साहित्य

*अंतस् की 15 वीं ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का सफ़ल आयोजन*

Matia Poonam =========· 24 अक्टूबर 2020, शनिवार सायं 5 बजे से 7 बजे तक व्हाट्सऐप समूह, *अंतस् साहित्यिक परिचर्चा* में अंतस् की 15 वीं अखिल भारतीय काव्य-गोष्ठी का अतिसफल आयोजन हुआ। काव्य-गोष्ठी की विशेषता रही कि यह श्रीदुर्गा अष्टमी व नवमी के पवित्र पर्व के दिन आयोजित हुई। देवी माँ की असीम कृपा रही। संस्था […]

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रस्में दुनिया के सलीके भी अजीब हैं,,,कहो, तो भी गुनाह ना कहो, तो इक सज़ा!

Preet Pratima ============ रस्में दुनिया के सलीके भी अजीब हैं कहो, तो भी गुनाह ना कहो, तो इक सज़ा, कहो, तो किस से कहो, ना कहो तो, जीना ईक कज़ा तुम्हें सोचूं तो, खौफ ए ज़माना ना सोचूं तो, बे वफा, गिरिफत में अंधेरों के कब तक चले कोई थामा था जब, हाथ तुम्हारा ना […]

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यह कहानी एक नाचने वाली की संत पुत्री की है!

सोनाली मिश्र ============= चेतना का प्रस्फुटन इस भूमि की स्त्रियों पर आज की बात नहीं है. जैसा समय हुआ है, स्त्री ने अपनी चेतना के अनुसार कदम उठाए हैं, हाँ, आज की तरह समाज को दोषी नहीं ठहराया, रुदन नहीं किया! यह नौ दिन भिन्न भिन्न स्त्रियों की चेतना आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रही हूँ, […]

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तेरे ख़त से, ये जो तेरी महक आती है…..प्रीत….

Preet Pratima from – Chandigarh, Panjab ======= तेरे खत से  ये जो तेरी महक आती है चूम लेती हूं पढ़कर  बरबस उसको ख़यालों में खो जाती हूँ जब जब भी  करती हूं तस्सवुर तेरा जाने क्यों? अंदर तक  सिंहर सी जाती हूं  ये ख़त से ~~ तेरी झांकती आंखें हर लफज़ को ज़िंदा कर जाती […]

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”वहाँ” विक्रति मानसिकता के लोग दूसरों को मानसिक बीमार कहते है!

Shikha Singh Dist.farrukhabaad, uttar pradesh ======· पित्रसत्ता पर चोट गहरी लगती है जब अपनी कुर्सी को कब्जे से बहार निकलते देखने का डर पैदा होता है । सच तो ये है कि लोग अपने घरों में संस्कारों के जो पोटले लटकाते हैं गले में वो सच में बगुला भगत होते हैं और यही दोहरी मानसिकता […]

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आ भी जा के क़िस्सा तमाम हो मेरा…यूं रोज़ रोज़ इंतज़ार भी अच्छा नही होता…Jp

Vikram Partap Jp ====== हर हाल में सपने सलोने ले बैठ जाती है बच्चा रूठे जो माँ खिलोंने ले बैठ जाती है थक जाता हूँ मैं अक्सर धुप में चल कर तो माँ गोद में सर ले मेरे सिराहने बैठ जाती है . . Vikram Partap Jp Vikram Partap Jp आ भी जा के क़िस्सा […]

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2020 का साहित्य का नोबेल अमेरिकी कवयित्री लुईस ग्लूक को दिया गया : प्रस्तुत है उनकी एक कविता का हिंदी अनुवाद

Sawai Singh Shekhawat ====== इस बार का साहित्य-नोबेल ********************** दोस्तो वर्ष 2020 का साहित्य का प्रतिष्ठित नोबेल सम्मान इस बार अमेरिकी कवयित्री लुईस ग्लूक को दिया गया है।प्रस्तुत है उनकी एक कविता का हिंदी अनुवाद।यह त्वरित और जिंदा अनुवाद बेहद संवेदनशील वरिष्ठ कवि-कथाकार मित्र गोपाल माथुर ने किया है। एक कपोल कल्पना ◆◆◆◆◆◆◆◆◆ मैं आपको […]

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मेरी कहानी : ज़िन्दगी की तरफ़…

Tabassum Fatima ==========· हंस के अक्टूबर के अंक में मेरी कहानी ज़िन्दगी की तरफ़ जिंदगी के अन-देखे जज़ीरों का पीछा कितना मुश्किल होता है। आप खुद की शर्तों पर चलना शुरू करते हैं तो अनजाने डरावने मोड़ आपके रास्ते को रोक देते हैं एक खास मुद्दत में ये सोचना दुशवार होता है कि आपका फै़सला […]

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‘लहूज़दा जन्नत’

Arun Maheshwari ============== आज हमारे लिए यह बहुत खुशी का क्षण है जब हमें सूर्य प्रकाशन मंदिर से सरला की कविताओं के नए संकलन ‘लहूजदा जन्नत’ की तस्वीरें मिली है । जल्द ही हमें इस संकलन की प्रतियां भी उपलब्ध होगी । यहां हम इस संकलन की भूमिका के साथ इन तस्वीरों को मित्रों के […]

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”आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है”

Narendrakumar Dixit ग़ालिब का वेदनामूलक सौंदर्य शास्त्र :- (दीवान-ए-ग़ालिब के संदर्भ में) करुणा या वेदना के कवियों में गहरा असंतोष होता है। भवभूति को अपने समय में ऐसा कोई भी न मिला जो उन्हें समझ सके! उनके जैसा सोच सके! तभी तो खीझ कर उन्होंने कहा- “ये नाम के चिदिह न प्रथमन्यवज्ञां, जानन्ति ते किमपि […]