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80 साल में ऐसा पहली बार हुआ, अब यूरोप में भी डेंगू पैर पसारने लगा : रिपोर्ट

अब यूरोप में भी डेंगू पैर पसारने लगा है. साल 2023 में यूरोपीय मुख्य भूमि पर डेंगू के बाहरी मामलों के बजाय स्थानीय मामलों की संख्या सबसे ज्यादा देखने में आई. करीब 80 साल में ऐसा पहली बार हुआ है.

यूरोप में डेंगू के यात्रा-संबंधी मामले मलेरिया की ही तरह बहुत असामान्य नहीं हैं. प्रभावित इलाकों की यात्रा के बाद जब लोग घर लौटते हैं, तो डेंगू से पीड़ित हो जाते हैं. कुछ दिनों तक आराम करते हैं और फिर सामान्य जीवन में वापस आ जाते हैं.

समस्याएं तब पैदा होती हैं, जब डेंगू से संक्रमित व्यक्ति खुद को सांख्यिकीय रूप से एक ऐसी स्थिति में पाते हैं, जिसकी वहां संभावना नहीं रहती. मसलन: उनके अपने देश में मौसम गरम हो, वे शहरी क्षेत्र में रहते हों या फिर घर पर ही उन्हें एडीज मच्छर काट ले, जो कि डेंगू के वायरस को एक व्यक्ति से दूसरे में फैलाता है.

यूरोप में इन सभी परिस्थितियों के एक साथ आने की संभावना बहुत कम रहती है.

साल 2015 और 2019 के बीच जमा किए गए आंकड़े बताते हैं कि यूरोपीय मुख्य भूमि पर स्थानीय रूप से डेंगू फैलने के मामले दुर्लभ थे. उन यूरोपीय देशों में जहां डेंगू फैलाने वाले मच्छर की पुष्टि हुई, वहां करीब 3000 मामले ऐसे थे, जो यात्रा से संबंधित थे. यानी, बाहर से आए लोगों से फैले थे. जबकि, स्थानीय रूप से प्रसारित डेंगू के सिर्फ नौ मामले देखे गए.

लेकिन साल 2022 में, यूरोपीय मुख्य भूमि पर संयुक्त रूप से ये मामले पिछले सात दशकों की तुलना में बहुत अधिक बढ़ गए. अकेले फ्रांस में ऐसे 65 मामले सामने आए.

साल 2023 में, मामलों की संख्या और भी अधिक बढ़ गई- 110 से ज्यादा मामले सामने आए. ये मामले फ्रांस और इटली में काफी ज्यादा थे, जबकि थोड़े-बहुत स्पेन में भी देखने को मिले.

 

डेंगू कैसे फैलता है
आमतौर पर डेंगू एडीज मच्छर से फैलता है.

यूरोप में स्थानीय संक्रमण के लिए, मच्छर को समुदाय में खुद को स्थापित करने की जरूरत है. इसका मतलब यह हुआ कि उसे वहां रहने, प्रजनन करने और जीवित रहने में सक्षम होना चाहिए. एडीज मच्छर विभिन्न प्रकार के होते हैं, लेकिन यूरोप में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली प्रजाति एडीज एल्बोपिक्टस है.

मच्छरों के पनपने के लिए तापमान अधिक होना चाहिए, करीब 15 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच. इसीलिए इसका खतरा गर्मी के मौसम में ही होता है.

और डेंगू तभी होगा, जब वायरस समुदाय में प्रवेश कर जाए. चूंकि डेंगू यूरोप में स्थानीय स्तर पर नहीं होता है, यह तभी होता है जब कोई यात्री विदेश से वायरस यहां लाता है.

डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जिसमें तेज बुखार, सिरदर्द और मन मिचलाने जैसे लक्षण दिखते हैं. हालांकि ज्यादातर मामलों में कोई लक्षण नहीं होता. इस बीमारी में मृत्यु अत्यंत दुर्लभ है, लेकिन उन स्थितियों में मृत्यु हो भी सकती है जहां गंभीर और दुर्लभ बीमारी का इलाज नहीं हो पाता.

संख्या इतनी ज्यादा क्यों है?
विशेषज्ञों का कहना है कि यूं तो साल 2023 में स्थानीय रूप से डेंगू के संक्रमण के मामलों में हुई वृद्धि के लिए कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला है.

डीडब्ल्यू से बातचीत में कोलोराडो स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में वैश्विक स्वास्थ्य के प्रोफेसर थॉमस जेनिश कहते हैं, “मेरा मानना ​​है कि पिछली गर्मियों में (2023) दक्षिणी यूरोप के अन्य हिस्सों और दक्षिणी फ्रांस में हमने जो देखा, वह एक शुरुआती घटना का हिस्सा है. यह सच है कि तापमान लंबे समय से बढ़ रहा है, लेकिन ऐसे कई कारण हैं जो एक साथ काम कर रहे हैं.”

जेनिश द्वारा किए गए शोध से साल 2009 के डब्ल्यूएचओ के डेंगू वर्गीकरण के लिए साक्ष्य देने में मदद मिली थी. यह वर्गीकरण गंभीर और गैर-गंभीर डेंगू के बीच अंतर करता है.

जेनिश कहते हैं मौसम, मच्छरों की बढ़ती आबादी, विदेशों में वायरस की बढ़ती घटनाएं और वेक्टर नियंत्रण, ये सभी पिछले दो वर्षों में देखी गई प्रवृत्ति के संदर्भ में कुछ संभावित स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं. हम नीचे इनमें से प्रत्येक खतरे की व्याख्या करेंगे.

ज्यादा तापमान
उच्च तापमान, न केवल दिन के दौरान बल्कि रात में भी, दक्षिणी यूरोप में डेंगू के प्रसार में योगदान दे सकता है. उच्च तापमान के लंबे समय तक बने रहने से मच्छरों को पनपने के लिए अधिक समय मिलता है, जिसकी वजह से काफी ज्यादा मच्छर पैदा होते हैं क्योंकि गर्मियां जल्दी शुरू होती हैं और पतझड़ तक गर्मी बनी रहती है.

डेंगू मैपिंग और मॉडलिंग ग्रुप का नेतृत्व करने वाले लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर ओलिवर ब्रैडी कहते हैं, “एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर पहली बार साल 2000 के दशक की शुरुआत में यूरोप में पाया गया था.”

डीडब्ल्यू से बातचीत में वह कहते हैं, “तब से यह भूमध्य सागर और मध्य यूरोप के आस-पास के कई क्षेत्रों में फैल गया है और बड़े जनसंख्या केंद्रों वाले क्षेत्रों में बहुत ज्यादा बढ़ गया है.”

एडीज मच्छर की आबादी इस समय पूरे इटली, क्रोएशिया, बोस्निया, अल्बानिया, स्लोवेनिया, हंगरी और फ्रांस के ज्यादातर हिस्सों में स्थापित हो गई है. साल 2017 से ये स्विट्जरलैंड, दक्षिणी जर्मनी के कुछ हिस्सों और ऑस्ट्रिया में भी स्थापित हो चुकी है.

द इंटरनेशनल सोसायटी फॉर निग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज के निदेशक मैरिएन कंपेयरेट कहती हैं कि हालांकि, मच्छरों की दूसरी प्रजातियों के विपरीत, एडीज अपने जीवनकाल में अपने प्रजनन क्षेत्र से बहुत दूर नहीं जाता है. यह मुश्किल से 100 मीटर के इर्द-गिर्द रहता है. इसका मतलब यह है कि इसे अन्य क्षेत्रों में फैलने में काफी ज्यादा समय लग सकता है.

कंपेयरेट ने डीडब्ल्यू को बताया कि इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि हमारे सामने अब इतने ज्यादा मामले क्यों आ रहे हैं.

वायरस का यात्रा-संबंधी संक्रमण बढ़ रहा है
यूरोप में डेंगू का बढ़ता प्रसार उन देशों में डेंगू के बढ़ते प्रसार पर भी निर्भर करता है, जहां यह वायरस स्थानीय है. किसी स्थान पर जितना अधिक डेंगू होगा, यात्रियों के संक्रमित होने और उसे घर ले आने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी.

ब्रैडी बताते हैं, “यूरोप के बाहर डेंगू के मामले साल 2010 और 2022 के बीच दोगुने हो गए हैं. इसका मतलब है कि अब वायरस के आने की संभावना बढ़ गई है.”

वैश्विक स्तर पर डब्ल्यूएचओ को रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. साल 2000 में दुनिया भर में जहां पांच लाख मामले थे, वहीं 2019 में यह संख्या 52 लाख हो गई. साल 2023 में अब तक दर्ज किए गए कुल मामलों की संख्या 45 लाख से ज्यादा है.

लेकिन डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मामले कम रिपोर्ट किए जाते हैं और अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल वास्तविक संख्या 40 करोड़ के करीब है.

वेक्टर नियंत्रण और जागरूकता
वायरस फैलाने वाले मच्छरों को वेक्टर कहा जाता है. वेक्टर नियंत्रण दरअसल उन उपायों का वर्णन करता है, जो वेक्टर के साथ मानव संपर्क को सीमित करने या खत्म करने के लिए किए जाते हैं.

शोध से पता चलता है कि यूरोपीय समुदाय के लोग ये नहीं जानते हैं कि ऐसे उभरते सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों से कैसे निपटा जाए.

कंपेयरेट एक उदाहरण के जरिए इसे स्पष्ट करती हैं कि पेरिस में स्वास्थ्य अधिकारियों ने अगस्त 2023 में डेंगू के साथ वापस आए एक व्यक्ति के घर पर धुआं कर दिया. फ्रांस की राजधानी पेरिस में यह पहली बार हो रहा था कि डेंगू के प्रसार को रोकने के लिए इस तरह से कीटनाशक का इस्तेमाल किया गया. कंपेयरेट बताती हैं कि मच्छरों को मारने या भगाने के लिए यह एक अनुपयुक्त तरीका था क्योंकि धुआं फैलाने का यह काम रात में किया गया था, जबकि एडीज प्रजाति दिन के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होती है. यानी यह काम दिन में करना कहीं ज्यादा अच्छा होता.

कंपेयरेट कहती हैं कि पूरे यूरोप में डॉक्टरों को डेंगू के लक्षणों के बारे में जागरूकता बढ़ानी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मामले हल्के या बिना लक्षण वाले होते हैं और इसलिए यदि आप नहीं जानते कि किन बातों का ध्यान रखना है, तो इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है.

जेनिश तो स्वीकार भी करते हैं कि हम यह भी नहीं जानते हैं कि आने वाली गर्मियों और और सर्दियों में यह खतरा किस तरह से बढ़ेगा.

जेनिश कहते हैं, “ईमानदारी से कहूं, तो हम एक संभावित घटना देख सकते हैं जो अगले 2-3 वर्षों में खुद को दोहराएगी नहीं और फिर दोबारा घटित होगी.”

हालांकि भले ही कोई भी निश्चित रूप से नहीं जानता हो, फिर भी जागरूक रहना फायदेमंद है.

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क्लेयर रोठ