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पेलोसी के ताइवान दौरे पर विरोध जता रहे चीन को पाकिस्तान, ईरान, रूस के बाद मिला श्रीलंका का भी साथ

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे पर विरोध जता रहे चीन को पाकिस्तान के बाद श्रीलंका का भी साथ मिल गया है.

श्रीलंका के राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि सभी देशों को ऐसे उकसावे की कार्रवाई से बचना चाहिए, जो मौजूदा वैश्विक तनाव को और बढ़ाए.

रनिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका में चीन के राजदूत की झेनगॉन्ग से मिलने के बाद इस संबंध में ट्वीट किया है.

उन्होंने लिखा, “चीन के राजदूत की झेनगॉन्ग से मुलाक़ात के दौरान मैंने वन-चाइना पॉलिसी को लेकर श्रीलंका की प्रतिबद्धता और साथ ही क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए यूएन चार्टर को दोहराया.”

“सभी देशों को ऐसे उकसावों वाली कार्रवाई से बचना चाहिए जो मौजूदा वैश्विक संकट को और बढ़ाए. पारस्परिक सम्मान और दूसरे देशों के अंदरूनी मसलों में हस्तक्षेप न करना ही शांतिपूर्ण सहयोग की बुनियाद है.”

चीन की चेतावनी के बावजूद नैंसी पेलोसी मंगलवार शाम को ताइवान पहुँची थीं. चीन ताइवान को अपना इलाक़ा मानता है. चीन ने पेलोसी की यात्रा के जवाब में ताइवान के आस-पास व्यापक स्तर पर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है.

इससे पहले पाकिस्तान ने भी चीन का समर्थन करते हुए कहा था कि यूक्रेन संकट से जूझ रही दुनिया अभी और कोई तनाव झेलने की स्थिति में नहीं है.

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