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रूस यूरोपीय यूनियन में यूक्रेन की सदस्यता का विरोध नहीं करेगा : व्लादिमिर पुतिन

यूरोपीय यूनियन द्वारा यूक्रेन की सदस्यता को लेकर हरी झंडी दिखाने के बाद, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा है कि उन्हें यूक्रेन की सदस्यता से कोई समस्या नहीं है। पुतिन से यूरोपीय यूनियन में यूक्रेन की सदस्यता को लेकर सवाल हुआ था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम इस यूरोपीय यूनियन के विरोधी नहीं हैं, क्योंकि वह कोई सैन्य संघ नहीं है। हर देश इस बात का अधिकार रखता है कि वह किस संघ की सदस्यता चाहता है।

शुक्रवार को यूरोपीय यूनियन में यूक्रेन की सदस्यता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इसे सदस्यता का नामांकन नाम दिया गया है। यूरोपीय कमीशन के प्रमुख ने कहा है कि इस कमीशन ने यूरोपीय परिषद से सिफ़ारिश की है कि यूक्रेन को इस यूनियन की सदस्यता के लिए नामांकित कर दिया जाए। हालांकि इसके लिए यह शर्त रखी गई है कि यूक्रेन को देश में अधिक सुधार करने होंगे। इस तरह से यूरोपीय यूनियन में यूक्रेन की सदस्यता के लिए भूमि प्रशस्त हो गई है। अगर अगले हफ़्ते आयोजित होने वाली यूरोपीय कमीशन की बैठक में इस फ़ैसले पर मोहर लगती है तो इसका यूक्रेन युद्ध पर भी असर पड़ेगा।

जर्मनी, फ्रांस, इटली और रोमानिया के नेताओं की हालिया कीव की यात्रा और यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ बैठक और यूरोपीय संघ में यूक्रेन की सदस्यता पर उनके अनुकूल विचारों की घोषणा ने यूरोपीय कमीशन के निर्णय को प्रभावित किया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलिंस्की ने कहा है कि यूरोपीय कमीशन का यह निर्णय यूरोपीय संघ में सदस्यता की दिशा में पहला क़दम है, जो हमें जीत के क़रीब लाता है। मुझे अगले सप्ताह यूरोप की परिषद से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। हालांकि, यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए वर्षों लग सकते हैं, क्योंकि इस देश को यूरोपीय संघ के भ्रष्टाचार-विरोधी मानकों का पालन करने के लिए सुधारों की आवश्यकता होगी।

यूरोपीय संघ में यूक्रेन की सदस्यता का विरोध नहीं करने का रूस का फ़ैसला, हो सकता है कि हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रमों को लेकर हो और इसी के साथ-साथ इस तथ्य के मद्देनज़र हो कि यूरोपीय संघ में शामिल होने की एक लम्बी प्रक्रिया है और इसमें अभी काफ़ी लंबा समय लगेगा। वहीं, इस मुद्दे पर मास्को ने अपना रुख़ कई बार बदला है।

बहरहाल रूसी राष्ट्रपति के नए रुख़ से पता चलता है कि मास्को एक बार फिर यूरोपीय संघ में यूक्रेन की सदस्यता का विरोध नहीं करने के अपने रुख़ पर एक बार फिर लौट आया है। मॉस्को का सैद्धांतिक रुख़ अब तक नाटो जैसे सैन्य गठबंधन में यूक्रेन की सदस्यता का विरोध करना रहा है, जबकि यूरोपीय संघ, मास्को के विचार में, अनिवार्य रूप से एक आर्थिक संघ है जो रूस के लिए कोई ख़तरा नहीं है। साथ ही, रूस के रुख़ में इस बदलाव को यूरोपीय यूनियन के प्रति नर्मी और यूक्रेन के प्रति सकारात्मक नीति के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा, वह प्रमुख यूरोपीय देशों, विशेष रूप से जर्मनी और फ्रांस को मास्को के भयंकर दुश्मनों की लिस्ट से बाहर करना चहाता है।