दुनिया

अँधा कर रहा दुनिया का बढ़ता तापमान, चौंकाती है यह रिसर्च

दुनिया का बढ़ता तापमान इंसान को अंधा बना रहा है. यह दावा कनाडा के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है. अमेरिका के 50 राज्‍यों में 17 लाख लोगों पर हुई रिसर्च बताती है कि जलवायु परिवर्तन किस हद तक इंसान की आंखों की रोशनी पर बुरा असर छोड़ रहा है. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे गर्म तापमान में रहने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्‍यादा असर दिख रहा है. जानिए रिसर्च की बड़ी बातें…(फोटो:Pixabay/Freepik)

दुनिया का बढ़ता तापमान इंसान को अंधा बना रहा है. यह दावा कनाडा के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है. अमेरिका के 50 राज्‍यों में 17 लाख लोगों पर हुई रिसर्च बताती है कि जलवायु परिवर्तन किस हद तक इंसान की आंखों की रोशनी पर बुरा असर छोड़ रहा है. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे गर्म तापमान में रहने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्‍यादा असर दिख रहा है. जानिए रिसर्च की बड़ी बातें…(फोटो:Pixabay/Freepik)

वैज्ञानिकों का कहना है कि रिसर्च के दौरान देखा गया है कि ठंडी जगहों के मुकाबले गर्म हिस्‍से में रहने वाले 50 फीसदी लोग आंखों की समस्‍या से जूझते हैं. इसकी सीधी सी वजह है, सूर्य से जमीं तक आने वाले अल्ट्रवाॅयलेट लाइट (पराबैंगनी किरणें). यह आंखों के कॉर्निया, लेंस और रेटिना को डैमेज करती हैं. इसके साथ ही यह आंखों में खुजली और संक्रमण की वजह बनती हैं. (फोटो: Pixabay/Freepik)

वैज्ञानिकों का कहना है कि रिसर्च के दौरान देखा गया है कि ठंडी जगहों के मुकाबले गर्म हिस्‍से में रहने वाले 50 फीसदी लोग आंखों की समस्‍या से जूझते हैं. इसकी सीधी सी वजह है, सूर्य से जमीं तक आने वाले अल्ट्रवाॅयलेट लाइट (पराबैंगनी किरणें). यह आंखों के कॉर्निया, लेंस और रेटिना को डैमेज करती हैं. इसके साथ ही यह आंखों में खुजली और संक्रमण की वजह बनती हैं. (फोटो: Pixabay/Freepik)

शोधकर्ता इसको लेकर चिंता में है. उनका मानना है कि जिस तरह के जलवायु में परिवर्तन हो रहा है और उसके कारण तापमान बदल रहा है. इससे कई खतरे पैदा होंगे. पहले ही दुनिया का औसत तापमान 1.1 सेल्‍स‍ियस तक पहुंच चुका है. अध्‍ययन करने वाली टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एस्‍मे फुलर थॉमसन कहते हैं, ग्‍लोबल टेम्‍प्रेचर यानी वैश्विक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में यह जरूरी है कि कहीं बुजुर्गों की आंखों की समस्‍या और न बढ़ जाए. (फोटो: Pixabay/Freepik)

शोधकर्ता इसको लेकर चिंता में है. उनका मानना है कि जिस तरह के जलवायु में परिवर्तन हो रहा है और उसके कारण तापमान बदल रहा है. इससे कई खतरे पैदा होंगे. पहले ही दुनिया का औसत तापमान 1.1 सेल्‍स‍ियस तक पहुंच चुका है. अध्‍ययन करने वाली टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एस्‍मे फुलर थॉमसन कहते हैं, ग्‍लोबल टेम्‍प्रेचर यानी वैश्विक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में यह जरूरी है कि कहीं बुजुर्गों की आंखों की समस्‍या और न बढ़ जाए. (फोटो: Pixabay/Freepik)

शोधकर्त थॉमसन कहते हैं, आंखों की घटती रोशनी और औसत तापमान के बीच जो कनेक्‍शन मिला है वो चौंकाने वाला है. चिंता को बढ़ाने वाला है. जर्नल ऑप्‍थैल्मिक एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, अध्‍ययन के दौरान 65 साल के लोगों का 2012 से 2017 के बीच का डाटा शामिल किया गया. इसके अलावा रिसर्च में शामिल लोगों को सवाल-जवाब किए गए. यह भी देखा गया कि चश्‍मा लगाने के बाद भी उन्‍हें दिखना बंद हुआ या रोशनी कम हो गई.(फोटो: Pixabay/Freepik)

शोधकर्त थॉमसन कहते हैं, आंखों की घटती रोशनी और औसत तापमान के बीच जो कनेक्‍शन मिला है वो चौंकाने वाला है. चिंता को बढ़ाने वाला है. जर्नल ऑप्‍थैल्मिक एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, अध्‍ययन के दौरान 65 साल के लोगों का 2012 से 2017 के बीच का डाटा शामिल किया गया. इसके अलावा रिसर्च में शामिल लोगों को सवाल-जवाब किए गए. यह भी देखा गया कि चश्‍मा लगाने के बाद भी उन्‍हें दिखना बंद हुआ या रोशनी कम हो गई.(फोटो: Pixabay/Freepik)

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे हाल में आंखों की कई बीमारियों का खतरा है. जैसे- मोतियाबिंद. जिसमें आंखों के लेंस से धुंधला दिखता है. यह बीमारी इंसान को अंधा बना सकती है. इसके अलावा ग्‍लूकोमा का खतरा भी है, जिसमें आंखों की ऑप्टिक नर्व डैमेज हो जाती हैं. रिसर्च के दौरान सामने आया कि न्‍यूयॉर्क जैसी जगहों पर खतरा कम है. वहीं फ्लोरिडा, टेक्‍सास और जॉर्जिया जैसी अधिक तापमान वाली जगहों पर इसका खतरा ज्‍यादा है. (फोटो: Pixabay/Freepik)

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे हाल में आंखों की कई बीमारियों का खतरा है. जैसे- मोतियाबिंद. जिसमें आंखों के लेंस से धुंधला दिखता है. यह बीमारी इंसान को अंधा बना सकती है. इसके अलावा ग्‍लूकोमा का खतरा भी है, जिसमें आंखों की ऑप्टिक नर्व डैमेज हो जाती हैं. रिसर्च के दौरान सामने आया कि न्‍यूयॉर्क जैसी जगहों पर खतरा कम है. वहीं फ्लोरिडा, टेक्‍सास और जॉर्जिया जैसी अधिक तापमान वाली जगहों पर इसका खतरा ज्‍यादा है. (फोटो: Pixabay/Freepik)