोड़ा जाए और इस तरह की किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित व्यक्ति को नोटिस दिया जाए.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का कहना है कि हिंसा में मुसलमानों की एकतरफ़ा गिरफ़्तारी की गई है और कानपुर, प्रयागराज और सहारनपुर में प्रशासन ने मुसलमानों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. इसी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने कई घरों को बुलडोज़र से तोड़ भी दिया है.

पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद देश भर में प्रदर्शन हुए. कई शहरों में इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया जिसमें प्रदर्शनकारियों ने आगजनी और पुलिस पर पथराव तक किया. इसके बाद से उत्तर प्रदेश सरकार हिंसा के अभियुक्तों को पकड़ रही है और उनमें से कई लोगों के घरों पर बुलडोज़र की कार्रवाई भी की गई है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में कथित रूप से ध्वस्त किए गए घरों के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करने की मांग भी की है.

इसके साथ याचिकाकर्ता ने पुलिसकर्मियों को सांप्रदायिक दंगे और उन स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण देने के लिए निर्देश जारी करने की भी गुहार लगाई है.

याचिकाकर्ता का कहना है कि दिल्ली के जहांगीरपुरी में भी इस तरह की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी. अब ये जो उत्तर प्रदेश में हो रहा है वो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है.