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भारत का इतिहास : पूर्व मध्यकालीन भारत – 240 ई.पू– 800 ई : चोल साम्राज्य-चोल शासक : पार्ट 25

चोल शासक क्र.सं. शासक शासन काल 1. उरवप्पहर्रे इलन जेत चेन्नी – 2. करिकाल – 3. विजयालय 850-875 ई. 4. आदित्य (चोल वंश) 875-907 ई. 5. परान्तक प्रथम 907-953 ई. 6. गंधरादित्य 953 से 956 ई. 7. परान्तक द्वितीय 956 से 973 ई. 8. उत्तम चोल 973-985 ई. 9. राजराज प्रथम 985-1014 ई. 10. राजेन्द्र […]

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भारत का इतिहास : पूर्व मध्यकालीन भारत – 240 ई.पू– 800 ई : चोल साम्राज्य : पार्ट 24

चोल साम्राज्य : 250 ई.पू- 1070 ई. चोल साम्राज्य का सिक्का जो श्रीलंका में मिला चोल साम्राज्य का अभ्युदय नौवीं शताब्दी में हुआ और दक्षिण प्राय:द्वीप का अधिकांश भाग इसके अधिकार में था। चोल शासकों ने श्रीलंका पर भी विजय प्राप्त कर ली थी और मालदीव द्वीपों पर भी इनका अधिकार था। कुछ समय तक […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : कुषाण साम्राज्य, 60–240 ई : कुषाण वंश : पार्ट 23

कुषाण वंश ‘युइशि जाति’, जिसे ‘यूची क़बीला’ के नाम से भी जाना जाता है, का मूल अभिजन तिब्बत के उत्तर-पश्चिम में ‘तकला मक़ान’ की मरुभूमि के सीमान्त क्षेत्र में था। हूणों के आक्रमण प्रारम्भ हो चुके थे युइशि लोगों के लिए यह सम्भव नहीं था कि वे बर्बर और प्रचण्ड हूण आक्रान्ताओं का मुक़ाबला कर […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : कुषाण साम्राज्य, 60–240 ई : युएझ़ी लोग : पार्ट 22

कुषाण साम्राज्य ============== कुषाण साम्राज्य तत्कालीन तीन महत्त्वपूर्ण साम्राज्य, पूर्व में चीन, पश्चिम में पार्थियन (पहलव) एवं रोम साम्राज्य के मध्य में स्थित था। चूंकि पार्थियनों के रोम से सम्बन्ध अच्छे नहीं थे, इसलिए चीन से व्यापार करने के लिए रोम को कुषाणों से मधुर सम्बन्ध बनाने पड़े। यह व्यापार महान् ‘सिल्कमार्ग’ तथा ‘रेशममार्ग’ से […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : शक साम्राज्य, 123 ई.पू–200 ई – शकों की उत्पत्ति तथा प्रसार : पार्ट 21

  शक वंश 100 ई. पू. शक और शाक्य दोनों में फर्क है। बौद्ध पाठ्यों में शाक्य मुख्यत: गौतम गोत्र के क्षत्रिय बताए गए हैं। शाक्यों का हिमालय की तराई में एक प्राचीन राज्य था, जिसकी राजधानी कपिलवस्तु थी, जो अब नेपाल में है। शाक्य प्रथम शताब्दी ई.पू में प्राचीन भारत का एक जनपद था। […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : शक साम्राज्य, 123 ई.पू–200 ई – सिन्ध और पश्चिमी भारत का शक राज्य : पार्ट 20

शक साम्राज्य मगध के विशाल साम्राज्य की शक्ति के क्षीण होने पर जिन विदेशी आक्रान्ताओं के आक्रमण भारत पर शुरू हुए, उनमें से डेमेट्रियस और मीनान्डर सदृश यवन विजेताओं ने भारत के उत्तर-पश्चिमी प्रदेशों में अपने अनेक राज्य स्थापित किए, और उनके वंशधरों ने उनका शासन किया। पर इस युग में (दूसरी सदी ई. पू. […]

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आगरा का लाल क़िला का इतिहास : नूरउद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का न्याय मिसाल बना!

– मुगल सम्राट शाहजहाँ ने ग्रीष्मकालीन महल के एक भाग के रूप में शीश महल बनवाया था। इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता इसकी दीवारों और छत पर किया गया ग्लास मोजेक है। कांच के टुकड़ों में उच्च दर्पण गुणवत्ता होती है जो अर्ध-अंधेरे इंटीरियर में हजार तरीकों से चमकती और टिमटिमाती है। भारत किलों का देश […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : शुंग वंश, 184–123 ई.पू व : नृसिंह अवतार – सावित्री सत्यवान : पार्ट 19

  नृसिंह अवतार अन्य नाम -नरसिंहावतार अवतार – भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चतुर्थ अवतार धर्म-संप्रदाय – हिंदू धर्म प्राकृतिक स्वरूप – नर-सिंह (शरीर मनुष्य का और मुख सिंह का) शत्रु-संहार – हिरण्यकशिपु संबंधित लेख – प्रह्लाद, हिरण्याक्ष जयंती – वैशाख में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी नृसिंह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : शुंग वंश, 184–123 ई.पू व : मत्स्य पुराण – मनुस्मृति : पार्ट 18

मत्स्य पुराण वैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित ‘मत्स्य पुराण’ व्रत, पर्व, तीर्थ, दान, राजधर्म और वास्तु कला की दृष्टि से एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुराण है। इस पुराण की श्लोक संख्या चौदह हज़ार है। इसे दो सौ इक्यानवे अध्यायों में विभाजित किया गया है। इस पुराण के प्रथम अध्याय में ‘मत्स्यावतार’ के कथा है। उसी कथा के […]

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारत : शुंग वंश, 184–123 ई.पू व : अश्वमेध यज्ञ- सोम रस : पार्ट 17

अश्वमेध यज्ञ वैदिक यज्ञों में अश्वमेध यज्ञ का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह महाक्रतुओं में से एक है। ऋग्वेद में इससे सम्बन्धित दो मन्त्र हैं। शतपथ ब्राह्मण[ में इसका विशद वर्णन प्राप्त होता है। तैत्तिरीय ब्राह्मण कात्यायनीय श्रोतसूत्र आपस्तम्ब: आश्वलायन शंखायन[ तथा दूसरे समान ग्रन्थों में इसका वर्णन प्राप्त होता है। महाभारत में महाराज युधिष्ठिर द्वारा […]