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राहुल गांधी के संघ पर प्रहार और “भारत जोड़ो यात्रा” को मिल रही अपार सफ़लता का असर, #मस्जिद में मोहन #भागवत : लवी सिंह की रिपोर्ट

Lavi Singh
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#मस्जिद में मोहन भागवत#
निश्चित रूप सें यह राहुल गांधी के संघ पर किए प्रहार और “भारत जोड़ो यात्रा” को मिल रही, अपार सफ़लता का असर ही है।कि संघ प्रमुख #मोहन भागवत# कुछ दिनो से मुस्लिम बुद्धिजीवियो सें बराबर मिलझुल रहे है,और आजकल मस्जिद-मस्जिद जा रहे है।

कुछ दिन पहले ही संघ प्रमुख मोहन भागवत देश‌ के 5/ मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल सें मिलने के लिए करीब 30/मिनट का समय दिया, और 70/मिनट तक बातचीत करते रहे।

#मोहन भागवत सें मुलाक़ात करने वाले,इस प्रतिनिधिमंडल में देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति ज़मीरुद्दी शाह,नेशनल लोक दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शाहिद सिद्दिक़ी, और कारोबारी सईद शेरवानी भी शमिल थे।

आज मोहन भागवत ने दिल्ली में #KGM# मस्जिद पहुँचकर,चीफ़ इमाम इलियासी सें अपनी सीधी मुलाकात की।

इन मुलाकातो का क्या मकसद है,यह तो सच आना अभी बाकी है,क्योंकि संघ,और #मोहन भागवत# बिना,अपने किसी मकसद के कुछ नही करते।

बहुत संभव है,कि वह सांप्रदायिकता,और मुस्लिमो के प्रति घृणा के संघ पर चस्पा कारगुज़ारियो को धोने के लिए पहुँचे हो।

5/मुस्लिम बुद्धिजीवियो की मोहन‌ भागवत के साथ बातचीत के जो विवरण आए है,वह बताते है,कि संघ,और उसके मुखिया कूडमंडूप सें अधिक कुछ नही।
मोहन भागवत ने 3/बिन्दुओ पर मुसलमानो सें सीधा,और साफ़तौर पर स्पष्टीकरण सहयोग मांगा।

1- गोहत्या 2- काफ़िर 3- जेहाद

हैरानी की बात यह है,कि दुनिया के सबसे बड़े संगठन होने का दावा करने वाले संघ को इसकी सच्चाई ही पता नहीं कि,मुसलमानो ने गोहत्या सें कब की अपनी दूरी बना रखी है,देश के तमाम राज्यो में गोहत्या को लेकर सख्त कानून बनाए गए है,और कही कोई भी मामला बड़े स्तर पर सामने नहीं आ रहा है,यद्यपि गोवा और नार्थ-ईस्ट में भाजपा की सरकारे ही गोमांस को वहां खिला रही है।

यही नही,भारत की टाप 10/बीफ़ निर्यातको में लगभग सभी जैन समुदाय,और अन्य धर्मों सें है।

संघ प्रमुख को मुस्लिम मंच के मौलानाओ ने यदि जेहाद और काफिर का अर्थ नही बताया समझाया,तो ऐसे मुस्लिम मंच को बंद कर देना चाहिए।
पश्चिमी प्रोपगेंडू में फंसकर जेहाद का अर्थ,किसी अन्य धर्म वालो के खिलाफ़ युद्ध समझना मुर्खता सें अधिक,और कुछ भी नही।

क्योकि जेहाद का अर्थ होता है “ख़ुद के अंदर की बुराई सें जद्दोजहद करके,उसे दूर करना।”

ऐसे ही संघ के ही दुष्प्रचार के ही कारण “काफ़िर” शब्द को हिन्दुओ को दी जाने वाली गाली के रूप में स्थापित कर लिया गया।जबकि इस शब्द की उत्पत्ति “कुफ्र” शब्द से हुआ है,और इसका अर्थ होता है ईश्वरीय शक्ति को नकारना,काफ़िर का अर्थ हुआ “ईश्वरीय शक्ति को नकारने वाला।”
इसमे वह हिन्दू कैसे हुआ जो कहता है,कि

ॐ।एकम् एव अद्वितीयं ब्रह्म। तत् सत्-असत्-रूपं सत्-असत्-अतीतं। तद् बिहाय अन्यत् किञ्चित् न अस्ति। त्रिकाल-घृतं त्रिकाल-अतीतं वा सर्वं तु खलु एकं ब्रह्म। जगत्यां यत् किञ्च अणु वा महत् वा उदारं वा अनुदारं वा तत् ब्रह्म एव ब्रह्म एव। जगत् अपि ब्रह्म तत् सत्यं न मिथ्या॥ :- उपनिषद {छान्दोग्य 6 / 2 / 1}

अर्थात
“ॐ। ब्रह्म ही एक मात्र सत्ता है।उसके अतिरिक्त कोई अन्य दूसरी सत्ता नही है।सत् तथा असत् इसी के रूप है। यह सत् और असत् दोनो से परे भी है।इसके अतिरिक्त अन्य कुछ नही है।तीनो काल में जो कुछ है,और तीनो काल सें परे जो कुछ है,वह वास्तव में एकमात्र,वही ब्रह्म है।ब्रह्माण्ड में जो कुछ है,लघु या विशाल, उदात्त अथवा हेय वह केवल ब्रह्म है,केवल ब्रह्म।विश्व भी ब्रह्म है।यह सत्य है,मिथ्या नही।”
#यह ईश्वर को स्वीकारने वाला ही सूत्र है।
#मोहन भागवत# को कोई यह पोस्ट पहुँचा दे।#

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