इतिहास

‘मेरा शव लेने आप नहीं आना’

फांसी से पहले भगत सिंह आखिरी बार अपनी मां से मिले थे। तब उन्होंने ने अपनी मां विद्यावती से कहा था, ‘मेरा शव लेने आप नहीं आना और कुलबीर (छोटा भाई) को भेज देना, क्योंकि यदि आप आएंगी तो रो पड़ेंगी और मैं नहीं चाहता कि लोग यह कहें कि भगत सिंह की मां रो […]

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यह दुर्गा भाभी हैं

यह दुर्गा भाभी हैं, वही दुर्गा भाभी जिन्होंने साण्डर्स वध के बाद राजगुरू और भगतसिंह को लाहौर से अंग्रेजो की नाक के नीचे से निकालकर कोलकत्ता ले गयी. इनके पति क्रन्तिकारी भगवती चरण वर्मा थे. ये भी कहा जाता है कि चंद्रशेखर आजाद के पास आखिरी वक्त में जो माउजर था, वो भी दुर्गा भाभी […]

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पठान जाति’ की जड़े कहाँ से हैं, जानिये धरती के सूरमा पठानों का पूरा इतिहास!

पश्तून, पख़्तून ,पश्ताना या पठान दक्षिण एशिया में बसने वाली एक लोक-जाति है, पठान जाति की जड़े कहाँ थी इस बात का इतिहासकारों को ज्ञान नहीं लेकिन संस्कृत और यूनानी स्रोतों के अनुसार उनके वर्तमान इलाक़ों में कभी पक्ता नामक जाति रहा करती थी जो संभवतः पठानों के पूर्वज रहें हों। पश्तून क़बीलों और ख़ानदानों […]

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यह 14वीं सदी का खगोलीय माप के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है, ज़ूम इन करें और देखें!

Alka Singh ============= यह 14वीं सदी का खगोलीय माप बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है जो विज्ञान इतिहास के जिनेवा संग्रहालय में है। ज़ूम इन करें और देखें! आप इस पर उत्कीर्ण संस्कृत लिपि पा सकते हैं! जिसमें आप इस पर अंकित १२ राशियों के नाम मकर, धनु, मेष, मीन, कर्क, तुला, सिंह, कन्या […]

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अमर शहीद सरदार भगत सिंह का उर्दू में अपने भाई को लिखा गया ख़त!

Shahnawaz Alam ============== Sardar Bhagat Singh’s Urdu letter to his brother Kultar Singh (from jail on 3rd March 1931) Azeez Kultar Aaj Tumhari Ankhon Mein Ansu Dekh Kar Bahut Ranj Hua Aaj Tumhari Baat Mein Bahut Dard Tha Tumhare Ansu Mujhse Bardasht Nahi Hote. Barkhurdar, Himmat Se Taalim Haasil Karte Jaana, Aur Sehat Ka Khyal […]

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भोपाल सल्तनत के साहबज़ादे उमर फ़ारूक़ अली और उनकी पत्नी जैसलमेर की राजकुमारी बालाजी योगेश्वरी भाटी

भोपाल सल्तनत के साहबज़ादे उमर फ़ारूक़ अली और उनकी पत्नी जैसलमेर की राजकुमारी बालाजी योगेश्वरी भाटी (अंजली)। राजपूतो और मुग़लों नवाबों के रिश्ते कई पीढ़ियों से है और ये सबसे नई पीढ़ी है जिनकी शादी 2014 में हुई। उमर फ़ारूक़ भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान के बड़े भाई नवाब उबैदुल्लाह खान के वंशज हैं और योगेश्वरी […]

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भारत में आज़ादी से पहले के राजा-महाराजाओं के बारे में कुछ बातें!

भारत में आज़ादी से पहले जो राजा-महाराजा थे उनकी छवि ऐसी है जिसमें हाथी-घोड़े, नर्तकियाँ, राजमहल की कल्पना तैरने लगती है. मगर क्या वो बस ऐसे ही थे? इतिहासकार मनु पिल्लई ने भारत के महाराजाओं के दौर का फिर से अवलोकन किया है. यदि आप गहनों से लदी उनकी तस्वीरों, महलों और भव्य दरबारों के […]

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भारत का इतिहास : मध्यकालीन भारत : दिल्ली सल्तनत (1206–1526 ई.) : शासन करने वाले वंश एवं उनके शासक व शासन काल : पार्ट 47

दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ई. में की गई। इस्लाम की स्थापना के परिणामस्वरूप अरब और मध्य एशिया में हुए धार्मिक और राजनीतिक परिवर्तनों ने जिस प्रसारवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया, दिल्ली सल्तनत की स्थापना उसी का परिणाम थी। बाद के काल में मंगोलों के आक्रमण से इस्लामी जगत् भयभीत था। उसके आतंक के कारण […]

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भारत का इतिहास : मध्यकालीन भारत- 500 ई–1761 ई : भोज परमार (1018-1060 ई.) : पार्ट 46

भोज परमार ============= भोपाल स्थित राजा भोज की प्रतिमा पूरा नाम – भोज परमार पिता/माता – सिंधुराज पति/पत्नी – लीलावती उपाधि – ‘नवसाहसाक’ अर्थात् ‘नव विक्रमादित्य’ राजधानी – धार, मध्य प्रदेश वंश – परमार वंश शासन काल – 1018-1060 ई. तक विशेष – भोज परमार ने कई विषयों के अनेक ग्रंथों का निर्माण किया था। […]

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भारत का इतिहास : मध्यकालीन भारत- 500 ई–1761 ई : बहमनाबाद, चरक संहिता और हिन्दू शाही वंश : पार्ट 45

बहमनाबाद ========== बहमनाबाद वर्तमान समय में पाकिस्तान में सिन्धु नदी के मुहाने के निकट स्थित अति प्राचीन नगर है। विसेंट स्मिथ के अनुसार इस नगर का नाम ईरान के शाह बहमन अथवा अहसुर (465-425 ई.पू.) के नाम पर हुआ था। गुशतासिब का पौत्र था, किंतु यहाँ प्रागैतिहासिक अवशेष मिलने के कारण यह स्थान इससे कहीं […]