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कैथल : संयुक्त किसान मोर्चा के आदेश अनुसार मुस्तका मालकान ज़मीन को लेकर क़िसानो ने ज़िला मुख्यालय पर सौंपा ज्ञापन…हरदीप बदसूई : रवि जैस्ट की रिपोर्ट

Ravi Press
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संयुक्त किसान मोर्चा के आदेश अनुसार मुस्तका मालकान जमीन को लेकर किसानो ने जिला मुख्यालय पर सौंपा ज्ञापन…हरदीप बदसूई
कैथल

( किसानों की समस्याओं व मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आदेश अनुसार आज सभी संगठनों ने मिलकर जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री के नाम डी सी को ज्ञापन सौंपा। जिसकी अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के युवा जिला प्रधान हरदीप बदसूई ने की।उक्त जानकारी युवा जिला प्रधान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए दी। हरदीप ने कहा की शामलात जमीनों को पंचायतों के हवाले करने के विरोध में जिला के किसानों ने पहले तो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और बाद में ज्ञापन सौंपा । हरदीप ने कहा की पंचायत में बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों ने कई मुद्दों पर चर्चा की। केंद्र व प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों से खफा किसानों ने जोरदार नारेबाजी कर अपनी आवाज बुलंद की।। किसान नेता हरदीप ने केंद्र सरकार ने जो वादे किसानों के साथ किए थे वो पूरे नहीं किए जिस कारण सरकार के खिलाफ कई बार किसान वादाखिलाफी दिवस मना चुके है क्योंकि ना तो सरकार ने आंदोलन के दौरान हुए मुकदमे वापस लिए और ना ही एमएसपी पर कानून बनाया।उन्होंने कहा कि एमएसपी पर सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी को संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज किया गया है। क्योंकि सरकारी सदस्यों और सरकार के पिठ्ठुओं से भरी इस कमेटी के एजेंडा में एमएसपी कानून की चर्चा करने की कोई गुंजाइश ही नहीं।हरदीप ने कहा की केंद्र सरकार आए दिन कोई न कोई कानून लाकर किसानों को तंग करने का काम कर रही है। कभी केंद्र सरकार 3 काले कृषि कानून लेकर तो कभी बिजली कानून के तहत किसानों को तंग करने का काम किया। परंतु अब तो मुस्तरका मालकन जमीन को सरकार किसानों से जमीनें छीन कर कारपोरेट घरानों को सौंपने की तैयारी कर रही है ।हरदीप ने कहा की हमारे बुजुर्गों ने इस बंजर जमीन को अपने खून पसीने से ही खींच कर खेती योग्य भूमि बनाया है। जब यह भूमि खेती योग्य होगी तो अब सरकार किसानों से यह जमीन छीनने पर तुली हुई है।हरदीप ने कहा की रिकार्ड के अनुसार किसान इन जमीनों पर पीढ़ियों से काम कर रहे है और इन जमीनों को लेकर आयुक्त द्वारा जारी पत्र के अनुसार सभी शामलात देह, शामलात देह सब रसद ने खेवट व शामलाट देह हसद रसद पैमाना मलकियत व जुम्ला मुस्ता मालकान की सभी जमीनों को मालिकाना हक कास्तकार किसानों से वापिस लेकर पंचायत व नगरपालिकाओं के नाम किया जाएगा। हरदीप ने कहा की प्रदेश की कुछ तहसीलों में ऐसी जमीनों के इंतकाल तोड़ कर पंचायत के नाम करने के आदेश आ चुके हैं।हरदीप ने कहा की किसान इन जमीनों को खरीद बेच व आइ रहन भी करते थे सन 1992 में सरकार ने पंजाब विलेज कॉमन लैंड रेगुलेशन एक्ट 1961 में संशोधन कर जुमला मुस्तरका मालकान जमीनों को पंचायती जमीन करार दे दिया था, जिसे माननीय पंजाब हरियाणा न्यायालय (चंडीगढ़) में किसानों द्वारा चुनौती दी गई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने पंचायतों के नाम किए भी गए है। जबकि माल फैसला किसानों के पक्ष में दिया था मुस्तरका मालकान जमीन हिस्सेदार किसानों को मलकियत है। इसे उनके हिस्सेदारों में तकसीम कर दिया जाए, किंतु इसके उपरांत सरकार ने इस फैसले के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को गलत करार देते हुए आजादी के बाद हुए पहले रेवेन्यू हेलमेट के अनुसार सभी मुस्तरका मालकान व शामलात देश की सभी तरह की जमीनों को पंचायत देश में तब्दील करने का फैसला दे दिया है, जो कि न्याय संगत नहीं है।

जिससे उक्त शामलात देह व जुमला मुस्तरका मालकान ज़मीनो पर पीढ़ियों से काश्त कर रहे किसान बेदख़ल हो जाएँगे व उनकी भूमि उनसे छिन जाएगी और ये भूमि आज़ादी के बाद हुई पहली चकबंदी के बाद किसानो ने कोर्ट केस जीतकर अपने नाम तकसीम करवाई है व बहुत बार आगे ख़रीदी बेची भी जा चुकी है व इस भूमि पर मकान, दुकान, फ़ैक्टरी भी बनाई हुई है इसलिए ये फ़ैसला किसानो व आमजन के हित में नहीं है।

इसलिए भाकियू को सरकार से मांग है कि पंजाब विलेज कॉमन ड रेगुलेशन एक्ट 1961 में संशोधन कर उक्त जमीन का मालिकाना हक काबिज व काकार किसानों को दे दिया जाए। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन सर छोटू राम, भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह, भारतीय किसान यूनियन टिकैत, जयभगवान घनघस,चरणजीत बाजवा,कुलविंदर नंबरदार,देवीदयाल बांगड़,साहब सिंह संधू आदि किसान नेता मौजूद रहे।

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