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चीन का कहना है कि देश की आबादी 2025 से घटने लगेगी, 2027 से पहले ही भारत होगा सबसे ज़यादा आबादी वाला देश : रिपोर्ट

चीनी अधिकारियों का कहना है कि देश की आबादी 2025 से घटने लगेगी. उनका कहना है कि जैसे-जैसे परिवार का आकार छोटा होगा और नागरिकों की उम्र बढ़ेगी, देश की आबादी भी कम होगी.

दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश एक उभरते हुए जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है. देश तेजी से बूढ़े होते कार्यबल, धीमी अर्थव्यवस्था और दशकों में अपनी सबसे कमजोर जनसंख्या वृद्धि का सामना कर रहा है.

चीन में साल 2021 में जन्मदर में रिकॉर्ड स्तर पर कमी आई थी. पिछले साल जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक यह दर इतनी कम हो गई कि चीन को अपने यहां जोड़ों को तीन बच्चे तक पैदा करने की इजाजत देनी पड़ी. चीन में दशकों तक एक ही बच्चा पैदा करने की नीति लागू रही, जिसका उल्लंघन करने पर लोगों को तमाम पाबंदियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन साल 2016 में यह नीति खत्म कर दी गई थी.

2016 में यह फैसला लेने के पीछे चीन की तेजी से बूढ़ी होती आबादी थी. चीन इसका आर्थिक खामियाजा नहीं भुगतना चाहता था, लेकिन शहरी इलाकों में महंगी होती रोजमर्रा की जिंदगी के चलते भी लोग एक ही बच्चा पैदा करते थे. चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 में प्रति हजार लोगों पर जन्मदर 7.52 रही, जो 1949 के बाद से सबसे कम है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने 2 अगस्त को 2021 और 2025 के बीच की अवधि का जिक्र करते हुए कहा, “कुल जनसंख्या की वृद्धि दर काफी धीमी हो गई है और यह 14वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि में नकारात्मक वृद्धि के चरण में प्रवेश करेगी.” इसी साल जनवरी में अधिकारियों ने कहा था कि पांच साल की उस अवधि में जनसंख्या शून्य वृद्धि या फिर नकारात्मक वृद्धि दर्ज कर सकती है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा, “वर्तमान में हमारे देश की प्रसव सहायता के लिए नीति प्रणाली सही नहीं है और जनसंख्या विकास और लोगों की अपेक्षाओं के बीच एक बड़ा अंतर है.”

हाल के वर्षों में कुल प्रजनन दर 1.3 से नीचे गिर गई है जबकि देश में 2035 के आसपास एक बड़ी आबादी बूढ़ी होने के चरण में प्रवेश कर जाएगी, जिसमें 60 साल से अधिक उम्र की आबादी 30 प्रतिशत से अधिक होगी. स्वास्थ्य आयोग ने कहा है कि देश में परिवार भी छोटे होते जा रहे हैं, जो पेंशन और बच्चों की देखभाल के कार्यों को “कमजोर” कर रहे हैं. स्वास्थ्य आयोग ने बच्चों के पालन-पोषण के समर्थन में सुधार और परिवारों पर बोझ कम करने में मदद करने के लिए आवास, शिक्षा और टैक्स जैसे मुद्दों पर नीति बनाने की अपील की है.

बच्चा पैदा करो, लाभ पाओ
चीन के कुछ हिस्सों में अधिकारी पहले से ही सुस्त जन्म दर से निपटने के लिए परिवार के अनुकूल नीतियां बना रहे हैं. इसी के तहत पूर्वी शहर हांग्जो ने 2 अगस्त को घोषणा की कि तीन बच्चों वाले परिवार पहली बार आवास भविष्य निधि ऋण के लिए आवेदन करते समय अधिकतम सीमा से 20 प्रतिशत अधिक लोन ले सकेंगे.

सरकारी अखबार के अनुसार नानचांग और चांग्शा जैसे अन्य शहरों ने भी सहायक नीतियां लागू की हैं. जीवन यापन की उच्च लागत और सांस्कृतिक बदलाव के कारण लोग छोटे परिवार बना रहे हैं.

चीन ने 1979 में अपनी विवादास्पद एक-बच्चा नीति की शुरुआत की थी. उस समय चीन की सरकार का कहना था कि गरीबी मिटाने और अर्थव्यवस्था को विकसित करने की कोशिशों को तेजी से बढ़ रही जनसंख्या की वजह से नुकसान पहुंच रहा था.

वर्ल्ड पॉपुलेशन क्लॉक के मुताबिक इस वक्त दुनिया की आबादी 7.96 अरब है. इसमें चार करोड़ लोग और जुड़ते ही, वैश्विक आबादी 8 अरब हो जाएगी. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 15 नवंबर 2022 तक ऐसा हो जाएगा. जनसंख्या पर आई यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारत चीन की पीछे कर दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा.

एए/वीके (एएफपी, एपी)

क्या 2027 से पहले ही भारत होगा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश

आबादी के मामले में चीन को पछाड़ देगा भारत!
चीन के जनसंख्या विशेषज्ञों ने अपने अध्ययन में दावा किया है कि भारत संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से पहले ही दुनिया का सबसे आबादी वाला देश बन जाएगा. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि भारत 2027 तक चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे आबादी वाला देश बन जाएगा लेकिन अब अध्ययन में इससे पहले यह होने का आकलन किया गया है.

भारत की बढ़ती आबादी
संयुक्त राष्ट्र ने 2019 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत की जनसंख्या में अब से लेकर साल 2050 के बीच करीब 27 करोड़ 30 लाख लोगों की बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसी रिपोर्ट में पूर्वानुमान लगाया गया था कि भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा.

भारत बनाम चीन
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में भारत की जनसंख्या करीब 1.37 अरब थी जबकि चीन की 1.47 अरब थी. 11 मई को जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दशक में चीन की जनसंख्या 5.38 प्रतिशत बढ़कर एक अरब 41 करोड़ हो गई है. 2010 में यह 5.84 फीसदी बढ़ी थी.

चीन में जन्मदर कम
बीजिंग की पेकिंग यूनिवर्सिटी में समाज शास्त्र के प्रोफेसर लू जिहुआ चीन की कम होती आबादी पर कहते हैं कि गिरावट से पहले चीन की जनसंख्या 2027 तक अपने चरम पर पहुंच सकती है. 1970 के दशक में चीन ने एक बच्चे की नीति लागू की थी जिसके बाद से जनसंख्या वृद्धि की दर कम होती रही है.

आबादी और अर्थव्यवस्था
चीन का सबसे ज्यादा आबादी वाले देश का दर्जा अब भी बरकरार है लेकिन देश के बड़े शहरों में रहने वाले लोग बच्चे पैदा करने से कतराते हैं. चीन में जनसंख्या एक बड़ा मुद्दा रही है क्योंकि देश की आर्थिक वृद्धि इससे सीधे जुड़ी हुई है. बच्चे कम होने का असर यह होगा कि देश में उपभोग स्तर में भी गिरावट आ सकती है.

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