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हज की ज़िम्मेदारी ऐसी भारतीय कंपनी को सौंपी गई है, जिसका कर्नाटक की बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से घनिष्ठ संबंध है : रिपोर्ट

हज के आयोजन में मोदी और बीजेपी से जुड़ी कंपनी की भूमिका का पर्दाफ़ाश

दुनिया भर के मुसलमान इस बात से क्षुब्ध हैं कि सऊदी शासन ने बीजेपी से जुड़ी एक भारतीय कंपनी को पवित्र हज के आयोजन में अहम भूमिका प्रदान की है।

2014 में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दक्षिणपंथी हिदुत्ववादी पार्टी बीजेपी के सत्ता संभालने के बाद से भारत में इस्लाम और मुसलमानों को पूर्व योजना के तहत निशाना बनाया जा रहा है।

इस दौरान देश में 20 करोड़ से ज़्यादा मुसलमानों के लिए स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि विशेषज्ञ इसे निकट भविष्य में मुसलमानों के नरसंहार के रूप में देख रहे हैं।

ऐसी स्थिति में हज जैसा पवित्र और आर्थिक रूप से मुनाफ़ा देने वाला सौदा, बीजेपी से जुड़ी कंपनियों के लिए धन एकत्रित करने का एक अच्छा अवसर हो सकता है, जिसे इस्लामोफ़ोबिया के प्रचार और मुसलमानों के दमन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक़, पश्चिमी देशों में रहने वाले हज यात्रियों से आवेदन लेने और उनकी सुविधा की ज़िम्मेदारी एक ऐसी भारतीय कंपनी को सौंपी गई है, जिसका कर्नाटक की बीजेपी सरकार और प्रधान मंत्री मोदी से घनिष्ठ संबंध है।

दुबई स्थित कंपनी ट्रैवेज़ी में लाखों डॉलर के निवेश की सुविधा प्रदान करने में मदद करने वाले व्यक्ति का नाम है प्रशांत प्रकाश।

वेंचर कैपिटल फ़र्म एक्सेल इंडिया के पार्टनर प्रशांत प्रकाश 2020 से भारत की नेशनल स्टार्टअप एडवाइज़री काउंसिल से जुड़े हैं, जो कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नीति और रणनीति सलाहकार हैं।

प्रकाश ने ट्रैवेज़ी में 70 लाख डॉलर का निवेश किया, जिसने बाद में मोहम्मद बिन महफ़ूज़ द्वारा संचालित कंपनी उमरामे में निवेश किया।


फ़ोर्ब्स के अनुसार, उमरामे अब हज और उमराह मंत्रालय द्वारा वैश्विक ट्रैवल एजेंटों को उमराह उत्पादों को बेचने के लिए अधिकृत केवल तीन कंपनियों में से एक है। 2020 तक, यह फ़ोर्ब्स की 50 सबसे अधिक वित्त पोषित स्टार्ट-अप की सूची में पांचवें स्थान पर थी।

इस ख़ुलासे के बाद कई भारतीय कार्यकर्ताओं ने इस फ़ैसले के लिए सऊदी शासन की कड़ी निंदा की है। नई दिल्ली स्थित नबिया ख़ान का कहना है कि बीजेपी से जुड़ी कंपनी को हज से संबंधित ज़िम्मेदारी सौंपना, अपमानजनक और ख़तरनाक है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में बीजेपी सरकार हिजाब और अज़ान पर प्रतिबंध लगाने समेत कई मुस्लिम विरोधी नीतियों के केन्द्र में रही है।

न्यूयॉर्क शहर में द पोलिस प्रोजेक्ट की कार्यकारी निदेशक सुचित्रा विजयन का कहना है कि तकनीकी उद्योग इस बात का एक उदाहरण है कि मुस्लिम विरोधी नफ़रत सीमाओं के पार कैसे फैल सकती है।

एक्सेल इस्राईली स्टार्ट-अप्स में एक लंबे समय से निवेशक है, जिसने 2002 से 2016 के बीच में इस्राईल में 350 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।

विजयन का कहना था कि हिंदुत्व की विचारधारा और मुसलमानों और अन्य धर्मों के मानने वालों के प्रति उनमें जो नफ़रत है, वह सिर्फ़ भारत से सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में फैली हुई है। कट्टरवाद एक बड़ा व्यवसाय है, और ऐसे लोग हैं जो इस कट्टरवाद और हिंसा से पैसा कमाते हैं और इसमें निवेश करते हैं।

हालिया वर्षों में भारत, यूएई और इस्राईल के बीच भू-सामरिक संबंधों के साथ आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में वृद्धि हुई है।