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#EVM और सैम पित्रोदा!…#EVM को अपने हिसाब से कंट्रोल किया जा सकता है, उसमें दख़ल संभव है?

Dayashankar Mishra
@DayashankarMi
EVM और सैम पित्रोदा!

सैम पित्रोदा, भारत में दूरसंचार क्रांति के जनक हैं. सैम का पूरा नाम सत्यनारायण पित्रोदा हुआ करता था, जो अमेरिका में काम करने के दौरान चेक पर बड़ा नाम होने के चलते बदल कर सैम कर दिया गया.

सैम 1980 में अमेरिका में दुनिया की पहली डिजिटल कंपनियों में से एक विस्कॉम स्विचिंग में काम कर रहे थे. आगे चलकर सैम इस कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट बन गए. इसमें उनकी हिस्सेदारी भी हो गई.

भारत में बहुत से लोग जब ‘कारसेवक’ बनने की तैयारी कर रहे थे. पढ़ाई-लिखाई से दूर जनता को हिंदू बनाने में लगे थे, तब सैम इस कंपनी को 40 लाख डॉलर में बेच चुके थे. उसके बाद वह भारत आते हैं. भारत से जो कुछ लिया था, उसे लौटाने का फ़ैसला करते हैं. अपनी पूरी शक्ति से काम में जुट जाते हैं.

1984 में सैम 10,000 रुपये की तनख़्वाह ठुकरा देते हैं. उनको लगता था, देश ने उनको बहुत कुछ दिया है. वह देश को देने में यक़ीन रखते हैं, बदले में कुछ लेने में नहीं. उनके पास शानदार तकनीकी शिक्षा थी और अमेरिका में काम करने का अनुभव भी. लेकिन वह अमेरिका में उस भविष्य को छोड़कर आए थे, जो उनको अरबों रुपये की संपदा का मालिक बना सकता था. यह लगभग वही समय था, जब कुछ लोग ‘एन्टायर पॉलिटिकल साइंस’ से MA की परीक्षा पास कर रहे थे. गुजरात यूनिवर्सिटी का ऐसा दावा है. इस डिग्री से देश पर राज करने की तैयारी हो जाती है.

जिन लोगों ने अपने घरों में टेलीफ़ोन लगवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटे हैं. जो दूरदराज़ के गांवों से तहसीलों और जिलों तक एक फ़ोन करने के लिए भटकते थे, सैम पित्रोदा का असली अर्थ वही समझ सकते हैं.

सैम भारत के सबसे प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से हैं. मशीनों और तकनीक के बारे में हमारे मुक़ाबले नि:संदेह अधिक जानकारी रखते हैं. इसलिए EVM मशीन के बारे में उनके विचारों और सुझाव को सुनना ज़रूरी है.
@sampitroda

1. EVM को अपने हिसाब से कंट्रोल किया जा सकता है। उसमें दख़ल संभव है.

2. भारत में इस समय उपयोग की जा रही ईवीएम मशीन स्टैंड अलोन मशीन नहीं है.

3. ईवीएम मशीन के साथ जब वीवीपैट मशीन को जोड़ा गया था, तभी से समस्या शुरू हुई. वीवीपैट एक अलग डिवाइस है जिसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर होता है.

4. वीवीपैट को ईवीएम से जोड़ने के लिए एक स्पेशल कनेक्टर इस्तेमाल किया जाता है. इसे एसएलयू कहते हैं. यह एसएलयू बहुत से सवाल खड़े करता है.

5. एसएलयू कनेक्टर ही वीवीपैट में यह दिखाता है कि किस बटन से भाजपा को वोट मिला किस बटन से कांग्रेस को और किस बटन से अन्य को. वोटिंग से पहले इसे प्रोग्राम किया जाता है.

6. एसएलयू जोड़ने के बाद ईवीएम स्टैंड अलोन मशीन नहीं रह जाती. इसमें हर तरह के वह काम किए जा सकते हैं, जिनकी बात हो रही है.

7. इसलिए हम चाहते हैं कि वीवीपैट से जो पर्ची निकलती है, वह अभी थर्मल प्रिंटर से निकलती है और उसे कुछ हफ्ते तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है, उसकी जगह ऐसा प्रिंटर इस्तेमाल किया जाए, जिससे निकली पर्ची को अगले 5 साल तक सुरक्षित रखा जा सके.

8. दूसरा बिंदु यह है कि यह पर्ची केवल कुछ समय के लिए ही वोटर को ना दिखाई दी जाए, बल्कि एक कागज पर प्रिंट होकर उसे मिले, जिसे वह अलग से रखे एक बॉक्स में वोट के रूप में डाल सके. यह बॉक्स किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़ा ना हो.

9. उसके बाद बक्से में डाली गई वोट की पर्चियों की गिनती की जाए.

10. भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों के टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ईवीएम में निश्चित तौर पर कुछ समस्या है, लेकिन भारतीय निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

11. एक प्रोफेशनल होने के नाते मैं कह रहा हूं कि जरूरी नहीं है कि हेराफेरी की ही गई हो, लेकिन मुझे पूरी आशंका है कि ईवीएम में हेराफेरी की जा सकती है. मैं इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता कि ईवीएम में सबकुछ ठीक है. ईवीएम को लेकर विश्वास का संकट खड़ा हो गया है.

12. राजनीतिक दलों को EVM के खिलाफ आंदोलन चलाना चाहिए. हस्ताक्षर अभियान चलाना चाहिए. जागरुकता अभियान चलाना चाहिए. जरूरत पड़े तो नौजवानों को इसके खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करना चाहिए.

13. राजनीतिक दलों को ईवीएम से चुनाव के बहिष्कार के विकल्प पर भी विचार करना चाहिए.

14. राहुल गांधी ईवीएम के मुद्दे को लेकर गंभीर हैं. इस पर मेरी उनसे बातचीत हुई है. यह स्वीकार करना संभव नहीं है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में EVM से छेड़छाड़ के बिना राहुल अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गए.

16. मैं जल्द ही तकनीकी विशेषज्ञों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने EVM पर एक प्रेस कांफ्रेंस करने की योजना बना रहा हूं.
#SenseWithSam #EVM