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Pakistan Debt Swap : क्या पाकिस्तान को मदद दिलाने का वादा सचमुच निभा पाएंगे संयुक्त राष्ट्र महासचिव?

Pakistan Debt Swap: संयुक्त राष्ट्र आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से अनुरोध करेगा कि वह पाकिस्तान और अन्य देशों को इस शर्त पर अपने कर्ज लौटाने की बाध्यता से मुक्त कर दे कि वे उससे बची रकम का निवेश जलवायु परिवर्तन रोकने के उपायों पर करेंगे…

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटारेस के इस वादे से यहां संशय भरी उम्मीद जगी है कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक से पाकिस्तान को ‘कर्ज अदला-बदली’ (डेट स्वैप) की सुविधा दिलाने की कोशिश करेंगे। संशय का कारण आईएमएफ का चीन के कर्ज के बारे में पहले सामने आ चुका रुख है। पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने एक ऐसा फैसला किया, जो आईएमएफ की मर्जी के खिलाफ है।

गुटारेस बाढ़ से हुई तबाही का निरीक्षण करने पाकिस्तान आए थे। यहां से रवाना होने के ठीक पहले उन्होंने विकासशील देशों के लिए डेट स्वैप की सुविधा की बात की। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से अनुरोध करेगा कि वह पाकिस्तान और अन्य देशों को इस शर्त पर अपने कर्ज लौटाने की बाध्यता से मुक्त कर दे कि वे उससे बची रकम का निवेश जलवायु परिवर्तन रोकने के उपायों पर करेंगे। गुटारेस ने कहा- ‘हम जल्द ही होने वाली आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और जी-20 की बैठकों में ऐसे समाधानों की पुरजोर ढंग से वकालत करेंगे।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर वे वैश्विक संस्थान ऐसी सुविधा देने को तैयार हुए, तब भी आईएमएफ का पाकिस्तान के प्रति क्या रुख रहेगा, यह तय नहीं है। आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा था कि वह चीन से लिए गए कर्ज को लौटाने के कार्यक्रम पर उससे फिर से बातचीत करे। लेकिन बीते सप्ताहांत पाकिस्तान ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत लगे बिजली संयंत्रों को 50 अरब (पाकिस्तानी) रुपये का भुगतान करने का वादा कर दिया। समझा जाता है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जल्द ही होने वाली चीन यात्रा से पहले बीजिंग में सकारात्मक माहौल बनाने के मकसद से ये निर्णय लिया गया।

इस फैसले की घोषणा पाकिस्तन के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने बिजली संयंत्रों से जुड़े पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों की बैठक में की। बैठक में चीनी कंपनियों के पूरे बकाये का भुगतान करने का एलान किया गया। ये सहमति बनी कि पाकिस्तान ये भुगतान अपनी मुद्रा में करेगा, जिससे चीनी कंपनियां बाजार से डॉलर खऱीदेंगी। इस तरह इस भुगतान से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव नहीं पड़ेगा। लेकिन उसके राजकोष पर दबाव पड़ेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक इस समय पाकिस्तान जैसे संकटग्रस्त देश पश्चिमी देशों और चीन के बीच चल रही खींचतान का शिकार बने हुए हैं। आईएमएफ इन देशों पर चीन की कर्ज वापसी टालने के लिए दबाव डाल रहा है। जबकि चीन इसके लिए तैयार नहीं है। पाकिस्तान के लिए ये मुसीबत पहले से थी। बाढ़ की आपदा ने उसका संकट और बढ़ा दिया है। यहां लोगों की दुर्दशा देख कर गुटारेस द्रवित हो गए। उसका जिक्र करते हुए ही उन्होंने कर्ज अदला-बदली की सुविधा दिलाने की बात की।

गुटारेस ने कहा है- ‘पाकिस्तान जैसे देशों को ये मदद देना सिर्फ उनके साथ एकजुटता जताना या उदारता दिखाना नहीं है। बल्कि यह न्याय का सवाल है। पाकिस्तान जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है, जो समस्या दूसरे देशों की गतिविधियों के कारण पैदा हुई है।’ उन्होंने ध्यान दिलाया कि अब तक दुनिया में हुए कार्बन उत्सर्जन में पाकिस्तान का हिस्सा सिर्फ एक फीसदी है, जबकि जलवायु परिवर्तन की सबसे ज्यादा मार झेलने की आशंका वाले देशों में वह शामिल है।

जीडीपी में और गिरावट की आशंका: शरीफ
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि देश में भीषण बाढ़ से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो फीसदी से अधिक की गिरावट आ सकती है। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के साथ फोन पर बात करते हुए कहा कि सरकार देश में आसन्न खाद्य संकट को रोकने की तात्कालिक चुनौती से जूझ रही है।