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रूस पर प्रतिबंध लगाकर अमरीका घिरता जा रहा है : अमरीकी पूर्व सीनेटर रिचर्ड ब्लाॅक

अमरीकी पूर्व सीनेटर रिचर्ड ब्लाॅक का कहना है कि रूस पर प्रतिबंध लगाकर संयुक्त राज्य अमरीका घिरता जा रहा है।

वर्जीनिया के पूर्व सीनेटर रिचर्ड ब्लाॅक ने, जो पूर्व सैन्य अधिकारी भी रह चुके हैं, ट्वीट किया कि रूस के विरुद्ध अमरीका और पश्चिम की नीतियां अतार्किक और विध्वंसक रही हैं।

उन्होंने कहा कि यही नीतियां, विश्व में व्यापक आर्थिक संकट का कारण बनी हैं। अमरीका के इस पूर्व सीनेटर के अनुसार हमें विलादिमीर पुतीन पर आरोप लगाने से बचना चाहिए जिसने ऊर्जा के मूल्यों में वृद्धि कर दी।

रिचर्ड ब्लाॅक कहते हैं कि माॅस्को ने कोयले, तेल और गैस के निर्यात पर किसी भी प्रकार की कोई सीमितता निर्धारित नहीं की है जबकि अमरीकी कांग्रेस ने एसा काम किया है। वर्जीनिया के पूर्व सीनेटर रिचर्ड ब्लाॅक के इस बयान से पहले अन्तर्राष्ट्रीय मानिट्री फंड ने एलान किया था कि रूस की गैस पर लगाए गए प्रतिबंध इटली, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी जैसे देशों में गंभीर आर्थिक मंदी का कारण बने हैं।

अमरीकी अख़बार “द हिल” काफी पहले दावा कर चुका है कि अमरीका और अन्य पश्चिमी देश यूक्रेन संकट को लेकर रूस पर प्रतिबंध लगाकर जाल में फंस गए हैं। मैगज़ीन ने लिखा कि प्रतिबंध इसलिए लगाए गए थे कि रूस की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाए मगर हक़ीक़त यह है कि प्रतिबंधों से ख़ुद उन देशों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है जिन्होंने प्रतिबंध लगाए हैं।

रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बारे में शुरू में कहा जा हरा था कि यह महाविनाश के आर्थिक हथियारों जैसे हैं जो रूस की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर देंगे लेकिन यह प्रतिबंध तो दोधारी तलवार साबित हुए हैं। इनसे रूस को कुछ नुक़सान तो पहुंचा है लेकिन प्रतिबंध लगाने वाले देशों पर इनसे भारी दबाव पड़ा है।

इस अमरीक पत्रिका के अनुसार प्रतिबंधों से सारी दुनिया में वस्तुओं और ऊर्जा की क़ीमतें बढ़ गईं इसके नतीजे में रूस महंगे दामों पर तेल और गैस बेच रहा है। अब निर्यात में गिरावट के बावजूद रूस इस काम से रक़म हासिल कर रहा है।