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इसराइल के ख़िलाफ़ फूटा सऊदी अरब का गुस्सा, इस्लामी देशों ने इसराइल को दी नतीज़े भुगतने की धमकी : रिपोर्ट

फ़लीस्तीनी समूह इस्लामिक जिहाद यानी पीआईजे के ख़िलाफ़ गज़ा में की गई इसराइली कार्रवाई में अब तक 24 फ़लीस्तीनियों के मारे जाने और 200 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की ख़बर है.

मरने वालों में पीआईजे नेता तासीर जब्बारी सहित कई लड़ाके और छह बच्चे भी शामिल हैं.

इसराइल की ताज़ा कार्रवाई के बाद इस्लामी देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसराइल को इसके नतीज़े भुगतने की धमकी दी है.

सऊदी अरब, ईरान, पाकिस्तान, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर जैसे इस्लामिक देशों ने इसराइल की ताज़ा कार्रवाई पर फ़लीस्तीन के प्रति अपना गहरा समर्थन भी जताया है.

सऊदी अरब ने फ़लीस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन जताते हुए गज़ा पर इसराइल की ताज़ा कार्रवाई की कड़ी निंदा की है.

Foreign Ministry 🇸🇦
@KSAmofaEN
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Saudi Arabia government account
The Ministry of Foreign Affairs expresses the Kingdom of #Saudi Arabia’s condemnation and denunciation of the attack carried out by the Israeli occupation forces on the #Gaza Strip.

सऊदी हुआ सख़्त
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर जारी बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ताज़ा संघर्ष को ख़त्म करने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा है कि वे गज़ा के आम लोगों को सुरक्षा मुहैया कराएं. उसने दोनों देशों के बीच दशकों से जारी इस विवाद को ख़त्म करने की भी अपील की है.

वहीं ईरान ने गज़ा पर ‘क्रूर हमले’ की निंदा करते हुए और फलीस्तीनियों को अपना समर्थन दिया है. ईरान ने कहा है कि इसराइल के ख़िलाफ़ लड़ाई में वो अकेला नहीं है.

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राईसी ने कहा है कि इसराइल ने एक बार फिर दुनिया को अपना प्रभाव जमाने वाले और आक्रामक स्वभाव दुनिया को दिखाया है.

अल-जज़ीरा के अनुसार ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने एक न्यूज़ वेबसाइट से यह बात कही है.

उन्होंने कहा, ”यरुशलम को मुक्त कराने और फलीस्तीनियों के हक़ को बनाए रखने के लिए काम करने वाले यहूदी विरोधी सभी जिहादी शक्तियां आज एकजुट हैं.”

ईरान की धमकी
ईरान की राजधानी तेहरान के दौरे पर गए इस्लामिक जिहाद के नेता जियाद अल नखला से उन्होंने कहा, ”हम अंत तक इस राह पर आपके साथ हैं. आप फ़लीस्तीन और फलीस्तीनियों को बताएं कि वे अकेले नहीं हैं.”

सलामी ने कहा है कि फ़लीस्तीन के जवाब से पता चलता है कि वहाँ एक नया अध्याय शुरू हो गया है और हाल के अपराध के लिए इसराइल को भारी क़ीमत चुकानी होगी. उनके अनुसार, फ़लीस्तीन का प्रतिरोध आज पहले की तुलना में कहीं मज़बूत है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी इसराइल के ताज़ा हमले की कड़ी निंदा की है.

पाकिस्तान के अनुसार, इसराइल के ताज़ा हमले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और मानवीय क़ानूनों की पूरी अवहेलना करते हुए दशकों से बेगुनाह फ़लीस्तीनियों के साथ हो रहे इसराइली अत्याचार, उसके अवैध कार्य और अंधाधुंध बल प्रयोग का नमूना है.

Shehbaz Sharif
@CMShehbaz
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Martyrdom of 10 Palestinians including 5-year-old girl in Gaza is latest act of Israeli terrorism.If impunity & barbarism had a face, it would have been that of Israel, which has targeted Palestinians without any care for consequences.Pakistan strongly condemns Israeli airstrikes

पाकिस्तान का इसराइल पर निशाना
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ट्वीट में लिखा कि यह इसराइली चरमपंथ की ताज़ा कार्रवाई है. उन्होंने लिखा, ”यदि सज़ा से बचाव और बर्बरता का कोई चेहरा होता तो इसराइल का ही होता, जिसने बिना नतीज़ों की परवाह किए फलीस्तीनियों को अपना निशाना बनाया.”

वहीं पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है, ”इसराइल अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग, फलीस्तीनी लोगों को अपने काबू में करने के साथ उसके हक़ के लिए और इसराइली कब्जे को खत्म करने के लिए खड़े होने वालों को अलग-थलग करने के लिए कर रहा है.”

उन्होंने लिखा, ”हम बहादुर फलीस्तीनी लोगों के साथ खड़े हैं और वैश्विक ताक़तों से अपनी चुप्पी तोड़ने और फ़लीस्तीनी लोगों पर इसराइल के किए गए अत्याचारों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग करते हैं. शांति केवल एक व्यावहारिक दो देश के सूत्र से ही आ सकती है.”

Imran Khan
@ImranKhanPTI
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Israeli forces again launched air strikes against besieged Palestinians, incl children,in Gaza, violating all int laws. Israel is trying to use its massive mly power to subjugate the Palestinian ppl & eliminate those who stand up for their rights & for end to Israeli occupation

यूएई, क़तर और मिस्र ने भी जताई आपत्ति

उधर मिस्र ने कहा है कि वह दोनों देशों के साथ मिलकर दिन रात काम कर रहा है ताकि हालात और न बिगड़े और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल हो.

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसि ने काहिरा में एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा, ”हमने हालात को क़ाबू से बाहर न जाने देने और लड़ाई रोकने के लिए दिन रात हर किसी से संपर्क किया है.”

वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने गज़ा पट्टी में शांति बहाली की ज़रूरत बताते हुए ताज़ा तनाव को घटाने और आम लोगों की ज़िंदगी बचाने पर ज़ोर दिया है.

यूएई के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में ताज़ा संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताते हुए ताज़ा हिंसा और अस्थिरता रोकने के लिए अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई है.

यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल का सदस्य होने के नाते यूएई ने चीन, फ्रांस, आयरलैंड और नॉर्वे के साथ मिलकर इस मसले पर सोमवार को सिक्यॉरिटी काउंसिल की बैठक बुलाने के लिए एक आवेदन दिया है.

उसकी मांग है कि इस बैठक में क्षेत्र के ताज़ा हालात पर चर्चा हो और शांति बहाली के अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों का समर्थन दिया जा सके.

क़तर ने गज़ा पर इसराइल की ताज़ा कार्रवाई को ‘आक्रामक’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है.

क़तर के विदेश मंत्रालय ने दुनिया से तुरंत पहल करने की अपील की है ताकि आमलोगों ख़ासकर महिलाओं और बच्चों पर हो रहे हमले रूके.

इस बाबत जारी एक बयान में क़तर ने ‘फ़लीस्तीनी मुद्दे, वहाँ के लोगों के उचित हक़ और 1967 में तय की गई सीमा के अनुसार उनके आज़ाद मुल्क, जिसकी राजधानी यरुशलम है, के साथ न्याय करने को लेकर अपना समर्थन दिया है.


क्या है मामला?
इसराइल के अनुसार, शुक्रवार से अब तक इसराइल की ओर लगभग 300 फलीस्तीनी रॉकेट और मोर्टार दागे जो चुके हैं. वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री येर लेपिड ने कहा है कि पीआईजे से ‘तात्कालिक ख़तरे’ को देखते हुए इसराइल ने ताज़ा अभियान शुरू किया है.

इसराइली सेना ने चेतावनी दी है कि ‘ब्रेकिंग डॉन’ नाम का यह ऑपरेशन एक सप्ताह तक चल सकता है.

ताज़ा हिंसा के बारे में बताया गया है कि मई 2021 में 11 दिनों तक चले संघर्ष में 200 से अधिक फ़लीस्तीनियों और एक दर्जन इसराइली नागरिकों के मारे जाने के बाद से दोनों पक्षों के बीच की यह सबसे गंभीर झड़प है.

इसराइल ने बताया है कि गज़ा पट्टी पर हवाई हमले करने के साथ वेस्ट बैंक में छापेमारी करके उसने पीआईजे के करीब 19 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

शनिवार को गज़ा में और हवाई हमलों की रिपोर्ट के बीच इसराइली शहरों में वहां आने वाली मिसाइलों के साइरन बजते रहे.

गज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने फलीस्तीनियों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने के लिए इसराइल की आक्रामकता को ज़िम्मेदार ठहराया है.

हमास अभी तक टकराव से है दूर
अभी तक इस इलाक़े के सबसे बड़े चरमपंथी समूह और इस्लामिक जिहाद से मिलती जुलती विचारधारा वाला संगठन ‘हमास’ ने कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है. इसका नतीज़ा यह हुआ है कि हमास को निशाना बनाने वाले किसी इसराइली हवाई हमलों की कोई ख़बर नहीं है.

हालांकि हमास ने शुक्रवार की रात जारी एक कड़े बयान में कहा कि ‘प्रतिरोध समूह’ आपस में एकजुट हैं. चूंकि गज़ा पट्टी पर हमास का शासन है, इसलिए ताज़ा समस्या और न भड़के इसलिए उसने अभी तक व्यावहारिक नज़रिया बनाए रखा है.

लेकिन गज़ा में नागरिकों की मौत के आंकड़े यदि तेज़ी से बढ़े तो हमास का कैलकुलेशन बदल भी सकता है. उसके बाद यदि हमास लड़ाई में उतरा तो ताज़ा हिंसा बहुत जल्द और तेज़ हो जाएगी.

इसराइल ने हाल में उत्तरी वेस्ट बैंक में इस्लामिक जिहाद के एक नेता को गिरफ़्तार किया था. उसके बाद इस्लामिक जिहाद की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका में इसराइल ने गज़ा से जुड़ने वाले रास्ते को बंद कर दिया.

इससे फ़लीस्तीन के इलाके में जीवन पहले की तुलना में बहुत कठिन हो गया है. बिजली कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि ईंधन न मिलने के चलते शनिवार को गज़ा का एकमात्र बिजली स्टेशन बंद हो गया.

इसराइल के एक अधिकारी ने बताया है कि गज़ा पट्टी से दागे गए करीब 300 रॉकेटों में से 70 इसराइल तक पहुंचे ही नहीं और वे गज़ा में ही गिर गए. और जो रॉकेट इसराइल की सीमा में दाखि़ल भी हुए उनमें से अधिकांश को इसराइली ‘आयरन डोम’ मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी ने मार गिराया. इस चलते इसराइल से किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है.

इसराइल की सेना के अनुसार, इस्लामिक जिहाद पर किए गए 30 हमलों में से दो उसके शस्त्रागारों और छह उसके रॉकेट निर्माण इकाइयों पर किए गए.