साहित्य

तस्वीर की अक्कासी…लूट लेता है चैन सब का ही….हरबंस सिंह सेठी की तरही ग़ज़ल…कैसी दिल पर चोट लगी जो, अब वो संवरना भूल गई!!

Harbans Sethi
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तरही ग़ज़ल…
मिसरा :- “मुझको देखा पनघट पे तो पानी भरना भूल ग’ई” !!
वज़्न :- 2222. 2222. 2222. 222
शायद नसमझी में वक़्त का आदर करना भूल ग’ई !!
या जिस झरने पर मिलना था शायद झरना भूल ग’ई !!
दस दस बारी दिन में अक्सर सजती और संवरती थी !
कैसी दिल पर चोट लगी जो, अब वो संवरना भूल ग’ई !!
बहनें भैया मात पिता सब जिसके नाज़ उठाते थे !
पीहर जा कर सारे नाज़ो नख़रे करना भूल ग’ई !!
अपने कदमों की आहट से अर साये से डरती थी !
जान पे बन आई तो दुनिया से भी डरना भूल ग’ई !!
मुझसे उल्फत करती है इस बात से है इन्कार उसे !
दुनिया वालों के आगे लेकिन वो मुकरना भूल ग’ई !!
कैसे तीर चलाये छल से इस बेदर्द सियासत ने !
नफरत में डूबी है दुनिया उल्फत करना भूल ग’ई !!
गिरह….
लब से तो ये कहती है वो मुझसे नफरत करती है !
“मुझको देखा पनघट पे तो पानी भरना भूल ग’ई” !!
Harbans Singh Sethi,
11/09/2022.

Harbans Sethi
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तस्वीर की अक्कासी…
लूट लेता है चैन सब का ही !
चांद जैसा हसीन मुख तेरा !!
किस कदर झील का ये पानी भी !
देखता है हसीन रुख तेरा !!
Harbans Singh Sethi,

Harbans Sethi
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तरही ग़ज़ल…
मिसरा:-“हमने गुलशन के तहफ़्फ़ुज़ की कसम खाई है” !!
ज़िन्दगी मुझको ये किस मोड़ पे ले आई है !!
इस तरफ भी है कुआं, और उधर खा’ई है !!
किस ख़ता की ये भला मैंने सज़ा पाई है !!
तेरे जाने से मिरी जान पे बन आई है !!
मुस्कुराता है कभी और तड़पता है कभी !
ख़ुद तमाशा है ये दिल खुद ही तमाशाई है !!
रात दिन जब भी बिगड़ती है तबीयत अपनी !
हमने अरमानों के ज़ख़्मों से ही बहलाई है !!
दर्द पे दर्द दिये जाता है हमको ऐसे !
जैसे हमको ही मिटाने की कसम खाई है !!
नाम तेरे ये बची उम्र तो कर दूँ लेकिन !
आख़िरी उम्र किसी काम नहीं आई है !!
गिरह…
जान दे कर भी निभायें गे कसम ये अपनी !
“हमने गुलशन के तहफ़्फ़ुज़ की कसम खाई है” !!
Harbans Singh Sethi,

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