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यूक्रेनी सेना के अपराधों का खुला पिटारा : यूक्रेनी सेना ने आवासीय क्षेत्रों में अपने ही हज़ारों लोगों को मारा : रिपोर्ट

हालिया महीनों में जो अपराध यूक्रेन में हुए हैं उसका आरोप एमनेस्टी इंटरनेश्नल ने यूक्रेन पर लगाया है।

एमनेस्टी इंटरनेश्नल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यूक्रेन की सेना जो टैक्टिक इस्तेमाल कर रही है वह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है और वह नागरिकों की जान के लिए खतरनाक है। यूक्रेन की सेना जो टैक्टिक इस्तेमाल कर रही है उनमें से एक है कि हथियारों की सुरक्षा उन आवासीय क्षेत्रों में कर रही है जहां लोग रहते हैं।

यह पहली बार है जब एक अंतरराष्ट्रीय संस्था अपराधों का आरोप यूक्रेन पर आरोप लगा रही है। इससे पहले पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिका यूक्रेन में होने वाले अपराधों का आरोप रूस पर लगाते थे और कहते थे कि इन अपराधों का जिम्मेदार रूस है जबकि रूसी अधिकारियों ने बारमबार कहा है कि यूक्रेन की ओर से लड़ने वाले सैनिकों व अर्धसैनिकों ने स्कूलों यहां तक अस्पतालों में भी अपने मोर्चे बना लिये हैं।

उसकी वजह यह है कि यूक्रेनी सैनिकों और यूक्रेन की ओर से लड़ने वाले बलों को इस बात का ज्ञान है कि रूसी सेना स्कूलों और अस्पतालों को अपने हमलों का लक्ष्य नहीं बनायेगी इसलिए उन्होंने निश्चिंत होकर इन जगहों को अपनी सैन्य गतिविधियों के ठिकानों में बदल लिया और इन जगहों पर जो भी घटनायें होती हैं उसका आरोप रूसी सेना पर मढ देती हैं और किसी का ध्यान भी इस ओर नहीं जायेगा कि इन अपराधों को रूसी नहीं बल्कि यूक्रेन की ओर से लड़ने वाले बल अंजाम दे हैं।

इसी प्रकार यूक्रेनी सैनिक आम नागरिकों का प्रयोग मानव ढ़ाल के रूप में कर रहे हैं और उन्हें आवासीय क्षेत्रों को छोड़कर जाने भी नहीं दे रहे हैं। उसकी वजह यह है कि उन्हें भलीभांति ज्ञात है कि अगर लोग आवासीय क्षेत्रों को छोड़कर चले जायेंगे तो वे किसका प्रयोग मानवीय ढाल के रूप में करेंगे? इसी प्रकार जो लोग आवासीय क्षेत्रों को छोड़कर भागना चाहते हैं यूक्रेनी बल उनकी ओर फायरिंग कर देते हैं। इससे यूक्रेन के आवासीय क्षेत्रों व नगरों में रहने वाले लोगों में यह धारणा उत्पन्न हो गयी कि जब भागने से यूक्रेनी बल ही उन्हें गोली मार देते हैं तो भागने से न भागना ही बेहतर है शायद न भागने से ही उनकी जान बच जाये।

एमनेस्टी इंटरनेश्नल के निरीक्षकों ने अपनी आंखों से देख लिया कि यूक्रेनी बल इस देश के 29 स्कूलों को जंग का मोर्चा बना दिया है और 29 में से 22 स्कूलों का प्रयोग जंग के मोर्चे के रूप में कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या पश्चिमी व यूरोपीय इस बात से अवगत नहीं है कि यूक्रेनी सैनिक इस देश के स्कूलों व अस्पतालों का प्रयोग जंग के मोर्चे और आम नागरिकों का प्रयोग मानवढाल के रूप में कर रहे हैं? जानकार हल्कों का मानना है कि यूक्रेन का समर्थन करने वाले पश्चिमी व यूरोपीय देश बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि यूक्रेनी सैनिक रूसी सैनिकों का मुकाबला करने के लिए क्या कर रहे हैं और इसी तरह इन देशों को यह भी पता है कि यूक्रेनी सैनिकों व लड़ाकों का यह कार्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है परंतु पश्चिमी व यूरोपीय देश जिस तरह से दुनिया के बहुत से मामलों में दोहरा मापदंड अपनाते हैं उसी तरह ये देश यूक्रेनी सैनिकों के कृत्यों के बारे में भी दोहरे मापदंड से काम ले रहे हैं।

बहरहाल जानकार हल्कों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने का सबसे महत्वपूर्ण कारण पश्चिमी व यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन का व्यापक समर्थन है और यही समर्थन जान माल की भारी तबाही का कारण बन रहा है और जब तक यह समर्थन और दोहरा मापदंड जारी रहेगा तब तक रूस-यूक्रेन युद्ध के बंद होने की अपेक्षा तर्क से परे है।

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