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इराक़ के पूर्व किंग सद्दाम हुसैन के पोते अब्दुल्लाह नासिर अलसबआवी को लेबनान की इंटरपोल ने पकड़ा

इराक़ के पूर्व तानाशाह सद्दाम का पोता लेबनान में गिरफ़्तार कर लिया गया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, इराक़ की स्पाइकर सैन्य छावनी में 2,000 सैन्य कैडेटों के भीषण नरसंहार में शामिल इराक़ के पूर्व किंग सद्दाम हुसैन के पोते अब्दुल्लाह नासिर अलसबआवी को लेबनान की इंटरपोल ने पकड़ लिया है। लेबनानी मीडिया के अनुसार, लेबनानी सुरक्षा के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अब्बास इब्राहीम ने इंटरपोल के आदेश से अब्दुल्ला यासिर अलसबआवी की गिरफ़्तारी की घोषणा की। अलनशरा वेबसाइट के मुताबिक़, जनरल अब्बास इब्राहीम ने अब्दुल्लाह नासिर अलसबआवी की गिरफ़्तारी के बारे में कहा कि उन्हें इंटरपोल के आदेश पर और स्पाईकर सैन्य छावनी में नरसंहार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।

याद रहे कि तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश के आतंकियों ने वर्ष 2014 में तिकरीत के निकट स्थित स्पाइकर छावनी पर हमला करके दो हज़ार सैन्य कैडेटों का अपहरण करने के बाद उनको गोलियों से भून दिया था। दाइश ने इस जनसंहार का एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें बंदी बनाए गए कैडिटों को ज़मीन पर लिटाकर गोलियों से निशाना बनाया जा रहा था। इस सैन्य शिविर में हुआ यह दिल दहला देने वाला नरसंहार इराक़ में दाइश के भयानक अत्याचारों का प्रतीक बन गया और शायद इसे इराक़ी जनता के दिमाग़ से कभी नहीं मिटाया जा सकता।

इतिहास के पन्नों को पलट का देखें तो 22 जुलाई, 2003 को सद्दाम हुसैन के बेटों की अमरीकी सैनिकों से लड़ाई में मौत हुई थी. इसी दिन साल 1977 में चीन में सुधारवादी नेता देंग ज़ियाओपिंग की सत्ता में वापसी हुई थी.

2003 : सद्दाम हुसैन के बेटों की लड़ाई में मौत

इसी दिन अमरीका ने घोषणा की थी कि इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के दो बेटों उदय और क़ुसय हुसैन को अमरीकी सैनिकों ने मार डाला है. तफ़सील में बताया गया कि क़रीब 200 अमरीकी सैनिकों ने हैलीकॉप्टरों के साथ मोसुल शहर के एक मकान पर छापा मारा जहाँ यह दोनों भाई मौजूद थे.

मोसुल के इस मकान के पास लड़ाई करीब चार घंटे चली. यह दोनों भाई सद्दाम हुसैन की सरकार में अतिमहत्वपूर्ण थे. इनकी मौत के बाद ये कयास लगने लगे की यह दोनों भाई दरअसल मारे ही नहीं गए.

काफ़ी बहस के बाद अमरीका ने 24 जुलाई को इन दोनों भाइयों के शवों की तस्वीरों को जारी किया और 25 जुलाई को टेलिविज़न के लिए इनकी शूटिंग की अनुमति दी गई.

इस अमरीकी कार्रवाई में क़ुसय हुसैन का 14 साल का बेटा मुस्तफ़ा भी मारा गया. ऐसा माना जाता था कि 36 साल उम्र के क़ुसय अपने पिता के उत्तराधिकारी होंगे. उनके बड़े उदय जो कि 39 साल के थे देश के संचार माध्यमों को चलाते थे और उनके बारे में ऐसा कहा जाता था कि वो बड़े क्रूर थे.

ये दोनों भाई करीब तीन महीने पहले अपने पिता के शासन के पतन के बाद से ही फ़रार थे. इन दोनों के सर पर अमरीका ने करीब एक करोड़ डॉलर का ईनाम घोषित कर रखा था. इस इनाम की वजह से ही अमरीका को इन दोनों भाइयों के बारे में मुख़बिर से सूचना मिली थी.

आखिरकार इन दोनों के पिता सद्दाम हुसैन को दिसंबर 2003 गिरफ़्तार कर लिया गया.