साहित्य

फलता फूलता जिस्मफ़रोशी का पेशा : एक सच्ची कहानी!

2004 का साल था, मई या जून का महिना रहा होगा, ऑफिस से आते वक़्त शाम को सभी अख़बार अपने साथ ले आता था, जिन्हें रात के ख़ाली वक़्त में पढता था, एक बार ऐसे ही तफरीह लेने के लिए मसाज सेण्टर का नंबर जोकि अख़बार के विज्ञापन में दिया हुआ था मिला दिया,,,, फ़ोन […]

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बेगम ज़लज़ला आफ़तुद्दौला की एक ग़ज़ल!

Kavita Krishnapallavi ===============· दिल्ली की इल्मी, अदबी और सक़ाफ़ती दुनिया की मुजस्सम और मुशक्कल तस्वीर पेश करती बेगम साहिबा की एक नयी ग़ज़ल! ग़ज़ल — बेगम ज़लज़ला आफ़तुद्दौला जित्तन कबिताई करते हैं, मुत्तन लिखते हैं इतिहास गोरखपुर का जलवा अब अफ़रोज़ हुआ है दिल्ली में हाजीपुर का हलवा बिकता दरियागंज की गलियों में सोनपूर के […]

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दुख्तरे नारंज व तुरन्ज : कहानी : पार्ट 3

पिछले कार्यक्रम में हमने कहा कि एक राजा ने नज़्र किया था कि अगर ईश्वर ने उसे बेटा प्रदान किया तो वह एक हौज़ में तेल और दूसरे हौज़ को शहद से भर देगा और उसे वह निर्धन लोगों के अधिकार में दे देगा। राजा का लड़का १८ वर्ष का हो चुका था जब उसने […]

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दुख्तरे नारंज व तुरन्ज : कहानी : पार्ट 2

प्राचीन काल में एक राजा ने नज़्र किया कि अगर ईश्वर ने मुझे बेटा दिया तो मैं एक हौज़ तेल और एक हौज शहद निर्धनों में बाटूंगा। राजा ने यह नज़्र वक्त पूरी की जब उसका बेटा 18 साल का हो चुका था। एक दिन उसके बेटे या युवराज ने अपने वाणों से बूढ़ी महिला […]

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राजा को जो भी नंगा कहेगा मारा जायेगा!

Kavita Krishnapallavi ================= राजा को जो भी नंगा कहेगा मारा जायेगा! भारी-भरकम हथियारों से लदी-फदी सेना और जासूसों और मंत्रियों और अधिकारियों और हत्यारों के गिरोहों और न्यायाधीशों से घिरा हुआ राजा अलफ़ नंगा है यह कहने वाले बच्चे जेलों में जवान हो रहे हैं। ऐसा कुछ जवानों ने भी कहा और वे सूली पर […]

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दुख्तरे नारंज व तुरन्ज : कहानी : पार्ट 1

पुराने समय की बात है एक राजा था जिसके कोई संतान नहीं थी। उसने हर दरवाज़ा खटखटाया कि उसे ईश्वर संतान दे किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ। उसने एक मनौती मानी कि यदि उसके यहां संतान होती है तो अपने महल के एक हौज़ को शहद से भरेगा और दूसरे को तेल से ताकि निर्धन […]

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राजा और वफ़ादार बाज़

पुराने समय में संदबाद नाम का एक राजा था। उसने एक बाज़ पाल रखा था जिसे वह बहुत चाहता था और उसे स्वंय से अलग नहीं करता था। संदबाद के आदेश पर सोने का एक छोटा का प्याला बनाया गया और उसमें पानी डाल कर बाज़ की गर्दन में लटका दिया जाता था ताकि जब […]

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मृत्यु-शैय्या पर एक विख्यात बुद्धिजीवी का आत्मचिंतन

Kavita Krishnapallavi =============== मृत्यु-शैय्या पर एक विख्यात मार्क्सवादी बुद्धिजीवी का आत्मचिंतन . बहुत ज्ञान बटोरा। जीवन कट गया किताबों के साथ। इंसानों की ज़रूरत पड़ी सिर्फ़ अपनी ज़रूरतों के लिए। कभी न फुरसत मिली, न ज़रूरत महसूस हुई लोगों के बारे में सोचने की, उनके दुखों के बारे में सोचने की या उन्हें प्यार करने […]

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हे सवपनिल आँखों वाली! कर दो दूर अंधेरे!!

मंजुल सिसोदिया =============== हे सवपनिल आँखों वाली! कर दो दूर अंधेरे। महका दो आँगन मेरा, हो जाए नया सवेरा। जन्मों के इस बंधन को, तोड़ न देना तुम। जगा आस जीवन में, छोड़ न देना तूम। मन मंदिर में, बिठा तझे मैं, आराधन तेरा कर लूँ। जग की सारी ख़ुशियों को, झोली में अपनी भर […]

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जब सड़कों पर बग़ावत का तूफ़ान खड़ा हो

Kavita Krishnapallavi =============== सच्चे और ईमानदार कवि हमेशा अपने को विफल और असंतुष्ट महसूस करते हैं — कम से कम मुझे तो ऐसा ही महसूस होता है। वे ख़ुद को अधूरा महसूस करते हैं और इस शंका में पड़े रहते हैं कि पता नहीं, वे अपनी बात ठीक से, या पूरी तरह कह पाये या […]