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MP HC : दुष्कर्म आरोपी को FIR में देरी के आधार पर छोड़ा, SC ने कहा?

न्यायमूर्ति परदीवाला ने पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए कहा, हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह से समझ से बाहर है। एमपी हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को एफआईआर में देरी के आधार पर छोड़ दिया था।

 

सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आधार पर दुष्कर्म के एक आरोपी को बरी करने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को पूरी तरह से समझ से बाहर करार दिया है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि इस मुकदमे के तथ्य काफी दिल तोड़ने वाले हैं और हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि आदेश विकृत है और कानून में टिकाऊ नहीं है।

फैसला 12 अगस्त को सुनाया गया था, लेकिन इसे शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना बाकी था। न्यायमूर्ति परदीवाला ने पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए कहा, हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह से समझ से बाहर है। हमारे सामने अभी तक एक ऐसा मामला नहीं आया है, जहां हाई कोर्ट ने बलात्कार के अपराध के आरोप में आरोपी को आरोप मुक्त करने के लिए प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आधार पर ऐसा फैसला दिया हो।

शीर्ष अदालत ने हालांकि आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत दंडनीय अपराध से आरोपी अमित कुमार तिवारी को आरोपमुक्त करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया। हाई कोर्ट के 2 दिसंबर, 2021 के आदेश का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात ये है कि हालांकि हाई कोर्ट ने मृतक (बलात्कार पीड़िता) की उम्र के संबंध में तथ्य दर्ज करने के उद्देश्य से दो पैराग्राफ लिखे हैं, फिर भी अदालत द्वारा उस संबंध में कोई विशिष्ट निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया है।

पीठ ने कहा, हाई कोर्ट पूरी तरह से एक अलग स्तर पर आगे बढ़ा। अदालत ने सभी आरोपों के आरोपियों को इस आधार पर आरोपमुक्त करना उचित समझा कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई और मृतक के माता-पिता द्वारा रखा गया पूरा मामला संदिग्ध था।