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Pakistan : …तो बाजवा का ही कार्यकाल बढ़ा दो, अब इमरान ने इस मांग से शरीफ सरकार को घेरा

Pakistan: इमरान खान ने एस्टेब्लिशमेंट और शरीफ सरकार के साथ सशर्त बातचीत की पेशकश भी की है। उन्होंने कहा है कि सरकार समय से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए राजी हो जाए, तो वे बातचीत कर सकते हैं…

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेनाध्यक्ष पद को लेकर जारी सियात में एक नया पहलू जोड़ दिया है। समझा जाता है कि इससे शहबाज शरीफ सरकार के लिए असमंजस बढ़ सकता है। खान ने मांग की है कि वर्तमान सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल अगले आम चुनाव तक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा है कि देश में ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ चुनाव के बाद जो भी सरकार निर्वाचित होकर सत्ता में आएगी, नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति उसे ही करनी चाहिए। आम राय है कि जनरल बाजवा का समर्थन मौजूदा सरकार के साथ है। इसे देखते हुए शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार के लिए जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने की मांग को ठुकराना एक कठिन फैसला होगा।

इमरान खान ने एस्टेब्लिशमेंट और शरीफ सरकार के साथ सशर्त बातचीत की पेशकश भी की है। उन्होंने कहा है कि सरकार समय से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए राजी हो जाए, तो वे बातचीत कर सकते हैं। सत्ताधारी गठबंधन ने इन दोनों मांगों को लेकर खान पर तगड़ा हमला बोला है। उसने आरोप लगाया है कि सत्ता में लौटने की बेसब्री के मारे इमरान खान अब ‘एस्टेब्लिशमेंट’ के साथ बातचीत का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान में ‘एस्टेब्लिशमेंट’ का मतलब सेना और खुफिया तंत्र के नेतृत्व से समझा जाता है। इमरान खान की पेशकश का जवाब देने के लिए पीडीएम सरकार ने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को आगे किया।

आसिफ ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘एक तरफ इमरान एस्टेब्लिशमेंट पर हमला बोल रहे हैं, और दूसरी तरफ बातचीत का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे हैं।’ दो दिन पहले गुंजरावाला की रैली में इमरान खान ने एस्टेब्लिशमेंट को चेतावनी दी थी कि अगर मौजूदा सरकार के तहत देश की अर्थव्यवस्था और बर्बाद हुई, तो इसके लिए उसे भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा- ‘मैं जानता हूं कि आप खुद को न्यूट्रल (तटस्थ) बताते हैं, लेकिन देश जिस दिशा में जा रहा है, पाकिस्तानी कौम उसके लिए आपको भी जिम्मेदार ठहराएगी।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान में सेना कभी इस तरह सियासी मुद्दा नहीं बनी, जैसा अभी हुआ है। इमरान खान की तरह पहले किसी नेता ने सेना नेतृत्व को विवाद में घसीटने की कोशिश नहीं की थी। कुछ समय पहले खान ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के प्रमुख नवाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ अली जरदारी अपनी पसंद का नया सेनाध्यक्ष नियुक्त करना चाहते हैं, क्योंकि अगर कोई ‘मजबूत और देशभक्त सेनाध्यक्ष’ नियुक्त हुआ, तो वह उन दोनों नेताओं की लूट के बारे में भी जवाब मांगेगा।

समझा जाता है कि अब जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर इमरान खान ने इस विवाद को और गरमा दिया है। उन्होंने कहा कि अगर नवाज शरीफ और जरदारी की पार्टियां अगले चुनाव में जीत कर सत्ता में लौट आती हैं, तो वे चाहे जिसे सेनाध्यक्ष नियुक्त करें, उस पर उन्हें कोई एतराज नहीं होगा। लेकिन उनके बयानों से पाकिस्तान में सेना और सत्ता के अघोषित संबंधों का मुद्दा सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। इससे सेना के भी असहज स्थिति बनने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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