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पोप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्च के स्कूलों में हुए यौन दुराचार के मामले में कनाडा के मूल निवासियों से मांगी माफी

ईसाइयों के वरिष्ठ धर्मगुरू पोप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्च के स्कूलों में हुए यौन दुराचार के मामले में कनाडा के मूल निवासियों से क्षमा याचना की है।

पोप की ओर से जारी माफ़ीनामे में कहा गया है कि कनाडा के मूल निवासियों को बलपूर्वक ईसाई समाज में समाहित कराने से उनकी अपनी संस्कृति नष्ट हो गई। उनके बच्चों को अपने परिवार से अलग रहना पड़ा।

पोप ने कहा है कि मैं उन सारे ही अत्याचारों के लिए माफी मांगता हूं जो ईसाइयों की ओर से कनाडा के मूल निवासियों पर ढाए गए। उन्होंने कहा कि मैं स्थानीय लोगों के ख़िलाफ़ ईसाइयों द्वारा की गई बुराई के लिए विनम्रतापूर्णक क्षमा चाहता हूं।

पोप फ्रांसिस इस समय कनाडा की यात्रा पर हैं। हालांकि वाशिग्टन पोस्ट के अनुसार कनाडा की सरकार ने पोप फ्रांसिस की माफी को पर्याप्त नहीं माना है। याद रहे कि सन 1800 से 1990 के बीच कनाडा में कैथोलिक गिरजाघरों के स्कूलों में इस देश के डेढ लाख से अधिक मूल निवासियों के बच्चों को ज़बरदस्ती भर्ती किया गया था। इन बच्चों को कैथोलिक संस्कृति सिखाई जाती थी।

कनाडा के इन मूल निवासियों के बच्चों को उनकी संस्कृति से अलग कर दिया जाता था। इन बच्चों को अपनी मातृभाषा बोलने की अनुमति नहीं थी। यह काम बलपूर्वक भी किया गया। इस काम से चर्च का उद्देश्य, कनाडा के मूल नागरिकों को मुख्य राष्ट्रीय धारा से जोड़ना था। चर्च द्वारा किये गए इस काम से छह हज़ार बच्चे मारे गए थे।

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले पश्चिमी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक इमारत के पास 93 क़ब्रें मिली है। बताया जा रहा है कि जहां पर यह क़ब्रें मिली थीं वहां पर एक समय में रेसिडेंशियन स्कूल अर्थात बोर्डिंग स्कूल था जिसका संचालन चर्च द्वारा किया जाता था।

इसके अतिरिक्त एक अन्य स्कूल में 200 से अधिक क़ब्रों का पता चला था जिनमें अधिकांश बच्चे थे। इस संबन्ध में बताया गया है कि ईसाई मिशनरी स्कूलों में 19वीं शताब्दी के आरंभ से लेकर 1970 तक कनाडा के मूल निवासियों के हज़ारों बच्चों को इस देश के विभिन्न क्षेत्रों से यहां पर लाया जाता था। इनपर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डाला जाता था और इनको अपनी मातृभाषा में बात करने नहीं दिया जाता था।