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दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता कश्मीर मुद्दे के ‘समाधान’ पर निर्भर करती है, भारत अनुच्छेद 370 पर फ़ैसला वापस ले : शहबाज़ शरीफ

न्यूयॉर्क : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। उन्होंने अपना भाषणा अंग्रेजी में दिया। शहबाज ने यूएन को बताया कि उनका देश बाढ़ के प्रकोप से जूझ रहा है। लेकिन वैश्विक मंच पर भी उन्होंने कश्मीर का अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाया। शहबाज शरीफ ने कहा कि हमारा मुल्क जिन हालातों से जूझ रहा उसे किसी भी शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बच्चों और महिलाओं सहित करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान में जीवन पूरी तरह बदल गया है। इस भयानक बाढ़ में मेरे 1500 लोग दुनिया से चले गए जिसमें 400 से अधिक बच्चे शामिल थे। इससे कहीं अधिक लोगों पर बीमारी और कुपोषण का खतरा मंडरा रहा है। लाखों लोग अभी भी कैंपों में सूखी जमीन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह ‘दुनिया को पाकिस्तान की कहान बताने के लिए’ UNGA में आए हैं। अपने भाषण में उन्होंने उन चुनौतियों का भी जिक्र किया जिनसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था जूझ रही है।

बाढ़ और आर्थिक संकट के बीच शहबाज ने यूएन में भी अपना कश्मीर का मुद्दा उठया । उन्होंने 5 अगस्त 2019 को भारत की ओर से कश्मीर में उठाए गए कदम को वापस लेने की अपील की। भारत ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था जिसके बाद जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो गया था। कुछ दिनों पहले न्यूयॉर्क में इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने भी भारत से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया था।

भारत को लेकर शहबाज शरीफ ने कहा, ‘भारत को रचनात्मक जुड़ाव की खातिर अनुकूल माहौल बनाने के लिए विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए। हम पड़ोसी हैं और यह फैसला हमें लेना है कि हम शांति के साथ रहें या एक-दूसरे से लड़ते हुए।’ भाषण के आखिर में शरीफ ने कहा, ‘हम भारत सहित अपने पड़ोसियों के साथ शांति चाहते हैं। लेकिन दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता कश्मीर मुद्दे के ‘समाधान’ पर निर्भर करती है।’

शहबाज बोले- युद्ध कोई विकल्प नहीं
शहबाज शरीफ ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि भारत यह समझे कि दोनों देशों के पास आधुनिक हथियार हैं। युद्ध कोई विकल्प नहीं है, सिर्फ शांतिपूर्ण बातचीत से ही मुद्दों का समाधान हो सकता है ताकि आने वाले समय में दुनिया और अधिक शांतिपूर्ण हो सके।’ उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से हमारे बीच तीन युद्ध हुए हैं और इनके परिणामस्वरूप दोनों तरफ सिर्फ दुख, गरीबी और बेरोजगारी बढ़ी है। अब यह हम पर निर्भर है कि हम अपने मतभेदों, अपनी समस्याओं और अपने मुद्दों को शांतिपूर्ण बातचीत और चर्चा के माध्यम से हल करें

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